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सबसे पहले ज़रूरी है जेएनयू कैंपस का अस्तित्व: एबीवीपी नेता

विकास कुमार | Updated on: 18 February 2016, 14:31 IST
QUICK PILL
बुधवार की शाम खबर आई कि जेएनयू में अखिल विधयार्थी परिषद से जुड़े तीन \r\nछात्र नेताओं ने संगठन से इस्तीफा दे दिया है. इनके द्वारा लिखा गया एक \r\nखुला पत्र फेसबुक पर प्रकाशित हुआ है. इस्तीफा देने वालों में जेएनयू में एबीवीपी के \r\nज्वाईंट सेक्रेटरी प्रदीप नरवाल, राहुल यादव और सेक्रेटरी अंकित शामिल हैं.जेएनयू के पेरियार हॉस्टल में \r\nरहने वाले प्रदीप और उनके साथियों ने एबीवीपी से यह कहते हुए इस्तीफा दिया \r\nहै कि वर्तमान समय की जरूरत है जेएनयू जैसे संस्थान को बचाना. मौजूदा सरकार\r\n की नीयत इस संस्थान को खत्म करने की है. इसी तरह के तमाम मुद्दों पर कैच \r\nने प्रदीप से बातचीत की. प्रस्तुत है बातचीत का कुछ अंश:

आपने एबीवीपी से इस्तीफा क्यों दिया है?

(हंसते हुए) क्या करते! चार-पांच लड़कों की वजह से पूरे कैंपस को बदनाम किया जा रहा है. होना ये चाहिए था कि जिन्होंने गलती की उनपर कार्रवाई होती और मामले की इतिश्री होती. लेकिन नहीं रोज कोई न कोई संगठन जेएनयू गेट पर तिरंगा लेकर आ जाता है और हमें राष्ट्रभक्ति सिखाने लगता है.

क्या आपको वाकई लगता है कि नौ तारीख को जो घटना हुई उससे ठीक से हैंडल नहीं किया गया?

बिल्कुल... यह तो साफ दिख रहा है. जेएनयू से पहले भी कई लड़के, कई मामलों की वजह से गिरफ्तार हुए हैं और बाद में रिहा भी हुए हैं लेकिन इस तरह का हिंसक और अराजक माहौल कभी नहीं बना.

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आज तो पूरे कैंपस को ही मीडिया राष्ट्रदोही करार देने पर तुली हुई है. चार हजार लड़के-लड़कियां रहते हैं इस कैंपस में. मैं दावे से कह सकता हूं कि इनमें से अस्सी प्रतिशत का किसी राजनीति से कोई लेनादेना नहीं है. लेकिन आज ये सारे के सारे इस दुष्प्रचार में घसीटे जा रहे हैं.

आपके मुताबिक पूरे कैंपस को कौन और क्यों बदनाम कर रहा है?

क्यों का तो नहीं मालुम लेकिन ज़ी न्यूज, इंडिया न्यूज़ जैसे कुछ टीवी चैनल हैं जो पूरे कैंपस के पीछे पड़े हैं. पूरे-पूरे दिन कैंपस का मीडिया ट्रायल हो रहा है. इतनी नकारात्मक और झूठी खबरें कैंपस के बारे में फैलाई जा रही हैं कि मत पूछिए.

तो क्या आपने मीडिया ट्रायल से आजिज आकर इस्तीफा दिया है?

मीडिया ट्रायल एक वजह है लेकिन मैंने और दो और साथियों ने केवल इसलिए इस्तीफा दिया है कि देश और मीडिया जान ले कि इस कैंपस में राजनीति और पार्टी लाईन जैसी चीज बाद में आती है. सबसे पहले ज़रूरी है कैंपस का अस्तित्व. इस कैंपस का होना बहुत ज़रूरी है.

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हम जेएनयू को बचाना चाह रहे हैं. हम चाह रहे हैं कि नौ तारीख वाली घटना की जांच हो और जो दोषी हों उन्हें सजा मिले, इसे बहाना बनाकर कैंपस की छवि खराब न की जाए. हम किसी को ऐसा करने का हक नहीं दे सकते. इस कैंपस में आने के लिए हर लड़के ने बड़ा कड़ा इम्तिहान दिया है. इसकी साख बचाना हमारा सबसे पहला धर्म है.

आप अपनी पार्टी एबीवीपी से भी नाराज हैं क्योंकि पार्टी ने ही सबसे पहले कैंपस में राष्ट्रद्रोहियों के होने की बात कही है?

पार्टी से नाराज होने और न होने का सवाल नहीं है. लेकिन इस कैंपस के किसी भी एक लड़के को कोई राष्ट्रप्रेम नहीं सिखा सकता. अगर उस दिन कोई घटना हुई तो जेएनयू प्रशासन, पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी उसकी जांच करे और जो दोषी हों उन्हें सजा दी जाए. इस तरह से बाजार में फैसला नहीं होना चाहिए.

किस तरह से?

आप देख नहीं रहे हैं, क्या हो रहा है. पिछले कई दिनों से मेन गेट के सामने पुलिस खड़ी है. बैरिकेड लगे हैं. आने-जाने पर सौ रोक हैं. दो दिन से हाईकोर्ट में मार-पीट की जा रही है. कल तो हमारे कुछ शिक्षक और शिक्षिकाओं को भी मारा-पीटा गया. उन्हें राष्ट्रद्रोही बताया गया. कार्रवाई इस तरह से होना जायज है क्या?

सरकार और पुलिस के नाक के नीचे जेएनयू के प्रॉफेसर्स पिटे हैं. कन्हैया को कोर्ट में मारा गया. ये कैसी कार्रवाई है. मुझे समझ नहीं आ रहा?

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जो ऐसा कर रहे हैं उनमे एक बीजेपी के विधायक भी हैं और उनका कहना है कि ये सारे लोग राष्ट्रद्रोही हैं और इनके साथ ऐसा ही किया जाना चाहिए.

आप ओपी शर्मा जी की बात कर रहे हैं. वो कल से तीन बार बयान बदल चुके हैं. विधायक हैं और सड़क पर मारपीट कर रहे हैं. उन्हें यह शोभा नहीं देता कि वो सबको राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रद्रोह समझाएं. हमें पता है कि राष्ट्रभक्ति के नामपर कुछ लोग उपद्रव कर रहे हैं.

क्या इस कदम के बाद आपकी पार्टी की तरफ से दबाव बनाया जा रहा है?

नहीं.

आपने अपना फोन नंबर शाम से ही बंद कर रखा है

(हंसते हुए) हां वो सुरक्षा के नजरिए से अभी बंद रखा है.

क्यों आपको किसी ने कुछ कहा है या कहीं से कोई धमकी मिली है?

नहीं... नहीं. ऐसा कुछ नहीं है. कहीं से कोई धमकी नहीं मिली है. बस कुछ लोगों ने सलाह दी है.

First published: 18 February 2016, 14:31 IST
 
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