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मोदी सरकार का फरमान-फेक न्यूज़ देने वाले पत्रकारों की मान्यता होगी रद्द, विरोध शुरू

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 April 2018, 12:25 IST

आगामी लोकसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पत्रकारों की मान्यता के लिए दिशानिर्देशों में संशोधन किया है. इसमें कहा गया है कि यदि कोई पत्रकार फेक न्यूज़ या उसका प्रचार करते पाया जाता है, तो पत्रकार की मान्यता रद्द की जाएगी. सोमवार शाम जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह कहा गया है कि प्रेस कॉउंसिल ऑफ इंडिया, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए), प्रिंट और टेलीविजन मीडिया के लिए दो नियामक निकाय यह तय करेंगे कि खबर फेक है या नहीं.

 

हालांकि सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि दोनों ही ये संस्थाएं सरकार द्वारा संचालित या ऑपरेट नहीं की जाती हैं. 'यदि एजेंसियां (PCI या NBA) इस बात की पुष्ट‍ि कर देती हैं कि प्रकाशि‍त या प्रसारित समाचार फेक यानी फर्जी था, तो ऐसे फेक न्यूज को तैयार या प्रसारित करने के लिए जिम्मेदार पत्रकारों की मान्यता पहली गलती पर छह माह के लिए निलंबित कर दी जाएगी. दूसरी गलती पर एक साल के लिए निलंबित और तीसरी गलती पर स्थायी रूप से ऐसे पत्रकारों की मान्यता खत्म कर दी जाएगी.' अभी यह नियम  न्यूज़ पोर्टल पर लागू नहीं होंगे.

सरकार के इस फैसले का कई पत्रकार विरोध कर रहे हैं. वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता का कहना है कि , 'ऐसी गलती न करें. यह मुख्यधारा की मीडिया पर असाधारण हमला है. यह वैसा ही है जैसा राजीव गांधी का एंटी डेफमेशन बिल था. समूची मीडिया को अपने मतभेद भुलाकर इसका विरोध करना चाहिए.'

पत्रकार सुहासिनी हैदर ने ट्विटर पर लिखा कि ' सरकार के आज के आदेश के मुताबिक सजा सिर्फ उन्हें मिलेगी जो मान्यता प्राप्त हैं. उन्हें सिर्फ शिकायत के आधार पर ही दंड दे दिया जाएगा, अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा नहीं की जाएगी. मुझे नहीं लगता कि यह उचित है''.

First published: 3 April 2018, 11:50 IST
 
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