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झारखंड: कथित गोरक्षकों ने असली गोरक्षकों को मार दिया

विकास कुमार | Updated on: 23 March 2016, 8:21 IST
QUICK PILL
  • झारखंड के लातेहार जिले के झाबड़ा गांव के पास दोनों मुस्लिम युवकों की लाश पेड़ से टंगी मिली. जिस जगह उनकी लाश मिली उसे खपरैल बर्रा कहते हैं
  • दोनों के चेहरे कपड़े से बंधे थे और दोनों\r\n के मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था. इससे साफ लग रहा था कि कुछ लोगों ने मिलकर \r\nदोनों को पेड़ से लटकाया था

झारखंड के लातेहार जिले में 18 मार्च को बालूमाथ प्रखंड के झबाड़ गांव के पास 35 वर्षीय मजलूम अंसारी और 15 वर्षीय इम्तियाज खान नामक दो पशु व्यापारियों के शव पेड़ से लटके पाये गये.

मजलूम अंसारी लातेहार के नवादा गांव के रहने वाले थे और इम्तियाज अरहारा गांव के. स्थानीय लोगों के मुताबिक मजलूम और इम्तियाज के साथ एक और व्यक्ति था, जो उनसे थोड़ा आगे-आगे बाईक से चल रहा था. वो किसी तरह से वहां से बच निकलने में कामयाब रहा.

पुलिस के मुताबिक इनदोनों की हत्या लूटमार करने वाले किसी गैंग ने की है. लेकिन जब कैच ने बालूमाथ में कुछ लोगों से संपर्क किया तो उन्होंने पुलिस द्वारा बताई जा रही कहानी को सिरे से खारिज कर दिया.

नाम जाहिर न करने की शर्त पर बालूमाथ के एक युवक ने बताया, “मजलूम काफी समय से मेलों से पशुओं को खरीदने और बेचने का काम करता था. वो मेले से कमजोर गाय, बैल और भैंस खरीदते थे क्योंकि उसके लिए कम दाम देना पड़ता था. खरीदे गए पशु को मजलूम दो-तीन महीने तक अपने पास रखता था, खिलाता-पिलाता था और जब उनकी सेहत ठीक हो जाती थी तब उसे दूसरे किसी हाट या मेले में बेच देता था.”

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गांव के ग्रामीणों के मुताबिक उस दिन भी मजलूम अपने आठ बैलों को लेकर एक मेले में जा रहा था. लेकिन रास्ते में ही उसके साथ यह हादसा हो गया. जिस युवक ने यह बातें कैच न्यूज़ को बताई वह हादसे के दिन यानी 18 मार्च को सुबह करीब साढ़े आठ बजे उस स्थान पर पहुंचा था, जहां दोनों व्यक्तियों को फांसी लगाकर पेड़ पर टांग दिया गया था.

ग्रामीणों के मुताबिक दोनों पशु व्यापारी उस दिन भी बैलों को लेकर मेले में जा रहे थे

उस युवक ने वहां जो कुछ देखा और बताया वह पुलिस की कहानी से मेल नहीं खाता. कैच से फोन पर बात करते हुए यह युवक बताता है, ‘इस दिन सुबह सात साढ़े सात बजे के करीब हरहरागंज के प्रखंड उपप्रमुख का फोन मेरे पास आया. उन्होंने ही मुझे दोनों युवकों की हत्या की जानकारी दी थी. उन्होंने मुझे घटनास्थल पर आने के लिए भी कहा. मैं करीब आठ बजे के आस पास झाबड़ा पहुंच गया था.

झाबड़ा गांव के पास से एक कच्ची सड़क जाती है. इसी सड़क पर दोनों व्यक्तियों की लाश पेड़ से टंगी थी. उसे खपरैल बर्रा कहते हैं. वह घटनास्थल की जानकारी देते हुए आगे बताता है, "उसी कच्ची सड़क पर एक साखू का पेड़ है, जिसकी एक डाल पर इम्तियाज और दूसरे पर मजलूम की लाश टंगी हुई थी. चेहरे पर कपड़ा बंधा था. दोनों के हाथ भी पीछे की तरफ बंधे हुए थे और दोनों के मुंह में कपड़ा ठूंसा गया था. साफ लग रहा था कि कुछ लोगों ने मिलकर इन दोनों को पेड़ से लटकाया है. पेड़ के पास ही आठ में से छ: बैल खड़े थे.”

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यह युवक आगे की बातचीत में खुद ही सवाल करता है, "पुलिस कह रही है कि इनकी हत्या लूटपाट के लिए की गई है. किस चीज की लूट? जानवर बेचने खरीदने वालों के पास कोई मोटा पैसा तो होता नहीं है. अगर कोई पशु लूटने आता तो पशु तो ले ही जाता. ऐसे में पशु वहां नहीं होने चाहिए थे. पुलिस को बताना चाहिए कि आखिर जिन्होंने इन्हें मारा वो इनसे क्या लूटना चाह रहे थे.”

झाबड़ा के पास ही रहने वाले एक दूसरे व्यक्ति से जब कैच ने फोन पर बात की तो उन्होंने भी पुलिस की कहानी से नाइत्तेफाक दर्ज करते हुए कहा कि यह घटना लूटपाट की नहीं है.इनका कहना है कि जिन पांच लोगों को अब तक पुलिस ने गिरफ्तार किया है, वो सब के सब अच्छे-खासे परिवार से हैं.

यह मानना मुश्किल है कि वो किसी के साथ छिनैती करेंगे. ये आगे कहते हैं, “अच्छे खासे परिवार से जुड़े ये पांचों लोग गौरक्षा क्रांति मंच से जरूर जुड़े हुए हैं.”

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इस मामले में बजरंग दल के बालुमाथ प्रखंड के मुखिया अरुण साव का नाम भी आ रहा है. अरुण को पुलिस अभी गिरफ्तार नहीं कर पाई है. अरुण के बारे में स्थानीय लोगों ने कैच को बताया कि अरुण आपराधिक चरित्र का है. स्थानीय लोगों ने कैच को बताया कि साल 2013 में अरुण साव और उनके लोगों ने इसी गांव के पास एक ईंट भट्टा मालिक मुबारक कुरैसी को बुरी तरह से पीटा था.

इस हत्याकांड में बजरंग दल के बालुमाथ प्रखंड के मुखिया अरुण साव का भी नाम आ रहा है

अरुण और उसके साथियों का मानना था कि ये कुरैसी है और इधर मवेशी खरीदने आया है. इस मामले में अरुण गिरफ्तार भी हुआ था, लेकिन बाद में छूट गया.

18 मार्च की घटना के बाद से अरुण फरार हैं. रांची में रहने वाले अनिल सुमन, ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम से जुड़े हुए हैं. वो 21 मार्च को घटनास्थल का दौरा करके आए. उन्होंने भी पुलिस की कहानी को खारिज किया.

अनिल कहते हैं, “देखिए पुलिस असली गुनहगारों को बचाने की कोशिश कर रही है. इस पूरे इलाके का माहौल पिछले कई सालों से उत्तराखंड के एक बाबा गोपाल मणिजी महाराज खराब कर रहे हैं. ये सब प्रीप्लान्ड है, हत्या है. गौ रक्षा क्रांति मंच और आरएसएस के लोगों ने मिलकर इस घटना को अंजाम दिया है.”

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एक बात साफ है कि पुलिस इस दोहरे हत्याकांड की जो कहानी कह रही है उसमें कई झोल हैं. इसकी कई कड़ियां उलझी हुई हैं. इसमें गोरक्षा दल और हिंसक हिंदुत्व का भी हाथ है. यह घटना एक और अखलाक की कहानी की तरफ इशारा कर रही है. बल्कि उससे भी ज्यादा क्रूर कहानी, जिसमें हत्यारों ने पीट-पीटकर मारने के बाद लाश को पेड़ से लटका दिया.

First published: 23 March 2016, 8:21 IST
 
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