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JNU मेस में महंगी दाल रोटी पर बवाल, छात्र करेंगे प्रदर्शन

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 March 2018, 10:00 IST

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में उपस्तिथि को लेकर हुआ बवाल अभी थमा नहीं था की दूसरा एक विवाद खड़ा हो गया. JNU मेस में खाने के दामों में लगभग दोगुनी वृद्धि की गयी है. प्रशासन के इस फैसले से स्टूडेंट्स नाराज हैं. विश्वविद्यालय में मेस संबंधी कई चार्ज बढ़ाने का नोटिफिकेशन जारी हुआ है. इस वजह से वहां के छात्र नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं. नोटिफिकेशन के अनुसार कई चार्ज में 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है.

27 फरवरी को जारी हुए इस नोटिफिकेशन में मेस सिक्योरिटी(रिफंडेबल)/मेस एडवांस राशि को 2700 से बढ़ाकर को 4500 रुपये कर दिया गया है. वहीं प्रति सेमेस्टर लगने वाले इस्टेब्लिशमेंट चार्ज को 550 से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया गया है. साथ ही बरतन आदि के इस्तेमाल करने पर लगने वाले सालाना चार्ज को 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये किया गया है. वहीं न्यूजपेपर के लिए अब स्टूडेंट्स को 15 रुपये की जगह 50 रुपये देने होंगे.

 

सबसे ज्यादा 1900 प्रतिशत की बढ़ोतरी मेस बिल को जमा करने पर देरी होने पर लगने वाले चार्ज पर की गई है. अब 1 रुपये की जगह इसके लिए 20 रुपये प्रति दिन की दर से भुगतान करना होगा. वहीं इसके अलावा मेस से जुड़े गेस्ट चार्ज और ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर से जुड़े कई अन्य चार्जों को भी बढ़ाया गया है.

छात्र कर सकते हैं विरोध प्रदर्शन

इस बदलाव के खिलाफ स्टूडेंट मंगलवार दोपहर में डीन ऑफ स्टूडेंट्स के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन कर सकते हैं. जेएनयू में सभी छात्र दल इस बढ़ोतरी को गलत बता रहे हैं और प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं. राइंट विंग छात्र संगठन एबीवीपी और लेफ्ट संगठन दोनों मंगलवार दोपहर में इस नोटिफिकेशन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे.

 

एबीवीपी से जुड़े एक छात्र का कहना है की ये फैसला छात्रों के आर्थिक बोझ को बढ़ाएगा. देश के अलग अलग कोने से छात्र यहाँ पढ़ने आते यहीं और ऐसे में ये उनकी जेब पर अधिक भर डालेगा. प्रशासन का ये फैसला किसिस भी तरह से छात्रों के हित में नहीं है.

आपको बता दें कि इससे पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों के लिए 75 फीसदी उपस्थिति आवश्यक करने के फैसले पर भी विवाद हुआ. उस विवाद का अभी तक कोई निपटारा नहीं हो सका है. विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले से फिर से छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव हो सकता है.

First published: 6 March 2018, 10:00 IST
 
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