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#JLF2016: 'वाल्मीकि ऑथर थे, जबकि गणेश राइटर थे'

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 January 2016, 15:55 IST
QUICK PILL
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राजस्थान में 21 से 25 जनवरी तक चलने वाले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) 2016 के चौथे दिन यानी रविवार की मुख्य गतिविधियां.

राजस्थान की राजधानी जयपुर में साल 2006 में शुरू हुए इस अंतरराष्ट्रीय साहित्य समारोह में दुनिया भर से साहित्यकार और लेखकों का जमावड़ा होता है. इनके अलावा भी फिल्म, कला और सांस्कृतिक जगत की तमाम हस्तियां इस आयोजन में शिरकत करती हैं.

'काश, 'बीड़ी जलाइले...' मैंने लिखा होता'


'अ पोएटिक जिनियॉलजी' सेशन में पटकथा लेखक और गीतकार जावेद अख़्तर से लेखिका रक्षंदा जलील ने गुफ्तगू की. इस सेशन में जावेद को सुनने के लिए इतनी भीड़ लग गयी कि वहां खड़े रह पाना भी मुश्किल हो रहा था.

सत्र में फिल्मों के आइटम सॉन्ग की बात करते हुए जावेद ने कहा, गुलजार साहब ने 'बीड़ी जलाइले...' लिखा है. यह खूबसूरत गाना मुझे हमेशा प्रेरित करता है कि यह गाना मैंने क्यूं नहीं लिखा.

मेरे बच्चे फरहान और जोया भी लेखन से जुड़े हुए हैं, ये देखकर दिल को सुकून मिलता हैः जावेद अख्तर

अपने पिता जां निसार अख़्तर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा परिवार शब्दों और साहित्य से जुड़ा हुआ है. आज मेरे बच्चे फरहान और जोया भी लेखन से जुड़े हुए हैं. यह देखकर दिल को सुकून जरूर मिलता है.

जावेद ने सत्र में उर्दू और हिंदी की बहस पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि हमारी भाषा सिर्फ हिन्दुस्तानी होगी, लेकिन आज लोगों को यह भी पता नहीं चलता है कि मैं उर्दू बोल रहा हूं या हिन्दी.  भाषा को लेकर अभी बहुत बदलाव आ रहा है. यह विकास है या ह्रास, कुछ समझ नहीं आ रहा.

पेड़, नदी, पहाड़ के बहाने आंखें गीली कर गए गुलजार


'नज्म उलझी हुई है सीने में' सत्र में निर्देशक और गीतकार गुलजार ने पूर्व राजनयिक और लेखक पवन कुमार वर्मा से बात की. गुलजार जब रविवार को जेएलएफ के मंच पर आए तो श्रोताओं के दिल के मर्म को भीतर तक छू गए, कभी आंखें गीली कर दी तो कभी जोर से हंसाया भी. उन्होंने मंच से ऐसी कविताएं पढ़ीं, जो उन्हीं के शब्दों में कहें तो 'तजुर्बे आपके हैं, कोशिश मैं कर रहा हूं बयान करने की. पहाड़ की कविता के बहाने उन्होंने यह भी कह दिया कि 'कहने को तो कह देते हो, लेकिन अपने बड़ों की इज्जत नहीं करते तुम, इसीलिए तुम लोगों के कद इतने छोटे रह जाते हैं.'

सेशन के दौरान गुलजार ने यह भी कहा कि मैं लिखता बहुत अच्छा नहीं हूं, लेकिन पढ़ता बहुत अच्छा हूं. उन्होंने गुलजार ने मंच से एक कविता खास तौर पर बच्चों के लिए भी पढ़ी. हालांकि उन्होंने कहा कि इसमें बड़े बच्चों को भी बहुत मजा आएगा. सेशन खत्म होने के बाद श्रोता खड़े होकर देर तक तालियां बजाते रहे.

'मैं तुम्हें कभी भी फिल्म से बाहर कर सकता हूं'


'जाने कहां गए वो दिन: न्यू बुक्स ऑन ओल्ड बॉलीवुड' सेशन में लेखक जय अर्जुन सिंह और रऊफ अहमद ने अनुजा चौहान से बात की.

जय अर्जुन सिंह ने हाल ही में निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी के ऊपर 'द वल्र्ड ऑफ ऋषिकेश मुखर्जी: द फिल्ममेकर एवरीवन लव्स' नाम से किताब लिखी है. जय अर्जुन ने श्रोताओं से बताया कि जब ऋषिकेश मुखर्जी 'आनंद' फिल्म की कास्टिंग कर रहे थे, गुलजार ने तब तक सुपरस्टार बन चुके राजेश खन्ना को ऋषिकेश के पास भेजा. ऋषिकेश ने राजेश खन्ना को लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वह उन्हें 'अफोर्ड' नहीं कर सकते. लेकिन राजेश हर हाल में उनके साथ काम करना चाहते थे तो ऋषिकेश ने उनके सामने शर्त रख दी कि हीरोइन राजेश खन्ना की पसंद की नहीं होगी, वह वक्त पर आएंगे और वक्त पर जाएंगे और सबसे बड़ी बात कि वे कभी भी उन्हें फिल्म से बाहर निकाल सकते हैं. राजेश खन्ना ने उनकी सभी शर्तें मानी और फिल्म 'आनंद' की.

ऋषिकेश मुखर्जी ने शर्मिला टैगोर से कहा, 'डोंट माइंड योर मेकअप, मेकअप योर माइंड.'

राइटर जय अर्जुन सिंह ने बताया कि मुखर्जी बहुत ही कड़क डायरेक्टर थे. शर्मिला टैगोर एक बार जब अपने मेकअप पर बहुत ध्यान दे रही थीं तो उन्होंने शर्मिला से कहा, 'डोंट माइंड योर मेकअप, मेकअप योर माइंड.'

इस सत्र में रऊफ अहमद की किताब 'शम्मी कपूर: द गेम चेंजर' पर भी चर्चा हुई. अहमद ने कहा कि अपनी पहली हिट फिल्म 'तुमसा नहीं देखा' से पहले लगभग 19 फ्लॉप फिल्में दे चुके शम्मी कपूर पहले ऐसे हीरो थे, जिन्होंने हीरो का लुक और उसका प्रोफाइल पूरी तरह से बदल कर रख दिया.

उतार-चढ़ाव देखे, पर कमजोर नहीं पड़ीं अमृता


'हमारी अमृता' सेशन में अमृत कौर लोहिया और हरीश त्रिवेदी ने निरूपमा दत्त ने चर्चा की. कवियत्री और उपन्यासकार अमृता प्रीतम से जुड़ी बातों को उजागर करते हुए निरूपमा दत्त ने कहा कि अमृता दिखने में जितनी खूबसूरत थीं, उतने ही उसके शब्द खूबसूरत थे. नज्म, शायरी और कविताओं के जरिए अमृता ने जिंदगी के लम्हों को दिखाया है, जो समाज के लिए आईने की तरह है.

निरूपमा ने बताया कि अमृता ने अपने जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन कभी कमजोर नहीं पड़ीं. दरअसल, अमृता का मन एक पंछी की तरह था, जो उड़ना चाहता था खुले आसमान में. एकदम स्वच्छंद, लेकिन एक तीखा दर्द लिए. इस दौरान हरीश त्रिवेदी ने अमृता का जिक्र करते हुए प्यार और मोहब्बत पर रचनाओं के माध्यम से कवियत्री की सोच बयां की.

'पाकिस्तानी इतिहास के काले अध्याय'


पाकिस्तानी लेखिका रीमा अब्बासी की किताब 'टेम्पल्स इन पाकिस्तान' पर चर्चा का यह सत्र था. चर्चा के दौरान रीमा ने कहा कि जिया उल हक और जुल्फिकार अली भुट्टो के दौर के पाकिस्तानी इतिहास के काले अध्याय हैं.

पाकिस्तान में हिंदुओं और मंदिरों पर होने वाले हमले पर वे बोलीं कि पाकिस्तान में धर्म विशेष पर नहीं बल्कि सेक्ट आधारित भेदभाव है और लोग अनवरत शिकार बनाए जा रहे हैं. ऐसी ही एक घटना जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के हैदराबाद में करीब आठ महीने पहले एक भूमाफिया के लोगों ने स्थानीय हनुमान मंदिर पर हथौड़ा चलाया. इसके विरोध में सिंध की सभी पार्टियां सड़क पर उतरीं और तीन दिन तक बंद रहा. फिर हमलावर पकड़े गए.

पाकिस्तान के मंदिरों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि 10 हजार साल पुराने मंदिरों को पाकिस्तान बनने के बाद के इन 69 सालों में भी बचाकर रखा गया है. उन्होंने स्लाइड के माध्यम से ब्लूचिस्तान के हिंगलाज मंदिर, पेशावर के गोरखनाम मंदिर, सिंध प्रांत में ठट्टा के माता सिंह भवानी मंदिर की तस्वीरें दिखाईं.

सत्र के दौरान जब पत्रकार सुधीर चौधरी के बोलने की बारी आई तो उन्होंने 1947 से 1998 के बीच पाकिस्तान की जनगणना के आंकड़े सामने रखे. उन्होंने कहा कि कुछ मंदिर तो बच गए लेकिन हिंदू आबादी जो 1947 में 15 प्रतिशत थी वो 1998 में 1.6 प्रतिशत रह गई. उसके बाद से पाकिस्तान में जनगणना नहीं हुई है. चौधरी के सवाल पर अब्बासी ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जनगणना भले ही नहीं हो रही है, लेकिन नए बालक पैदा हो रहे हैं. इन १८ साल में दो नई पीढ़ी तैयार हो गई है.

'सोशल मीडिया ने बना दिया सभी को लेखक'


'द पोयट एंड प्राइवेसी: कवि और निजता' सेशन में कवि और लेखक उदय प्रकाश, इतिहासकार और अनुवादक रविकांत से बात की लेखिका अनु सिंह चौधरी ने.

सत्रके दौरान रविकांत ने कहा कि आज सोशल मीडिया और प्रिंटिंग ने हर किसी को राइटर बना दिया है. पहले किसी की किताब छपना बड़ी बात होती थी, किताब के पीछे उसका बड़ा लेखक परिचय होता था, लेकिन आज इन बातों के कोई मायने नहीं रहे हैं.

वहीं उदय प्रकाश ने कहा कि हमें सबसे पहले राइटर और ऑथर के भेद को समझना पड़ेगा. वाल्मीकि ऑथर थे, जबकि गणेश राइटर थे. उन्होंने कहा कि हमें किसी के कुछ लिखने पर उसे नहीं रोकना पड़े, उन्होंने एमएम कलबुर्गी के उदाहरण से समझाया कि यदि उसने कुछ लिखा है तो हमें उसे ऐसी सजा नहीं देनी चाहिए, लेखक जो लिखता है, उसके बाद वहां से बाहर निकल जाता है. बढ़ते प्रिंटिंग प्रेस के चलते आज हर कोई लेखक बन जाता है. अब दलाल भी लेखक बन गए हैं. निजता के सवाल पर उदय ने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर कुछ लिखने से उसकी निजता नहीं भंग होती, क्योंकि मेरे मानना है कि लेखक लिखने से पहले सभी विषयों को आत्मसात कर लेता है. हर बात को गंभीरता से सोचकर कलम चलाता है.

'पढ़ाने की पद्धति में कमी'


'एन्शिएंट इंडिया नॉलेज सिस्टम्स' सत्र में बिबेक देबरॉय, सितांशु यशचंद्र, आरती प्रसाद से सुधा गोपालकृष्णन ने चर्चा की. अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय ने सत्र के दौरान कहा कि हमारी पुरातन ज्ञान पद्धति ने दुनिया को सिखाया है. चाहे वह समाज, विज्ञान या मेडिसन के क्षेत्र में हुए विकास की बात हो या योग और आयुर्वेद की. उन्होंने इंडियन नॉलेज सिस्टम से दुनिया को बहुत कुछ सीखने को मिला है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि हमारे वर्तमान टीचिंग मैथड में बेहद कमी है. किंडर गार्टन से ही जिम्मेदारी तय नहीं है तो इस खजाने का खत्म हो जाना तय है.

भारत ने दुनिया को आयुर्वेद दिया है. दुनिया अब इंडिया के नक्शेकदम पर योग कर रही हैः आरती प्रसाद

देबरॉय ने कहा कि कि मंत्रों का उच्चारण शायद हर कोई जानता है, लेकिन 'वक्रतुंड महाकाय...' अनुष्टुप छंद होता है, यह किसी को नहीं पता. उन्होंने कहा कि लोगों में एक मिथक यह भी है कि संस्कृत ने समाज को विभाजित किया, जबकि असल में संस्कृत ने ही समाज को जोड़ने का काम किया. इसलिए मैं चाहता हूं कि लोग पुरातन पद्धति के बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़ें और अपने ज्ञान को बढ़ाएं.

सत्र के दौरान आरती प्रसाद ने कहा कि भारत ने दुनिया को आयुर्वेद दिया है. दुनिया अब इंडिया के नक्शेकदम पर योग कर रही है. इसलिए हमारी इस पुरात पद्धति को बचाए रखना जरूरी है.

सीखने के लिए यूनिवर्सिटी जाने की जरूरत नहीं


'विलियम शेक्सपीयर एंड ईयर ऑफ द लीयर' सेशन में लेखक जेम्स शैपीरो ने मॉर्गरेटा डे ग्रेजिया ने बातचीत की.

मशहूर अंग्रेज नाटककार विलियम शेक्सपीयर की जीवनी लिखने वाले शैपिरो ने सत्र के दौरान उनसे जुड़ी कई पहलुओं की चर्चा की. उन्होंने कहा कि शेक्सपीयर लिखने के इतने दीवाने थे कि अन्य कामों को प्रायोरिटी नहीं देते थे. शेक्सपीयर कभी किसी यूनिवर्सिटी में नहीं गए, फिर भी उनकी लेखनी की ताकत से पूरी दुनिया परिचित है.

युद्ध और सेना में महिलाओं को शोषण


'द बॉडी ऑफ एविडेंस : सेक्सुअल वॉयलेंस एंड द सर्च फॉर जस्टिस इन साउथ एशिया' सत्र में मेघना गुहाथकुर्त, सुमथ शिवमोहन, एसार बुटोल, लक्ष्मी मूर्ति और उर्वशी बुटालिया ने चर्चा की.

सेशन में मेघना और एसार ने कहा कि हमारी सिविल सोसायटी वैसे तो महिलाओं के सम्मान की बात करती है, लेकिन फिर भी पुरुष प्रधानता हावी है. यहां जब भी महिला विरोध करती है तो उसकी हिम्मत को तोड़ने के लिए उसका शारीरिक और मानसिक शोषण ही होता है. एक्टिविस्ट मेघना ने कहा कि आर्मी और युद्ध जहां भी मौजूद होते हैं, वहां सबसे ज्यादा महिलाओं के शोषण की खबर मिलती है. युद्ध के दौरान सबसे ज्यादा महिलाओं का शोषण होता है. सत्र में उन्होंने बांग्लादेश, श्रीलंका और कश्मीर में आर्मी की ओर से  महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की.

मुगल और ब्रिटिश रूल के बाद मंदिरों की बनावट में आया बदलाव

'क्यूपिड्स बो एंड कामाज एेरो: विजुअलाइजिंग डिजाइर इन द एंसियंट वल्र्ड' सेशन के दौरान करोलिन वाउट ने अपनी बुक 'सेक्स ऑन शो' पर चर्चा की. वाउट ने प्राचीन ग्रीस में रोमन देवी देवताओं अनेक चित्र ऐसे हैं, जिनमें उनके तन को दिखाया गया है.

वहीं भारत में पौराणिक मान्यताओं पर बने कई मंदिर भी ऐसे ही हैं, जहां भगवान के मंदिरों पर देवी देवताओं को बिना कपड़ों के देखा जा सकता है. असल में ग्रीस में जब ईसाइयत आने के बाद से इससे परेशानी होने लगी तो भारत में मुगल और ब्रिटिश के अपने नियम थोपने से धार्मिक अवधारणाओं के साथ ही मंदिरों की बनावट पर भी फर्क पड़ा. शायद इन्हीं वजहों से अब देवी-देवताओं के लिबास भी नए तरीकों से सामने आने लगे हैं. 

वाउट ने कहा कि न्यूडिटि और नेकेड शब्दों पर आमतौर पर एक ही नजरिया रखा जाता है, लेकिन इसे अलग-अलग नजरिए से देखने की जरूरत है. सत्र के दौरान प्राचीन रोम और भारत के अनेक धार्मिक स्थलों के साथ ही देवी-देवताओं के परिधानों और यौन इच्छाओं पर खुलकर चर्चा हुई.

First published: 25 January 2016, 15:55 IST
 
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