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JNU में जल्द पढ़ाया जाएगा 'इस्लामिक टेररिज्म', एक बार फिर हो सकता है विवाद

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 May 2018, 11:00 IST

देश की सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाली दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू युनिवर्सिटी के अकादमिक परिषद ने एक नए पाठ्यक्रम को मंजूरी दी है. जेएनयू की अकादमिक परिषद की हालिया बैठक में 'इस्लामिक आतंकवाद' विषय पर पढ़ाई शुरू करने का फैसला किया गया है. लेकिन इसके साथ ही इसका विरोध शुरू हो चुका है.

जेएनयू की 145वीं अकादमिक परिषद की शुक्रवार को बैठक हुई थी. इस बैठक में तय किया गया था कि यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन पर एक विशेष केंद्र शुरू किया जाए. इसी के तहत ‘इस्लामिक आतंकवाद’ विषय पर पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया गया. बैठक में परिषद के 110 में से लगभग 100 सदस्य मौज़ूद थे. इन सदस्यों में से कई ने ‘इस्लामिक आतंकवाद’ पर पढ़ाई शुरू करने के प्रस्ताव का विरोध किया.

 

विरोध करने वाले सदस्यों की आपत्ति आतंकवाद के साथ ‘इस्लामिक’ शब्द जोड़ने से है. बैठक में मौज़ूद रहे एक प्रोफेसर ने कहा, "यह इस्लाम से भयभीत करने की कोशिश जैसा कदम है. इसका विरोध होना ही चाहिए. इसकी जगह अगर पाठ्यक्रम ‘धार्मिक आतंकवाद’ पर होता तो कहीं ज़्यादा बेहतर रहता."

प्रोफेसर ने कहा कि दुनिया भर में ‘अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद’ पर पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं. लेकिन पहली बार किसी प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में आतंकवाद को सीधे धर्म से जोड़ा जा रहा है.

युनिवर्सिटी के इस कदम का जेएनयूएसयू ने भी विरोध किया है. जेएनयू स्टूडेंट् यूनियन की वाइस प्रेजिडेंट सिमोन जोया खान ने कहा कि जेएनयू के वाइस चांसलर ने ऐसे कोर्स को पढ़ाए जाने की इजाजत दी है, यह हैरानी की बात है. उन्होंने कहा कि अकादमिक कोर्सों के नाम पर इस्लाम के खिलाफ यह प्रचार गंभीर है.

 

जेएनयू यूनियन का कहना है कि इस कोर्सों का मकसद आरएसएस-बीजेपी का चुनावी प्रचार लगता है, जबकि यूनिवर्सिटी को आतंकवाद के नेचर की पढ़ाई करवानी चाहिए. यूनिवर्सिटी प्रशासन प्राइवेटाइजेशन और भगवा राजनीति को बढ़ावा दे रहा है.

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बता दें कि परिषद की बैठक में ‘इस्लामिक आतंकवाद’ के अलावा और भी कई पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला किया गया है. इनमें अलगाववाद, जनसांख्यिकीय (जनसंख्या से संबंधी) बदलाव, भारत की समुद्रतटीय सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, सुरक्षा संस्थान, शांतिस्थापित करने के लिए चलाए जाने वाले अभियान, सीमा प्रबंधन आदि प्रमुख हैं.

First published: 19 May 2018, 11:00 IST
 
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