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राज्यसभा चुनाव: झारखंड में तीन विपक्षी विधायकों की गिरफ्तारी का वारंट

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोड़-तोड़ का खेल चलता रहा. इस बीच मतदान से पहले कांग्रेस के दो और जेएमएम के एक विधायक का अरेस्ट वारंट जारी हुआ है.

अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) विधायक चमरा लिंडा को देर रात पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची. इस बीच आज सुबह नौ बजे से राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान चल रहा है.

दो कांग्रेस विधायकों का अरेस्ट वारंट

जेएमएम के विधायक चमरा लिंडा के अलावा कांग्रेस के दो विधायकों निर्मला देवी और देवेंद्र सिंह के खिलाफ भी वोटिंग से ठीक पहले गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया.

गुरुवार रात को बीमार होने के बाद रांची के ऑर्किड अस्पताल में भर्ती जेएमएम विधायक चमरा लिंडा के पास शुक्रवार रात 2013 के एक मामले में वारंट लेकर पुलिस गिरफ्तारी के लिए पहुंची. इसकी सूचना मिलते ही कांग्रेस और जेएमएम के नेता भी अस्पताल पहुंच गये.

अस्पताल के बाहर नोक-झोंक

अस्पताल के बाहर पुलिस के साथ जेएमएम और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की पुलिस से नोक-झोंक हुई. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर अजय कुमार ने पुलिस अधिकारियों से वारंट की कॉपी दिखाने की मांग की. 

पुलिस अधिकारी पहले तो तैयार नहीं हुए, पर कार्यकर्ताओं के दबाव के बाद पुलिस ने वारंट की कॉपी दे दी. देर रात तक भारी संख्या में पुलिस ऑर्किड अस्पताल के बाहर जुटी रही.  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत के साथ कांग्रेसी नेता पार्टी विधायकों पर जानबूझ कर वारंट निकालने की शिकायत लेकर चुनाव आयोग भी पहुंचे. हालांकि पुलिस चमरा की गिरफ्तारी से इनकार करती रही. 

'वोटिंग से रोकना मकसद'

चमरा  लिंडा का सीटी स्कैन और दूसरी जरूरी जांच पुलिस की देख-रेख में हुई. उन्हें  बीपी और शुगर की शिकायत थी. डॉक्टरों का कहना है कि चमरा लिंडा की स्थिति ऐसी नहीं है कि उन्हें अस्पताल से बाहर भेजा जाए.

इस बीच कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी वारंट जारी करने का मकसद विधायकों को राज्यसभा चुनाव में मतदान से रोकना है. कांग्रेस का कहना है कि वो अदालत से राहत की कोशिश कर रही है, लेकिन वारंट के वक्त को देखते हुए तुरंत कोई आदेश मिलने की संभावना कम है.

हार-जीत का गणित

झारखंड विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं. अगर सभी विधायकों ने वोट डाले, तो एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम-से-कम 28 विधायकों का समर्थन जरूरी है़. बीजेपी के एक उम्मीदवार की जीत की संभावना प्रबल है़.

बीजेपी के पास 21 वोट बच रहे है़ं. अपने दूसरे प्रत्याशी के लिए कम-से-कम उसे सात विधायकों के वोट की व्यवस्था करनी है. जेएमएम के पास फिलहाल 30 विधायकों का समर्थन है़. ये सभी विधायक अगर मजबूती से एक साथ रहे, तो जेएमएम के प्रत्याशी की जीत की संभावना है. 

बीजेपी के पास 49 विधायक

अगर तीन विधायक गैर हाजिर रहे, तो जीत के लिए 26 विधायक की जरूरत होगी. वहीं विपक्षी खेमे से तीन विधायक वोट नहीं डाल पाए, तो जेएमएम की परेशानी बढ़ेगी. वहीं बीजेपी को अगर एनोस एक्का का साथ मिला, तो आंकड़ा 50 होगा.

शिवपूजन मेहता का साथ मिलने पर ये 51 तक पहुंच जाएगा. ऐसे में बीजेपी दूसरी प्राथमिकता के वोट के सहारे दोनों प्रत्याशी को निकालने की कवायद में जुटेगी.

First published: 11 June 2016, 11:45 IST
 
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