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वेमुला की याद में निकली यह रैली सरकार को डरा रही होगी

अभिषेक पराशर | Updated on: 24 February 2016, 8:20 IST
QUICK PILL
  • ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) के नेतृत्व में देश भर के विश्वविद्यालयों से आए हजारों छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ रैली कर रोहित वेमुला की \'हत्या\' के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
  • रोहित वेमुला हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में पीएचडी कर रहे थे. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की शिकायत पर वेमुला समेत पांच छात्रों को कैंपस से बाहर कर दिया गया था जिसके बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली थी.

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पीएचडी के छात्र रोहित वेमुला को न्याय दिलाने के लिए हजारों की सख्या में छात्रों ने झंडेवालान के आंबेडकर भवन से जंतर-मंतर तक मार्च किया. जेएनयू के छात्रों द्वारा गठित ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) की तरफ से बुलाए गए इस मार्च में देश भर के विश्वविद्यालयों से छात्र भारी संख्या में दिल्ली पहुंचे.

रोहित वेमुला हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में पीएचडी के छात्र थे. अगस्त महीने में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की शिकायत पर वेमुला समेत पांच छात्रों को निष्काषित कर दिया गया था. 18 जनवरी को वेमुला ने आत्महत्या कर ली थी. वेमुला की खुदकुशी के मामले में बीजेपी सरकार के केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय के खिलाफ मामला भी दर्ज हो चुका है. 

रैली को देश भर के छात्र संगठनों के अलावा दलितों के अधिकार के लिए काम करने वाले सामाजिक संगठनों और सामाजिक हस्तियों का समर्थन मिला. 

मोदी सरकार के कार्यकाल में जातीय भेदभाव और दलितों के उत्पीड़न में तेजी आई है: दलित उत्पीड़न विरोधी समिति

हाल ही में गठित दलित उत्पीड़न विरोधी समन्वय समिति ने कहा, 'हिंदूवादी फासीवादी ताकतों के सहयोग से बनी मोदी सरकार के दलित और मुस्लिम विरोधी चरित्र को बेनकाब करना है. हमारी मांग बंडारू दत्तात्रेय, शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी और हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वीसी अप्पा राव को बर्खास्त किए जाने की है.'

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जंतर-मंतर पर बैठे छात्रों का हुजूम 

दलित उत्पीड़न विरोधी समन्वय समिति ने कहा, 'रोहित वेमुला की हत्या के लिए जिम्मेदार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता सुशील कुमार एवं अन्य के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए.' समिति ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में जातीय भेदभाव और दलितों के उत्पीड़न में तेजी आई है. 

समर्थन में उतरे राजनीतिक दल

रैली को न केवल छात्र संगठनों का बल्कि राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिला. कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों के साथ अपनी एकजुटता जताई. गांधी ने रोहित वेमुला के परिवार वालों से मुलाकात कर उनका भरोसा बढ़ाया.

रोहित वेमुला ने भारत के भविष्य की बात की जबकि संघ केवल पिछले दिनों की बात करता है:राहुल गांधी

संघ और बीजेपी के दलित विरोधी रुख की बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'रोहित वेमुला ने भारत के भविष्य की बात की जबकि संघ केवल पिछले दिनों की बात करता है. संघ को वेमुला के भविष्य की बातें पसंद नहीं थी.' वेमुला के मामले में राहुल गांधी बेहद सक्रिय रहे हैं. वह इससे पहले हैदराबाद विश्वविद्यालय भी जा चुके हैं. 

कल का गुजरात आज का भारत

गुजरात से आए छात्र प्रवीण कंसरिया ने कहा, 'हम नरेंद्र मोदी सरकार के दलित विरोधी एजेंडे के सबसे बड़े और पहले भुक्तभोगी रहे हैं. जो कल गुजरात में हुआ था वह आज पूरे देश में हो रहा है. मोदी बस कहने को ओबीसी नेता हैं. वह इसकी आड़ में संघ के हिंदूवादी एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे.'

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राजस्थान से आए छात्र परवेज खान ने कहा, 'किसी छात्र संगठन से सीधे नहीं जुड़ा होने के बावजूद मैं रोहित वेमुला के इंसाफ की मांग को अपना समर्थन देने आया हूं. मैं कह सकता हूं कि रोहित वेमुला के लिए स्थितियां इस कदर प्रतिकूल कर दी गई कि उन्हें आत्महत्या करनी पड़ी. वह देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में मौजूद जातिवादी मानसिकता के शिकार हुए.'

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ज्यादातर छात्रों का मानना था कि मोदी सरकार के आने के बाद से युनिवर्सिटी परिसरों के हालात बद से बदतर हुए हैं और प्रशासनिक हस्तक्षेप में तेजी आई है. सवाल सिर्फ हस्तक्षेप का भी नहीं बल्कि संघ की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रशासनिक कामकाज को संचालित करने लगी है. वह किसी भी अन्य विचार को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं. 

राजनीतिक गोलबंदी

कांग्रेस के अलावा अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने भी छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया. जंतर-मंतर पहुंचे केजरीवाल ने कहा, 'जिस मंत्री ने रोहित को आत्महत्या के लिए उकसाया वह आज भी स्वतंत्र घूम रहा है. मै अभी मंत्री की गिरफ्तारी की मांग करता हूं.'

केजरीवाल यहीं नहीं रुके. उन्होंने मोदी सरकार को चेताते हुए कहा, 'मोदीजी छात्रों से पंगे मत लेना. अगर स्टूडेंट जमा हो गए तो कुर्सी हिला देंगे.'

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने भी छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया

विश्वविद्यालयों की स्वयत्ता में बढ़ती दखल को लेकर भी छात्रों में आक्रोश दिखा. छात्रों का कहना था कि सरकार कैंपस के भीतर मौजूद लोकतंत्र को पुलिस के दखल से कुचलने में लगी हुई है.

आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य और फिलहाल स्वराज अभियान से जुड़े योगेंद्र यादव ने कहा, 'कैंपस की सभी समस्या को कानून और व्यवस्था की समस्या की तरह नहीं निपटा जा सकता. कई मौकों पर पुलिस की जरूरत होती है लेकिन ऐसे माैके कम ही आते हैं.' 

बढ़ रहा असंतोष

जंतर-मंतर पर तैनात दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, 'मेरी तैनाती अक्सर इस इलाके में होती है और मेरी यादाश्त में यह पिछले कुछ सालों के दौरान यहां हुई सबसे बड़ी रैली है.' उन्होंने कहा,'पिछले एक साल में केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में तेजी आई है.' 

यादव ने भी इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा, 'हमने कई विरोध प्रदर्शन देखे हैं लेकिन इस बार अलग यह है कि अलग-अलग विचारधाराओं के लोग संघ परिवार की राजनीतिक और सांस्कृतिक तानाशाही के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं.' उन्होंने कहा, 'सरकार के खिलाफ छात्रों में असंतोष की भावना मजबूत हो रही है.'

भारी पड़ सकती है राजनीति

रोहित वेमुला के मामले में जहां केंद्र सरकार ने रोहित वेमुला की जाति को लेकर पूरे मामले को पटरी से उतारने की कोशिश की वहीं जेएनयू छात्रसंघ प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी के बाद पार्टी जिस तरह से आक्रामक हुई वह उसकी हताशा को दर्शाती है. 

राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मनोज झा ने कहा, 'यह सब कुछ साजिश के तहत किया गया. पहले संघ को लगा कि इस पूरे मामले से उन्हें फायदा होगा लेकिन अब उनकी यह रणनीति उन पर भारी पड़ती दिख रही है. मोदी सरकार की बढ़ती हताशा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोकसभा में प्रचंड बहुमत होने के बावजूद उन्हें अस्थिरता की आशंका सता रही है.'

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First published: 24 February 2016, 8:20 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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