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जॉन केरी ने छात्रों से पूछा- क्या आप दिल्ली आईआईटी में नाव से आए हैं?

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 August 2016, 12:28 IST
(एएनआई)

दिल्ली और एनसीआर में मूसलाधार बारिश से लोगों का बुरा हाल है. अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी भी इसके असर से अछूते नहीं रह सके हैं.

सोमवार को केरी का काफिला दिल्ली में बारिश के बाद अक्सर लगने वाले भीषण जाम का शिकार हो गया था. इस दौरान केरी को काफी देर तक जाम में फंसना पड़ा था.

जॉन केरी जब बुधवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में छात्रों से रूबरू हुए, तो मजाकिया लहाज में उन्होंने दिल्ली की बारिश पर सवाल कर डाला.

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने छात्रों से बातचीत करते हुए चुटकी ली, "क्या आप सभी छात्र यहां नाव पर बैठकर आए हैं?" उनके इतना कहते ही कार्यक्रम में मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे.

'भारतीय डीएनए में खासियत'

जॉन केरी ने भारत के लोगों की तारीफ करते हुए कहा, "जहां कहीं भी मैं जाता हूं, वहां भविष्य के महत्वाकांक्षी विजन पर एक मजबूत बहस होते देखता हूं. यह शायद भारतीय डीएनए में ही मौजूद है."

केरी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, "भारत आज एक स्थापित शक्ति है. राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत संबंध बनाए हैं, जिससे साझा मकसद और विजन तैयार हुआ है."

केरी ने कहा कि एक ऐसे दौर में जब बहुत से देश ताकत के जरिए अपनी बात कहना चाहते हैं, भारत और अमेरिका ने न्याय आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बरकरार रखा है.

'हिंसक चरमपंथ को जड़ से उखाड़ें'

जॉन केरी ने कहा, "हमें हिंसक चरमपंथ की जड़ पर चोट करनी होगी और हमें इसके अलग-अलग चेहरों को समझने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि यह एक देश से दूसरे देश और एक जगह से दूसरी जगह पर बदलता रहता है." 

केरी ने साथ ही कहा कि केवल एक देश आतंकवाद और चरमपंथ को मात नहीं दे सकता. इसके लिए सभी देशों और संस्थानों को आगे आने की जरूरत है.

केरी ने इस दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा के पास कुछ इलाकों को एक-दूसरे को स्थानान्तरित करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के फैसले को मानने का भी जिक्र किया. केरी ने कहा कि दक्षिण चीन सागर पर चीन को भी इसी तरीके से शांतिपूर्ण समाधान खोजना चाहिए.

'नामुमकिन को मुमकिन बनाने का इतिहास'

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा, "भारतीय सरकार ने जीएसटी बिल को पास किया है. इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर भी छूट दी है, जोकि अर्थव्यवस्था के लिहाज से बड़ा कदम है."

संबोधन के आखिर में केरी ने कहा कि भारत और अमेरिका की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि दोनों का इतिहास नामुमकिन को हकीकत बनाने का रहा है.

First published: 31 August 2016, 12:28 IST
 
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