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झारखंड विधानसभा चुनाव: BJP के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है पत्थलगड़ी आंदोलन

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 December 2019, 9:51 IST

Jharkhand Assembly Elections: झारखंड में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं. इस दौरान चुनाव प्रचार में सारी पार्टियों ने अपनी ताकत झोंक दी है. झारखंड में खूंटी विधानसभा के लिए लड़ाई दिलचस्प है. जहां एक तरफ भाजपा(BJP) के वरिष्ठ नेता करिया मुंडा(Karia Munda) के एक पुत्र भाजपा प्रत्याशी नीलकंठ सिंह मुंडा के लिए काम कर रहे हैं, वहीं उनके दूसरे पुत्र झामुमो(JMM) के प्रत्याशी सुशील पाहन के लिए प्रचार कर रहे हैं. इससे लड़ाई दिलचस्प हो गई है.

नीलकंठ सिंह मुंडा बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं. वह अभी रघुवर दास सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री हैं. नीलकंठ मुंडा लगातार चौथी जीत के लिए चुनावी मैदान में हैं, लेकिन इस बार उनकी जीत आसान नहीं दिख रही. यहां दूसरे चरण यानि सात दिसंबर को मतदान हैं. यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और झामुमो के बीच माना जा रहा है.

दरअसल, खूंटी विधानसभा पत्थलगड़ी आंदोलन की शुरुआत वाले क्षेत्र है. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी झाविमो ने यहां से पत्रकार और आदिवासी चेहरा दयामनी बारला को चुनावी मैदान में उतारा है. इससे यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है. हालांकि यहां के लोग प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर वोट देने की बात कह रहे हैं.

एक चाय की दुकान के व्यापारी ने कहा कि लोग प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर मतदान करेंगे. उन्होंने कहा, "इस क्षेत्र में रघुवर सरकार में कोई खास काम नहीं हुआ है. ना तो यहां कोई रोजगार का साधन है और ना ही कोई उद्योग-धंधा, लेकिन लोगों को पीएम मोदी पर विश्वास है." पीएम मोदी खूंटी में एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर चुके हैं.

पत्थलगड़ी आंदोलन का खासा असर

इस क्षेत्र में पत्थलगड़ी आंदोलन का काफी असर दिख रहा है. यह आंदोलन साल 2017-18 में शुरू हुआ था. आंदोलन के तहत बड़े-बड़े पत्थर गांव के बाहर शिलापट्ट की तरह लगा दिए गए थे. आदिवासियों ने पत्थरों पर संविधान की पांचवीं अनुसूची में उनके लिए प्रदान किए गए अधिकारों को लिखकर जगह-जगह उन्हें लगा दिया था.

बड़ी बात यह है कि आंदोलन काफी हिंसक हुआ था. पुलिस और आदिवासियों के बीच इस दौरान जमकर संघर्ष हुआ था. अब भले ही आंदोलन शांत पड़ गया है, लेकिन लोग उस समय के पुलिसिया अत्याचार को भूले नहीं हैं. पुलिस के मुताबिक, "आंदोलन से जुड़े कुल 19 मामले दर्ज किए गए थे, इसमें 172 लोगों को आरोपी बनाया गया था."

वहीं यहां के आदिवासी पत्थलगड़ी के दौरान दमनकारी व्यवस्था से आज भी सरकार से खफा हैं. लोग सवाल करते हैं कि आखिर क्यों भाजपा को वोट दिया जाए?  लोग कहते हैं विकास को आप खुद देख लीजिए, गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था तक नहीं है. खूंटी विधानसभा भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है.

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First published: 5 December 2019, 9:14 IST
 
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