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जेएनयू विवाद: एबीवीपी के तीन पदाधिकारियों ने कन्हैया के समर्थन में छोड़ा संगठन

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 February 2016, 23:13 IST

जेएनयू में चल रहे विवाद में आज उस समय बड़ा उलटफेर आ गया, जब भाजपा समर्थित छात्र संगठन जेएनयू शाखा के ज्वाइंट सेक्रेटरी प्रदीप नरवाल, सामाजिक विज्ञान स्कूल के एबीवीपी शाखा के अध्यक्ष राहुल यादव और सचिव अंकित हंस ने संगठन से इस्तीफा दे दिया.

इस मामले में एक चिट्ठी जारी करते हुए एबीवीपी के पूर्व पदाधिकारियों ने कहा है कि हम अभी से संगठन के सारे कार्यों से तत्काल प्रभाव से दूरी बना रहे है.

हम संगठन की कार्यप्रणाली से कुछ बिंदुओं पर अपनी असहमति जताते हैं. जेएनयू में जो हालात चल रहे हैं वो वाकई दुःखद है और संगठन के मनुस्मृति और रोहित वेमुला के मामले में विचारधारा से हम अपनी असहमति जताते हैं.    

जेएनयू कैंपस में 9 फरवरी को देश विरोधी नारे लगे वो पूरी तरह से दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है. इस घटना के लिए जो भी जिम्मेदार हैं उन्हें कानून के मुताबिक कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए. लेकिन एनडीए सरकार ने जिस गैरजिम्मेदार तरीके से पूरे मामले पर कार्रवाई की है, वह बहुत ही निराशाजनक रही.

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कोर्ट परिसर में पुलिस के सामने वकीलों द्वारा छात्रों, शिक्षकों और पत्रकारों पर हमला किया गया. आज कोर्ट परिसर में पेशी के दौरान जेएनयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर भी वकीलों ने हमला किया.

वह पूरी तरह से अराजकता की स्थिति की ओर इशारा कर रही हैं. हमें ऐसा लगता है कि कुछ लोगों के द्वारा हिंसा के बल पर लेफ्ट की विचारधारा को एंटी नेशनल घोषित किया जा रहा है.       

हम ऐसे सरकार की विचारधारा को कैसे समर्थन कर सकते हैं जिसके विधायक ओपी शर्मा ने कोर्ट परिसर के अंदर हिंसा का सहारा लेते हुए पूरी विचारधारा को ही शर्मसार कर दिया है.

पटियाला हाउस गेट के सामने ही रोज देश का झंड़ा लेकर कुछ अराजकतावादी लोग राष्ट्रवाद की दुहाई देते हुए हिंसा कर रहे हैं और पुलिस पत्थर की मूर्ति बनी रही.

हम इस तरह की सारी घटनाओं की निंदा करते हुए एबीवीपी से त्यागपत्र दे रहे हैं. अब से जेएनयू कैंपस में एबीवीपी के किसी भी कार्य से हमारा कोई संबंध नहीं होगा.   

आज हमें एक साथ खड़े होकर जेएनयू के खिलाफ चल रही साजिश से लड़ने की आवश्यकता है. जेएनयू की बौद्धिक पहचान को बचाने की जरूरत है. जब इस युनिवर्सिटी के 80 फीसदी छात्र किसी भी राजनीतिक पार्टी से संबंध नहीं रखते हैं तो अब हमें जेएनयू के संस्कृति को बचाने के लिए साथ मिलकर, एकजुट होकर खड़े होने का समय आ गया है.

First published: 17 February 2016, 23:13 IST
 
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