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'ओडिशा ने छत्तीसगढ़ से सबक सीखा जिसका उसे फायदा हुआ': जीन द्रेज़

श्रिया मोहन | Updated on: 26 January 2016, 9:15 IST
QUICK PILL
आम तौर पर ओडिशा को भारत का पिछड़ा राज्य समझा जाता है लेकिन इस राज्य \r\nने जनवितरण प्रणाली(पीडीएस) में उल्लेखनीय कामयाबी हासिल की है. राज्य ने \r\nपीडीएस में कालाबाजारी रोकने में काफी हद तक सफलता हासिल की है. राज्य के \r\nकुछ इलाकों में पीडीएस शत प्रतिशत सफलता हासिल करने की तरफ बढ़ रहा है.
राज्य\r\n को पीडीएस में मिली सफलता को समझने के लिए कैच संवाददाता श्रिया मोहन ने \r\nबात की अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़ से. पढ़ें बातचीत के चुनिंदा अंशः

आपके अनुसार ओडिशा में पीडीएस के उल्लेखनीय प्रदर्शन के पीछे क्या कारण है?


ये सच है कि पिछले कुछ सालों में ओडिशा के पीडीएस में बहुत सुधार आया है. नेशनल सैंपल सर्वे के आंकड़ों और कई स्वतंत्र अध्ययनों दोनों से इसकी पुष्टि होती है. मिहिका चटर्जी के कोराटपुट के पीडीएस के अध्ययन और साल 2013 में हुए पब्लिक इवैलुएशन ऑफ एनटाइटलमेंट प्रोग्राम(पीप) इनमें प्रमुख हैं.

पीप के सर्वे में में शामिल परिवारों में से 98 प्रतिशत को पिछले तीन महीनों में पीडीएस का राशन मिला था. यानी इस दौरान पश्चिमी ओडिशा जहां ये सर्वे किया गया वहां पीडीएस करीब शत प्रतिशत सफलता पाने की राह पर है.


कुछ हफ्ते पहले ही ओडिशा में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक(एनएफएसए) लागू हुआ है. इस नीति के आलोचकों का कहना है कि इससे राज्य के गरीबों को नुकसान होगा क्योंकि एनएफएसए के तहत पांच लोगों के परिवार को प्रति व्यक्ति पांच किलो के हिसाब से 25 किलो अनाज मिलेगा, जबकि पीडीएस के तहत हर परिवार को 35 किलो अनाज मिलता है. ऐसे में क्या एनएफएसए से गरीबों को नुकसान होगा?


ये सही नहीं है. ओडिशा में गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवारों के अनाज के कोटे को 35 किलो से घटाकर 25 किलो कर दिया गया है. इस कानून से प्रत्येक परिवार के पीडीएस के अनाज के औसत कोटे में कोई कमी नहीं आएगी.

ओडिशा ने पीडीएस के मामले में छत्तीसगढ़ से सबक सीखा जिसका उसे काफी फायदा हुआ

एनएफएसए प्रति परिवार के बजाय प्रति व्यक्ति मिलेगा यानी प्रति व्यक्ति पांच किलो, जबकि पीडीएस में हर परिवार को 25 किलो अनाज मिलता है. इससे अनाज का ज्यादा समान वितरण होगा. फिर भी ये सच है कि छोटे बीपीएल परिवारों को एनएफएसए के तहत पहले की तुलना में कम अनाज मिलेगा. इस नीति का ये आनुषंगिक परिणाम है.

ऐसी स्थिति से बचने के लिए अंत्योदय कोटा का विस्तार करने की जरूरत है. इसके तहत ज्यादा गरीब छोटे परिवारों, अकेली महिला, बुजर्गों वाले परिवारों को शामिल किया जा सकता है. राज्य में जिन परिवारों को पास अंत्योदय कार्ड है उन्हें अभी भी हर महीने 35 किलो राशन मिलता है.

ओडिशा ने पीडीएस में कालबाजारी रोकने में कैसे कामयाबी हासिल की?


ओडिशा ने छत्तीसगढ़ से सबक सीखा जिसका उसे काफी फायदा हुआ. पीडीएस की सीमा का विस्तार किया गया, राशन की बुनियादी कीमत घटायी गयी और इसे जनता के लिए आसान बनाया गया. इसकी वजह से पीडीएस पर जनदबाव बढ़ा. ज्यादातर पीडीएस दुकानों को निजी हाथों से लेकर सामुदायिक संस्थाओं के नियंत्रण में दे दिया गया.

पूरे सिस्टम को कंम्प्यूटरीकृत किया गया. इसकी गहन निगरानी सुनिश्चित की गयी. लोगों की शिकायतें सुनने के भी इंतजाम किए गए. ट्रांसपोर्ट एजेंसी को डिस्ट्रिब्यूशन एजेंसी से अलग किया गया. वितरण की तारीख तय की गयी. इस तरह के कदमों का सकारात्मक असर पड़ा. ओडिशा में पीडीएस दुकानों की देखरेख कुछ एहतियात के साथ ग्राम पंचायतों के हाथ में होती है. मेरे लिहाज से ये समझदारी भरा कदम था. 

राज्य में पीडीएस की सफलता के कुछ जमीनी उदाहरण आप देना चाहेंगे?


पिछले महीने हमने सुंदरगढ़ ज़िले के एक ग्राम पंचायत में चावल और गेहूं का वितरण देखा. हम इससे काफी प्रभावित हुए. दिसंबर के पहले पखवाड़े में लोगों को एनएफएसए कार्ड बांट दिया गया था. दिसंबर के दूसरे पखवाड़े तक लोगों को एनएफएसए कोटे का पूरा राशन मिलना लगा. राशन का वितरण बहुत ही सुव्यवस्थित था.

हमने आधिकारिक सूची से 200 राशन कार्डों की जांच की और उनमें से एक भी फर्जी नहीं थाः ज्यां द्रेज

राशन तौलने के लिए इलेक्ट्रानिक तराजू का प्रयोग किया जा रहा था. लोगों को अपने कोटे के राशन के बारे में पूरी जानकारी थी. हमने आधिकारिक सूची के 200 राशन कार्ड की जांच की और उनमें से एक भी फर्जी नहीं था. हालांकि उस दौरान स्थानीय मीडिया में एनएफएसए को लेकर कई नकारात्मक खबरें आई थीं. उनके पीछे भी कोई वजह होगी लेकिन वो तस्वीर का एक रुख ही है.

आपके हिसाब से ओडिशा में अभी किन क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है?


राज्य में अभी बहुत क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है. राशन के मामले में पीडीएस में काफी सुधार हुआ है लेकिन मेरे ख्याल से केरोसीन जैसे कई सामग्रियों के वितरण के मामले में अभी काफी काम करने की जरूरत है. दूसरे राज्यों की तरह ओडिशा में भी एनएफएसए के परिवारों के चयन का काम काफी चुनौती भरा है. ओडिशा में स्वघोषणा का विकल्प चुना है, जिसकी अपनी खामियां हैं.

राज्यम में अंत्योदय योजना को लेकर भी भ्रम है जो गंभीर समस्या है. गरीबों परिवारों की आर्थिक मदद के लिए समाजिक सुरक्षा पेंशन के अलावा अंत्योदय कार्यक्रम काफी महत्वपूर्ण है. इसपर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है. एनएफएसए का ये महत्वपूर्ण हिस्सा है.

First published: 26 January 2016, 9:15 IST
 
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