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जेएनयू विवाद: उमर समेत आरोपी छात्र लौटे, समर्थन में उतरे छात्र

सुहास मुंशी | Updated on: 22 February 2016, 9:34 IST
QUICK PILL
  • करीब हफ्ते भर भूमिगत रहने के बाद अब जेएनयू में कथित भारत विरोधी नारेबाजी के आरोपी छात्र दोबारा से सामने आए हैं. रविवार को आधी रात में बड़ी संख्या में छात्रों ने जेएनयू के प्रशासनिक भवन के पास इकट्ठा होकर इन छात्रों के साथ अपना समर्थन व्यक्त किया.

रविवार को आधी रात में चले एक दिलचस्प घटनाक्रम के तहत जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में नारेबाजी का आरोपी उमर खालिद और दूसरे छात्र फिर से सामने आए. उमर के साथ जेएनयू के छात्र बड़ी संख्या में मौजूद थे.

दिल्ली पुलिस खालिद और दो अन्य छात्रों को कथित देशविरोधी नारेबाजी के मामले में तलाश कर रही है. नौ फरवरी को युनिवर्सिटी परिसर में डीएसयू नाममक छात्र संगठन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में इन छात्रों ने कथित तौर पर भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए थे.

इस मामले में जेएयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पहले से ही देशद्रोह के आरोप में न्यायिक हिरासत में हैं.

'पुलिस चाहे तो उमर को गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन उन्हें उमर की गिरफ्तारी सबके सामने करनी होगी'

रविवार को आधी रात में हजारों की संख्या में जेएनयू के छात्र प्रशासनिक भवन के पास इकट्ठा हुए. इनमें छात्रसंघ के तमाम पदाधिकारी भी शामिल थे. यहां आश्चर्यजनक रूप से उमर खालिद सबके सामने आया. उसने मौजूद छात्रों के सामने भाषण दिया. अपने भाषण में उसने हैदराबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला का जिक्र किया. 'सात सालों के दौरान पहली बार मुझे अपने मुसलमान होने का अहसास बीते दस दिनों में हुआ. मुझे मेरी धार्मिक पहचान में समेट दिया गय. यह शर्मनाक है.'

उमर खालिद का भाषण

जेएनयू छात्रसंघ की उपाध्यक्ष शेहला रशीद शोरा ने भी इस दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, 'पुलिस चाहे तो उमर को गिरफतार कर सकती है, लेकिन उन्हें उमर की गिरफ्तारी सबके सामने करनी होगी. कन्हैया की तरह चोरी-छिपे नहीं.'

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शेहला रशीद छात्रों को संबोधित करते हुए

उमर बंद पड चुके छात्र संगठन डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन का सदस्य है. नौ फरवरी को जेएनयू में आयोजित कार्यक्रम के आयोजको में वह भी शामिल था. भारत-विरोधी नारेबाजी मेें उमर का नाम सबसे ऊपर आ रहा था.

जेएनयू छात्रसंघ की उपाध्यक्ष शेहला का भाषण पार्ट-1

इस विवाद के उभरने के साथ ही मीडिया भी आपस में दोफाड़ हो गया था. कुछ टीवी चैनलों ने उमर खालिद को सीधे जैश--मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन से जोड़ दिया. जी न्यूज के एक पत्रकार विश्व दीपक ने अपने संस्थान के इस गैर जिम्मेदार रवैए को वजह बताते हुए संस्थान से इस्तीफा दे दिया.

उमर के साथ इस मामले में देशद्रोह के आरोपी अन्य छात्र भी नजर आए. इनमें अनिर्बान भट्टाचार्य और रियाज उल हक का नाम सामने आ रहा है. इसके अलावा दो अन्य आरोपी छात्र संगठन आइसा के हैं. वे भी इस दौरान सामने आए.

आधी रात को मौजूद हजारो छात्रों की भीड़ को संबोधित करते हुए छात्रसंघ उपाध्यक्ष शेहला रशीद ने कहा, 'उन्हें पता है कि इस भीड़ में तमाम दक्षिणपंथी लोग और सादी वर्दी में पुलिस वाले मौजूद हैं. लेकिन अगर वे छात्रों को गिरफ्तार करते हैं तो हमें हर हाल में शांति बनाए रखना है.'

जेएनयू छात्रसंघ उपाध्यक्ष शेहला का भाषण पार्ट-2

'हमारी ताकत हमारी एकता है, हमें बलप्रदर्शन नहीं करना है.'

शेहला ने पुलिस पर तेज हमला करते हुए कहा, 'अगर इतने खतरनाक आतंकवादी शहर के बीचो-बीच इस तरह से खुलेआम घूम रहे थे तो पुलिस क्या सो रही थी? क्यों नहीं इस शर्मनाक स्थिति के लिए पुलिस विभाग सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देता?' शेहला ने इस दौरान युनिवर्सिटी प्रशासन को भी आड़े हाथ लिया. उनके मुताबिक युनिवर्सिटी का मौजूदा प्रशासन छात्रों को आतंकित करना चाहता है.

आइसा सदस्य और पीएचडी छात्र मोहित से बातचीत

(विकास कुमार के साथ)

First published: 22 February 2016, 9:34 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

He hasn't been to journalism school, as evident by his refusal to end articles with 'ENDS' or 'EOM'. Principal correspondent at Catch, Suhas studied engineering and wrote code for a living before moving to writing mystery-shrouded-pall-of-gloom crime stories. On being accepted as an intern at Livemint in 2010, he etched PRESS onto his scooter. Some more bylines followed in Hindustan Times, Times of India and Mail Today.

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