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झारखंड: गोरक्षा के नाम पर हुई हत्या मामले में पहली बार अदालत ने सुनाया फैसला, 11 दोषी करार

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 March 2018, 11:23 IST

झारखंड के रामगढ़ जिले में चर्चित अलीमुद्दीन अंसारी हत्याकांड के लगभग 9 महीने बाद एक फास्ट ट्रैक कोर्ट 12 अभियुक्तों में से 11 लोगों को दोषी ठहराया है. इस हत्याकांड में भाजपा के एक जिला नेता और स्थानीय "गौ रक्षा समिति" के कम से कम तीन सदस्य शामिल थे. इन सभी आरोपियों को 21 मार्च को सजा सुनाई जाएगी.

अभियोजन अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में यह पहला मामला है जब कोर्ट ने गौ-रक्षकों को हत्या का दोषी माना है. इस मामले में शुक्रवार को रामगढ़ की फास्ट ट्रैक अदालत ने सभी 11 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 427/149, 435/149, 302/149 के तहत दोषी करार दिया है.

 

अलीमुद्दीन उर्फ असगर अंसारी नाम के मांस कारोबारी को रामगढ़ में 29 जून 2017 को गो-मांस ले जाने के संदेह में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार दिया गया था. पुलिस के बीच-बचाव के बाद असगर को अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया.

बाद में अलीमुद्दीन की पत्नी ने गौ रक्षा समिति और बजरंग दल के सदस्यों पर अलीमुद्दीन की हत्या का आरोप लगाते हुए रामगढ़ थाना में मामला दर्ज कराया था. कोर्ट ने मुख्य अभियुक्त दीपक मिश्रा, छोटू वर्मा और संतोष सिंह को अलीमुद्दीन का वाहन रोककर मजमा जमा कर उसकी हत्या का षड्यंत्र रचने और गाड़ी में आग लगाने के आरोप में धारा 120 बी / 302 के तहत दोषी पाया.

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ‘इस मामले में अलीमुद्दीन का भाई जलील अंसारी गवाह था. कोर्ट में गवाही के दौरान अपना पहचान पत्र लाना भूल गया था, जिसे लाने के लिए उसने अपनी पत्नी जुलेखा और अलीमुद्दीन के बेटे शहज़ाद को भेजा. पुलिस रिपोर्ट के अनुसार जब वे रास्ते में थे तब उनको रोकने की कोशिश हुई थी.

First published: 17 March 2018, 11:23 IST
 
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