Home » इंडिया » Jayalalithaa's biographer: She was like Indira but had to face more hurdles
 

वो इंदिरा जैसी ही थीं लेकिन संघर्ष उनसे ज़्यादा किया: वासंती

लमत आर हसन | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST

‘ऐसा लग रहा है, जैसे अब कोई सेंसरशिप नहीं है.’ जयललिता के गुज़र जाने के बाद वरिष्ठ पत्रकार वासंती ने यही कहा. वासंती सालों तक तमिलनाडु में पत्रकारिता करते हुए जयललिता के जटिल व्यक्तित्व की परतें खोलने की कोशिश कर चुकी हैं.  

तमिलनाडु में दो साल का समय निकालने के बाद 2011 में वासंती ने जयललिता की जीवनी लिखने का फैसला किया जिसका शीर्षक 'जयललिताः एक पोर्ट्रेट' है. पेंग्विन बुक्स ने इस किताब के प्रकाशन पर स्थाई रूप से रोक लगा दी थी. वासंती हिम्मत हार गईं और दो साल के लिए अवसाद में चली गईं.

जयललिता के निधन की खबर आते ही उन्होंने कैच से कहा ‘मैं कभी कोई जीवनी नहीं लिखूंगी.’उन्होंने राहत की सांस ली कि अब उनके खिलाफ अवमानना के सारे मामले ख़त्म हो जाएंगे. अब उनके बारे में कोई भी लिख सकता है. हालांकि वासंती यह भी कहती हैं कि ‘मुझे बहुत दुख है कि वे अब इस दुनिया में नहीं रहीं. वे करिश्माई व्यक्तित्व की धनी थीं. मुझे एक निष्पक्ष पत्रकार की तरह सोचना चाहिए.’

जयललिता की इस प्रतिबंधित जीवनी पर आउटलुक इंडिया में प्रकाशित एक कर्टेन रेज़र में वासंती ने कहा था, ‘मैं एक बार एक केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद थी और मुझे बहुत शर्मिन्दगी महसूस हुई. मैंने दूसरे पक्ष के वकीलों को मेरे खिलाफ बोलते सुना. वे कह रहे थे कि मैं झूठी हूं और 6 करोड़ लोगों की नेता को बदनाम करने की कोशिश कर रही हूं. मैं अभी तक उस बात को भुला नहीं पाई हूं.’ 

चार महीने बाद कुछ सामान्य होने पर वासंती ने एक और जीवनी लिखी और इस बार शीर्षक था, अम्माः जयललिता का मूवी स्टार से राजनीतिक क्वीन बनने का सफर’. इसका प्रकाशन जगरनॉट एप एंड बुक्स ने किया है.

सवाल-जवाब

जयललिता पर लिखी गई आपकी पहली किताब पर पेंग्विन प्रकाशन ने प्रतिबंध क्यों लगाया?

वे नहीं चाहती थीं कि कोई उनके बारे में लिखे. यह एक तरह से असत्यापित जीवनी थी. लेकिन यह ऐसी ही होनी चाहिए थी, वरना यह जीवनी न रह कर उनकी स्तुति बन जाती. उन्होंने कहा, यह उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन था.

अपनी लिखी हुई किताब पर प्रतिबंध लगना कैसा लगता है? आपकी कड़ी मेहनत बेकार गई और न तो मीडिया ने आपका साथ दिया और न ही प्रकाशक ने?

बहुत ही बुरा और भयावह लगता है. मैं दो साल तक अवसाद में रही. 

क्या आपको लगता है कि आप जयललिता जैसी पहेली सुलझा सकीं? क्या आपकी जीवनी जयललिता के व्यक्तित्व के साथ न्याय किया है?

मैंने उन्हें समझने की बहुत कोशिश की लेकिन वो एक पहेली ही थीं. मुझे लगता है कि मैं अपने काम के प्रति काफी निष्पक्ष और उनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण रही.

जयललिता की कोई एक खासियत बताएं जो उन्हें देश-दुनिया की बाकी दूसरी महिला राजनेताओं से अलग करती है?

वे बेहद बहादुर थीं, जिसके बल पर वे इस पुरूष प्रधान समाज में अकेले अपने दम पर खड़ी रहीं.

जयललिता की जीवनी लिखते हुए क्या आपको कभी धमकी भी मिली?

लिखने के दौरान तो नहीं लेकिन बाद में जब वे मेरे खिलाफ अदालत में पहुंची तो उनके चैनल जया टीवी पर जैसे मेरी बखिया ही उधेड़ कर रख दी गई और जब एक बार मैं अदालत गई तो वहां मुझे धमकी दी गई.

अगर आपको जयललिता की तुलना किसी अन्य महिला राजनेता से करनी हो तो किससे करेंगी?

यह थोड़ा मुश्किल है लेकिन उनकी तुलना इंदिरा गांधी से की जा सकती है मगर इंदिरा गांधी को उतनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा जितनी कि इंदिरा गांधी को.

क्या आपको सोनिया गांधी का राजनीतिक सफर किसी गुत्थी जैसा नहीं लगता? क्या आप उन पर कोई जीवनी नहीं लिखेंगी? या फिर आप अब किसके जीवन पर किताब लिखना चाहेंगी?

नहीं! अब और जीवनी नहीं लिखूंगी.

क्या जयललिता ने आपकी किताब पढ़ी है?

हां मुझे लगता है.

अब जबकि जयललिता इस दुनिया में नहीं हैं तो आपको क्या लग रहा है?

मुझ पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है. 

First published: 7 December 2016, 8:07 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी