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जेएनयू की लड़ाई दक्षिणपंथ बनाम अन्य विचारों की हो गई है?

पाणिनि आनंद | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST
QUICK PILL
  • जेएनयू के मामले ने उस समय ज्यादा तूल पकड़ लिया जब सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने \r\nछात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना करते हुए इसकी\r\n तुलना \'इमरजेंसी के दिनों\' से कर दी.
  • इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने \r\nमोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि निर्दोष छात्रों के साथ इस तरह के हिंसक\r\n बर्ताव का खामियाजा मोदी सरकार को भुगतना ही पड़ेगा.

जेएनयू छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, सीताराम येचुरी, सुधाकर रेड्डी, डी राजा और अन्य नेताओं ने शनिवार को एक साथ इकट्ठे होकर छात्रों के इस विरोध प्रदर्शन को दक्षिणपंथी विचारधारा के खिलाफ एक बड़ी वैचारिक लड़ाई में बदलने का प्रयास किया.

इस मामले में इन नेताओं का मानना है कि सरकार की तरफ से पुलिस और दक्षिणपंथी कुछ युवा जेएनयू में, छात्रों के एक छोटे से समूह को 'एंटी नेशनल' घोषित करने पर लगे हुए है.

कैंपस में राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, 'आपके इर्द-गिर्द असामाजिक तत्वों का घेरा बना हुआ है.' लेकिन उनके कहने का यह मतलब कतई नहीं था की दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के सुरक्षाकर्मी कैंपस में ऐसा करने के लिए हैं.

क्या यह एक नया बदलाव है?

जेएनयू में शनिवार को लेफ्ट और कांग्रेस के सामूहिक विरोध प्रदर्शन से ऐसा माना जा रहा है कि कहीं न कहीं राष्ट्रीय स्तर पर दक्षिणपंथी विचारों और संगठनों के खिलाफ एक नया गठजोड़ तैयार हो रहा है. 

जेएनयू कैंपस के इस मामले को शुरूआती दौर में तो राजनैतिक तबके के साथ-साथ युनिवर्सिटी के अंदर भी वैचारिक रूप से समान विचारधारा के संगठनों ने भी उतनी गंभीरता से नहीं लिया था.

लेकिन इस मामले ने शुक्रवार को उस समय ज्यादा तूल पकड़ लिया जब सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना करते हुए इसकी तुलना 'इमरजेंसी के दिनों' से कर दी.

इसके बाद इस मामले में जल्द ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार को घेरते हुए  कहा कि 'निर्दोष छात्रों के साथ इस तरह के हिंसक बर्ताव का खामियाजा मोदी सरकार को भुगतना ही पड़ेगा.'

इसके अगले दिन ये बात भी सामने आने लगी की एबीवीपी के छात्रो ने युनिवर्सिटी के मामले में राजनीतिक दलों के नेताओं के प्रवेश पर ही प्रतिबंध की मांग की है.

इससे बाद जब कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी जेएनयू कैंपस मेें पहुंचे तो एबीवीपी के छात्रों ने उन्हें काले झंडे दिखा कर विरोध जताया और इसके इसके बाद देर रात में कांग्रेस के नेता और राज्यसभा ने उपनेता विपक्ष आनंद शर्मा पर एबीवीपी के कुछ संदिग्ध लोगों के द्वारा कथित तौर पर कैंपस में हमला करने का मामला भी सामने आया. 

राहुल गांधी ने कैंपस में अपने आक्रामक भाषण के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार की कड़ी आलोचना की और युनिवर्सिटी के इस मसले को हैदराबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या से भी जोड़ कर प्रस्तुत किया.

राहुल के मुताबिक सरकार युवाओं से डरी हुई है लिहाजा उन्हें 'एंटी नेशनल' करार देकर जेल में डाल रही है

राहुल ने कहा, 'मैं कुछ दिनों पहले हैदराबाद में था, इनकी विचारधारा के लोग और इनके नेता उस समय भी रोहित वेमुला को 'राष्ट्र विरोधी' बता रहे थे. जबकि सबसे ज्यादा 'एंटी नेशनल' तो ये लोग ही हैं, जो आपकी-हमारी आवाज को दबा रहे हैं'.

इसके साथ ही राहुल ने ये भी कहा कि 'जब युवा अपनी बात कहते हैं तो सरकार कहती है की ये तो 'एंटी नेशनल' हैं. दरअसल सरकार और उसके ये लोग डर गये हैं कि देश की कमजोर लोग भी अब अपनी आवाज को उठा रहे हैं. लेकिन ये इस बात को समझ नहीं पा रहे हैं कि ये सरकार इन आवाजों को जितना दबाएंगी, ये उतनी ही ताकतवर हो कर उभरेंगी'.

जेएनयू कैंपस में छात्रों से मिलने के बाद सीताराम येचुरी की अध्यक्षता में केसी त्यागी और डी राजा के साथ कुछ अन्य नेता दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से इस मामले में जांच की मांग की, जिसे केजरीवाल ने मान लिया है. और इस घटना के मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिये हैं.

कैंपस में माहौल अब भी तनावपूर्ण

इस बीच दिल्ली पुलिस ने शनिवार को सात छात्रों की पहचान की है. इन संदिग्ध छात्रों के मामले में पुलिस का कहना है कि 'इन छात्रों को कैंपस के मामले में नहीं बल्कि इनकी पहचान तो दिल्ली स्थित आरएसएस के केशव कुंज कार्यालय पर धरने के मामले में की गई है.'

वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जेएनयू के छात्र और शिक्षक दिल्ली पुलिस के इस बयान को शक की निगाह से देख रहे हैं. इनका छात्रों और शिक्षकों का तो ये तक मानना है कि पुलिस इसी बहाने जेएनयू को छात्रों के बीच भय पैदा करने की कोशिश कर रही है.

इस मामले में जेएनयू के एक शिक्षक का कहना है कि 'हमारे छात्रों के खिलाफ मोदी सरकार का यह कदम प्रतिशोध का मामला जान पड़ता है. आरएसएस कार्यालय पर धरने के बाद से ही पुलिस कैंपस के छात्रों के पीछे पड़ी है. ये पुलिस द्वारा पूरी तरह से सुनियोजित साजिश के तहत हो रहा है.' 

दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीएम मोदी ने शनिवार को मुंबई में कहा 'कहीं भी कला के लिए कोई बंदिश नहीं हो सकती है.

इस मामले में पुलिस छात्रों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षकों को भी अपना निशाना बना रही है. प्रेस क्लब में अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर आयोजित हुए कार्यक्रम के मामले में दिल्ली पुलिस ने दिल्ली युनिवर्सिटी के प्रो. अली जावेद को पूछताछ के लिए बुलाया.

इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने शनिवार को दिल्ली में आयोजित उर्दू कार्यक्रम जश्न-ए-रेख्ता के लिए संगवारी म्यूजिकल ग्रुप के सदस्यों को थाने में बुलाकर बिठाए रखा औऱ बाद में उन्हें कार्यक्रम की इजाजत नहीं दी क्योंकि दिल्ली पुलिस के मुताबिक यह ग्रुप 'एंटी नेशनल ग्रुप' को सपोर्ट करता है.

वहीं दूसरी तरफ दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीएम मोदी ने शनिवार को ही मुंबई में बॉबे आर्ट सोसाइटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, 'कहीं भी कला के लिए कोई बंदिश नहीं हो सकती है.'

जेएनयू के इस मामले में कुछ छात्रों ने केंद्र की मोदी सरकार को धन्यवाद करते हुए कहा है कि कम से कम आज फिर से जेएनयू कैपस में हर कोई, हर जगह राजनीति पर बात तो कर रहा है.

First published: 15 February 2016, 8:23 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बीबीसी हिन्दी, आउटलुक, राज्य सभा टीवी, सहारा समय इत्यादि संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हैं.

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