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जेएनयू विवाद: कन्हैया समेत छात्रों को मिली सजा पर हाईकोर्ट की रोक

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 May 2016, 18:39 IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने जेएनयू में कथित देशविरोधी कार्यक्रम के लिए जुर्माने और सजा के विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले पर रोक लगा दी है. कोर्ट में छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के अलावा उमर खालिद और अनिर्बान ने याचिका दाखिल की थी.

अदालत ने छात्रों के निष्कासन और जुर्माने पर सशर्त रोक लगाई है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि आपको मिले दंड पर रोक लगाई जा रही है, लेकिन शर्त ये है कि भविष्य में कैंपस में आप कोई हड़ताल या धरना प्रदर्शन नहीं करेंगे.   

JNU Strike 4

हड़ताल-प्रदर्शन न करने की शर्त


हाईकोर्ट ने कहा कि अगर आप हड़ताल खत्म कर रहे हैं और आगे भी कोई धरना नहीं देंगे तो कोर्ट यूनीवर्सिटी के उस आदेश पर तब तक रोक लगा रहा है, जब तक कि कुलपति छात्रों की अपील का निपटारा नहीं कर लेते. 

पढ़ें: जेएनयू विवाद: सजा-जुर्माने के खिलाफ छात्रसंघ ने दी आंदोलन की चेतावनी

हाईकोर्ट ने कहा कि जो भी शिकायत या अपील होगी, कुलपति उसका निपटारा करेंगे. अगर अपील के बाद हुए फैसले से छात्र खुश नहीं होते हैं, तो दो हफ्ते में दोबारा कोर्ट आ सकते हैं.


हाई कोर्ट ने शर्तों के साथ सभी छात्रों से ये भी कहा कि आपको कोर्ट से राहत की उम्मीद तभी करनी चाहिए, जब आप कोर्ट का आदर करें और न्यायपालिका में विश्वास रखें.

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छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की ओर से हाई कोर्ट में पेश वकील ने कहा था कि छात्र भूख हड़ताल खत्म करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इससे पहले उन्हें जेएनयू प्रशासन की तरफ से पक्का भरोसा मिलना चाहिए कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी.

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ वो तभी विचार करेगा,  जब 28 अप्रैल से भूख हड़ताल कर रहे बाकी छात्र इसे खत्म करें, यही बेहतर फैसला होगा.  

उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट पर सजा


उच्च स्तरीय कमेटी की सिफारिश पर छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी. हालांकि कन्हैया ने फैसले को हास्यास्पद करार दिया था. 28 अप्रैल से सजा के खिलाफ कन्हैया समेत 19 छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू की थी.

तबीयत बिगड़ने पर कन्हैया ने भूख हड़ताल वापस ले ली थी. तीन दिन पहले उमर खालिद और अनिर्बान ने भी हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें यूनीवर्सिटी से हुए निष्कासन को रद्द करने की मांग की गई थी.

उमर को एक सेमेस्टर और अनिर्बान को जुलाई तक के लिए निष्कासित करने की सजा हुई थी. दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. उमर और अनिर्बान ने भी कुछ दिन पहले हड़ताल खत्म कर दी थी.

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First published: 13 May 2016, 18:39 IST
 
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