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पांच सबसे लोकप्रिय भारतीय यौन कल्पनाएं?

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 September 2016, 7:14 IST
(एएफपी)

नो सेक्स, प्लीज, हम हिन्दुस्तानी हैं. वास्तव में ऐसा नहीं है. कामुक कहानियों के दो संग्रहों से तो ऐसा ही लगता है. इनमें से एक कहानी संग्रह है- प्लेजर प्रिंसपल: दि एमेरीलिस बुक ऑफ इरोटिक- जो इसी माह प्रकाशित हुई है और इसका सम्पादन किया है जी सम्पत ने. और इसी विषय से जुड़ा दूसरा कहानी संग्रह है- इलेक्ट्रिक फीचर्स दि ट्रानक्यूबर बुक ऑफ इरोटिक स्टोरीज- इसका सम्पादन किया है रुचिर जोशी ने.

इन किताबों को पढ़कर बिना कोई हानि उठाए कहा जा सकता है कि कामुकता के प्रदर्शन का अगर ओलम्पिक हो (अपने मकान के किसी ऐसी जगह पर जहां कभी-कभार जाना होता हो) भारतीय यह खेल बखूबी खेल सकते हैं.

भारत की कुछ ख्यातिलब्ध लेखिकाओं ने इन दोनों संग्रहों में अपना योगदान दिया है जिससे यह पता चलता है कि जब यौन वासना जगती है तब जेन्डर कहीं आड़े नहीं आता. सिर्फ सेक्स ही बार-बार होता है. ज्यादातर कहानियों में जिन महिलाओं को परिस्थितियों या माहौल के चलते सेक्स करने में बाधा पड़ती है, वे मौका मिलने पर महत्वाकांक्षा के शिखर पर उड़ान भरने लगती हैं.

दोनों ही कहानी संग्रहों में पुरुषों से अधिक महिला लेखकों की संख्या है, इनमें बुकर प्राइज नॉमिनी भी शामिल हैं. दिलचस्प तो यह है कि यह कहानियां भी काफी लोगों द्वारा पढ़ी जाने वाली हमारी लेखिकाओं ने लिखी हैं. अश्लील साहित्य की जड़ें भारत में गहरे तक धंसी हुईं हैं और इन कहानियों की अधिकांश नायिकाएं आधुनिक भारतीय महिलाएं हैं जो परम्परा और पितृ सत्ता के विरोध में जमकर दहाड़ती रहती हैं.

इन महिलाओं पर कुछ भी बोझ नहीं है, यहां तक कि उन्हें अपने कपड़ों तक की भी चिन्ता नहीं करनी पड़ती. यहां पांच ऐसी असहमितयों के बारे में बताया जा रहा है जिनसे हमारी दोनों तरह की- शहरी और ग्रामीण, परिष्कृत और अपरिष्कृत ख्वाबों, कल्पनाओं पर रोशनी पड़ती है. नए संग्रह में एक लेखिका की कहानी से उसके वास्तविक हालातों का पता चलता है.

डी अपनी स्कर्ट ऊपर खींच लेती है और उसे अपनी पैन्टी दिखाती है. इसके बाद सब शांत हो जाता है.

1- कहानी का परिवेश और स्थान तो न्यूयार्क का है लेकिन हर क्रिया बहुत ही भारतीय है. सभी शुरुआती क्रियाओं के बाद वह कुछ सेक्स का टेस्ट लेने के लिए कहती है. पांच डॉलर में सौदा तय होता है और वे दोनों नाक से गहरी सांस लेने लगते हैं. वह अपनी पैंट उतारना चाहता है. पुरुष उसकी ओर देखता है और महिला अपने दोनों हाथों और मुंह से अपना काम शुरू कर देती है.

भारतीय लेखक जीत थ्याल की कठोर रूप से कामोत्तेजित करने वाली यह कहानी बहुत ही सम्मोहक है.

2- रुचिर जोशी की भारतीय लड़की को लेकर लिखी कहानी बहुत ही कामुक और प्रभावशाली है. इस कहानी में नायक पैसे देकर अपना सौदा करने वाली लड़की के साथ अनुबंध कर लेता है. डी के पास कृत्रिम अंदाज में आने की क्षमता है और वह बहुत ही अधीर हो जाती है. समीरन के घर जब नौकरानी घर का काम कर रही होती है और डी भी कुछ और कर रही होती है तभी डी शुरू हो जाती है.

डी अपनी स्कर्ट ऊपर खींच लेती है और उसे अपनी पैन्टी दिखाती है. इसके बाद सब शांत हो जाता है. समिरन बैकफुट पर आ जाता है. इसके बाद उसे उसकी देखभाल क्यों करनी चाहिए क्योंकि डी के पास उसके हिस्से का पैसा आ गया था.

3- फिल्म समालोचक परोमिता वोहरा और कॉलमनिस्ट मिताली सरन की कहानियों में महिला वासना बाईसेक्सुअलिटी (यानी पुरुष और महिला दोनों के द्वारा यौन क्रिया करना) के रूप में बहुत अधिक मौजूद है. यहां भी महिला काफी हद तक महत्वाकांक्षी है. काफी सेक्सी अंदाज में परोमिता की नायिका पाओलोमी बहुत ही बेहयाई के साथ अपने संवादों को कहती है. वह कहती है कि आपको मेरी बेशर्मी पसन्द है? और दिखाऊं क्या? पाओलोमी उसे पसन्द करती है. वह बॉलीवुड स्टूडियो में कुछ पीआर का काम करने में मदद करती है और उसका नायक सरताज खान है, जिसकी मांसपेशियां सलमान खान और शाहरुख खान की तरह सेक्सी हैं. दोनों एक-दूसरे को धीरे-धीरे स्पर्श करने और चाटने की क्रिया करते हैं. पाओलोमी कहती है कि मुझे महसूस हो रहा है कि मैं हवा में उड़ रही हूं और मैं उसकी गर्म जीभ के स्पर्श से मदोहश होती जा रही हूं.

यह बॉलीवुड स्टाइल की शुरुआत है. जल्द ही पाओलोमी सरताज खान के साथ यौन क्रिया में तल्लीन हो जाती है. सरताज अपने दांतों से उसकी ब्रा को फाड़ देता है और फिर... इसी तरह से सरन की बाईसेक्सुअल कहानियों में मिल्ली निश की गर्दन को बार-बार चूमती है और वह बाईसेक्सुअल होने का ख्वाब देखने लगती है, ठीक उसी तरह जिस तरह से उसका पति उसे घर में सम्बंध बनाने के लिए अपने पास खींचता है, उसकी अंगुलिया चूसता है और उसे तोड़कर रख देता है. यहां भी जल्दबाजी है. मिल्ली और निश रेस्टोरेन्ट के रेस्टरूम में ठीक उसी जगह पर यौन तृप्ति करते हैं जहां उसने अपने पति के साथ जल्दबाजी में और झटपट संभोग किया था.

4- आदित्य शर्मा की कहानी चुन्नी लाल एक ऐसी कहानी है जिसमें सेक्स उल्लासित भाव में गंवारूपन लिए होता है. बेतुका नाम होने के बावजूद चुन्नी लाल का ऑर्गन बहुत बड़ा है. उसे पता ही नहीं है कि इसका कैसे इस्तेमाल किया जाता है. पुरुषों के चुटकलों में इस तरह के परिदृश्य रोजाना ही देखने को मिल जाते हैं. सुनने के प्रति ललक होने के कारण इस तरह की कहानियां काफी लम्बी हो जाती हैं क्योंकि सुनने के बीच में हंसी के फव्वारे भी छूटते रहते हैं. चुन्नीलाल अपने घर आई भतीजियों और युवा चचेरी बहनों पर कामुक नजर रखता है और उन्हें कामुक नजरों से देखने में अधिकतर सफल भी हो जाता है. हालांकि यह काम खुद में घिनौना है.

लड़कियां अपनी प्रारम्भिक ना-नुकर के बाद इसकी सहमति दे देती हैं. उन्हें केवल डर इस बात का ही है कि कहीं आंटी देख न लें. जब लड़कियों की ओर से कोई आपत्ति नहीं रहती तब वह अपना हाथ उनके कपड़ों में डाल देता है. भतीजी शारदा उसके इस तरह से दुलारने-पुचकारने पर आपत्ति नहीं करती लेकिन उसे अपना हुक खोलने की अनुमति नहीं देती. यहां भी, भारतीय परिवार खून के रिश्तों में अपनी यौन इच्छा को छिपे तौर पर अच्छी तरह पूरी करते हैं जो यौन इच्छा नकली आध्यात्मिकता के मुखौटे और नैतिकता की थोपी गई चहारदीवारी के रूप में बह रही है. दमित की गई सेक्सुअलिटी अब धार्मिक वर्जनाओं को तोड़ रही है.

5- थोड़ा आश्चर्य के साथ, भारत में यौन वासना को लेकर कुछ कहानियों में घरेलू नौकरानियों के साथ भी यौन तृप्ति का मिलना भी सन्निहत है. जयश्री मिश्रा की कहानी वैसे तो लंदन की है. घर का मालिक चाहता है कि घरेलू नौकरानी अपना सारा काम शरीर पर एक भी कपड़ा पहने बिना करे क्योंकि उसकी स्वर्गीय पत्नी भी सभी काम बिना कपड़ा पहने करती थी. रूपा बिजवा की कहानी में एक ऐसी नौकरानी की कहानी है जो ऐसे उपाय करती है ताकि घर में अकेले रह रहे मालिक को वह कामातुर और भड़कीली दिखे. और आखिर में, वह किसी भी तरह से जब वह बुखार में तप रहा होता है तब उसे शिथिल कर देती है.

First published: 20 September 2016, 7:14 IST
 
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