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जेएनयू छात्रसंघ के नए अध्यक्ष मोहित के पांडे के बारे में जानिए

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 September 2016, 15:46 IST
(फेसबुक)

9 फरवरी को कथित देश विरोधी नारेबाजी की घटना के बाद दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव पर सबकी नजर थी. छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार से तो तकरीबन पूरा देश वाकिफ हो चुका है. वहीं इस बार छात्रसंघ अध्यक्ष बने मोहित कुमार पांडे के बारे में कम लोगों को जानकारी है.

छात्रसंघ के नए अध्यक्ष मोहित के पांडे लेफ्ट यूनिटी यानी आइसा और एसएफआई के संयुक्त उम्मीदवार थे. उनका क्या अतीत रहा है और कैसे वो देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष बनने में कामयाब रहे. उनकी प्रोफाइल पर एक नजर साथ ही दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे उम्मीदवारों के बारे में भी आपको बताते हैं:    

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मोहित के पांडे- निर्वाचित अध्यक्ष, जेएनयू छात्रसंघ

सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज (स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज) के पीएचडी छात्र मोहित के पांडे अध्यक्ष पद के लिए आइसा और एसएफआई के संयुक्त उम्मीदवार थे. 

उत्तर प्रदेश के तराई इलाके लखीमपुर खीरी के रहने वाले मोहित ने बीए की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से की है. इसके अलावा पीजी की पढ़ाई के लिए वो भोपाल में रहे.

छात्र राजनीति से पहले वह सीपीआई एमएल से भी जुड़े रह चुके हैं. लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान मोहित आइसा कार्यकर्ताओं के संपर्क में आए. इसके बाद धीरे-धीरे वो छात्र राजनीति में सक्रिय होेते गए.

चुनाव में उनका मुख्य मुद्दा सामाजिक न्याय के साथ ही डायरेक्ट पीएचडी पाठ्यक्रम में आरक्षण को लागू कराना रहा. इसके अलावा यौन उत्पीड़न के मुद्दों पर भी वो जेंडर सेंसिटाइजेशन कमिटी को मजबूत करना चाहते हैं.

लेफ्ट यूनिटी के उम्मीदवार मोहित के पांडे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से आते हैं. (फेसबुक)
मोहित के पांडे (बाएं से सबसे आगे) जेएनयू कैंपस में छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के साथ. (फेसबुक)

सोनपिंपले राहुल पूनाराम- बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन

दूसरे नंबर पर रहे बाप्सा (बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन) के उम्मीदवार सोनपिंपले राहुल पूनाराम सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम में एम फिल के छात्र हैं. महाराष्ट्र के नागपुर के झुग्गी से आने वाले सोनाराम की मां एक कंस्ट्रक्शन वर्कर हैं.

बेहद गरीब परिवार से आने वाले पूनाराम ने रिक्शा चालक पिता की मौत के बाद सातवीं तक की पढ़ाई के लिए होटल में बर्तन तक धुले हैं. नागपुर से ही उन्होंने समाज शास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की है.

पढ़ाई के दौरान वो अंबेडकर आंदोलन से जुड़ गए. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से एमए की पढ़ाई करते हुए वे जेएनयू के 'यूनाइटेड दलित स्टूडेंट्स' के संपर्क में आए.

उनका मुख्य एजेंडा मौखिक परीक्षा के अंक घटाने के साथ ही दलित, आदिवासियों, महिलाओं, पूर्वोत्तर और कश्मीर के लोगों के बीच एकता बनाना है.

जान्हवी ओझा- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद

एबीवीपी की तरफ से अध्यक्ष पद की उम्मीदवार रहीं जान्हवी ओझा बिहार के छपरा से ताल्लुक रखती है. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की है.

जान्हवी स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के पैरासिटॉलोजी (परजीवी विज्ञान) विभाग में पीएचडी छात्रा हैं. गैर राजनीतिक घराने से आने वाली जान्हवी 2012 में जेएनयू में एडमिशन लेने के बाद से राजनीति में सक्रिय हैं.

ओझा का कहना है कि जेएनयू में 9 फरवरी की घटना से पहले उनका चुनाव लड़ने की तरफ कोई रुझान नहीं था. लेकिन इसके बाद उन्होंने छात्रसंघ चुनाव में उतरने का फैसला लिया.

उनका मुख्य एजेंडा जीएस कैश को मजबूत करने के साथ ही जेएनयू कैंपस को कंप्लीट वाई-फाई जोन में तब्दील करना रहा. 

First published: 10 September 2016, 15:46 IST
 
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