Home » इंडिया » JNU back on the boil: students plan fresh protests against punishments
 

जेएनयू विवाद: फिर से आंदोलन की राह पर जवाहरलाल यूनीवर्सिटी

सुहास मुंशी | Updated on: 27 April 2016, 23:21 IST
QUICK PILL
  • जेएनयू छात्रसंघ प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार ने यूनीवर्सिटी के उस आदेश की प्रति जलाकर साफ कर दिया है कि छात्र एक बार फिर से यूनीवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार हैं.
  • यूनीवर्सिटी की कमेटी ने कन्हैया कुमार समेत अन्य छात्रों को 9 फरवरी की घटना का दोषी मानते हुए जुर्माना लगाने के साथ उन्हें सेमेस्टर से निलंबित करने का फैसला लिया है.

27 अप्रैल से जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में नए सिरे से छात्रों का आंदोलन शुरू हो सकता है. अगले दो महीने तक रहने वाली छुट्टियों के दौरान धरना, रैली और भूख हड़ताल जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत हो सकती है. फरवरी और मार्च के महीने में पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ जेएनयू में इस तरह का विरोध प्रदर्शन पहले भी हो चुका है.

हालांकि इस बार छात्रों का विरोध प्रदर्शन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ होगा. जेएनूय प्रशासन ने हाल ही में 9 फरवरी के कार्यक्रम के मामले में दोषी पाए जाने के बाद कई छात्रों पर जुर्माना लगाया है और कुछ को कैंपस से निलंबित कर दिया गया है.

मंगलवार को जेनयूएसयू प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार के नेतृत्व में छात्रों ने यूनीवर्सिटी के आदेश की प्रति जला दी. जेएनयू प्रशासन ने कन्हैया कुमार पर भी 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है. 

मंगलवार को जेनयूएसयू प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार के नेतृत्व में छात्रों ने यूनीवर्सिटी के आदेश की प्रति जला दी

कुछ लोगों ने जेएनयू प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि जब छात्र प्रति सेमेस्टर के लिए 250 रुपये प्रति महीने की फीस का भुगतान करते हैं तो उन पर 10,000 से 20,000 रुपये का जुर्माना लगाए जाने का क्या मतलब है. 

वहीं कुछ ने जेएनूय प्रशासन की तरफ से मामले की जांच के लिए बनाई गई उच्चाधिकार समिति की रिपोर्ट की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए हैं जिसने करीब डेढ़ महीने पहले ही अपनी रिपोर्ट सौंपी है.

गंभीर सवाल

छात्रों ने बुधवार की शाम को धरना बुलाया है. इसके बाद यूनीवर्सिटी के आदेश वापस लेने तक भूख हड़ताल किया जाएगा. प्रस्तावित आंदोलन को  जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन का भी समर्थन मिला है. 

छात्रों ने यूनीवर्सिटी के प्रशासनिक भवन के बाहर जमा होकर वाइस चांसलर के जांच का आदेश दिए जाने के अधिकार को भी चुनौती दी. उन्होंने कहा कि जब मामला पहले से ही अदालत में लंबित है तो इस जांच रिपोर्ट का कोई मतलब ही नहीं बनता है.

मीडिया से बातचीत में कन्हैया ने कहा, 'क्या यह मामला अदालत में लंबित नहीं है? यही रिपोर्ट आपत्तिजनक नारा लगाए जाने के मामले में बाहरी लोगों की भूमिका को स्वीकार करती है लेकिन उमर और अनिर्वाण को कठोर सजा सुना दी गई. यह रिपोर्ट विरोधाभासी बातें कहती हैं.'

वहीं उमर खालिद ने कहा कि 9 फरवरी की घटना के बाद यूनीवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों के खिलाफ जांच कमेटी का गठन किया था. लेकिन प्रशासन ने अनिर्वाण की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया जबकि उन्हें हर दिन धमकी मिल रही थी.

उमर के खिलाफ मीडिया ने लगातार कैंपेन चलाया था जिसमें उनके आतंकी संगठनों के साथ होने तक का आरोप लगाया गया था.

खालिद ने कहा, 'अनिर्वाण और मुझे लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थी. हम दोनों यूनीवर्सिटी के वीसी के पास गए. इस दौरान हमारे शिक्षक भी साथ थे. हमने उनसे 10 मार्च को सुरक्षा की मांग की लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया. यूनीवर्सिटी प्रशासन के व्यवहार को बताया तक नहीं जा सकता.'

16 अप्रैल को कन्हैया और उमर के खिलाफ धमकी भरी चिट्ठी सामने आई. दिल्ली पुलिस ने जेएनयू प्रशासन से कैंपस के भीतर दोनों छात्रों की सुरक्षा बढ़ाने को भी कहा था.

गर्मी की छुट्टी में जारी रहेगा विरोध

प्रशासन का आदेश सेमेस्टर के अंत होने के ठीक पहले आया है और इस दौरान छात्रों की इच्छाशक्ति का कड़ा इम्तिहान होगा.

जेएनयूएसयू की वाइस प्रेसिडेंट शहला रशीद ने कहा कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

रशीद ने कहा, '2014 की गर्मियों में हमने डेरा डालो मुहिम की शुरुआत की थी जो ठेका मजदूरों और हॉस्टल की सुविधा से वंचित छात्रों के लिए था. 2012 में सर्दियों की छुट्टियों के दौरान हमने 16 दिसंबर की गैंग रेप पीड़ित के पक्ष में प्रदर्शन किया था. वहीं 2008 की गर्मियों में एम्स के छात्रों ने आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन किया तो हमने आरक्षण के पक्ष में. हमारे लिए यह नया नहीं है. वास्तव में हमें इसकी उम्मीद थी.'

कैसे होगी पढ़ाई?

सजा और लगातार विरोध प्रदर्शन से छात्रों के अकादमिक पर असर पड़ेगा. पिछले तीन महीनों से भी यही सब चल रहा है और छात्रों को इसका नुक सान भी हुआ है.

शहला ने कहा कि उन्हें 29 अप्रैल से पहले चार असाइनमेंट जमा करना है और उन्हें नहीं पता कि यह सब कैसे हो पाएगा.

अनिर्वाण को 25 जुलाई तक थीसिस सौंपनी थी लेकिन अब उन्हें यूनीवर्सिटी से पांच साल तक दूर रहने के लिए कहा गया है. उनका साक्षात्कार भी होना है लेकिन उन्हें नहीं पता कि वह इसे कर भी पाएंगे या नहीं.

उमर के एक सेमेस्टर के लिए निलंबित होने का मतलब है कि वह जुलाई के बदले दिसंबर 2017 में अपनी थीसिस जमा करा पाएंगे.

हालांकि अभी यह कहना मुश्किल है कि इन छात्रों को फरवरी और मार्च जैसा ही समर्थन मिल पाएगा. वहीं दूसरी तरफ इस बात को लेकर भी आशंका बनी हुई है कि क्या पूरा मामला एफटीटीआई की तरह ही हो जाएगा, जहां दोनों ही पक्ष झुकने को तैयार नहीं थे. परिणाम चाहे जो भी हो, दोनों ही पक्ष लंबे संघर्ष के लिए तैयार हो चुके हैं.

First published: 27 April 2016, 23:21 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

He hasn't been to journalism school, as evident by his refusal to end articles with 'ENDS' or 'EOM'. Principal correspondent at Catch, Suhas studied engineering and wrote code for a living before moving to writing mystery-shrouded-pall-of-gloom crime stories. On being accepted as an intern at Livemint in 2010, he etched PRESS onto his scooter. Some more bylines followed in Hindustan Times, Times of India and Mail Today.

पिछली कहानी
अगली कहानी