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तलाक... तलाक... तलाक... और जज साहब ने दे दिया तलाक

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 February 2016, 16:06 IST

साल 1986 में मुस्लिम पर्सनल लॉ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को राजीव सरकार द्वारा पलटने के बाद एक बार फिर शरीयत कानून और मुस्लिम महिला अधिकार के बीच टकराव की नौबत आ गई है.

अलीगढ़ के जिला कोर्ट में तैनात अतिरिक्त जिला जज मोहम्मद जहीरुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी 47 साल की पत्नी अफशां खान को इस्लामिक कानून के मुताबिक तीन बार तलाक... तलाक... तलाक... बोल कर मौखिक तलाक दे दिया है.

इसके बाद जज सिद्दीकी की पत्नी अफशां खान ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को चिठ्ठी लिख कर न्याय की गुहार लगाई है.

अफशां ने अपनी चिठ्ठी में लिखा है कि 'मेरे साथ इस तरह का अन्याय उसके द्वारा किया गया है, जिस पर पूरे समाज को न्याय देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.' 

इस चिठ्ठी में जज सिद्दीकी की पत्नी अफशां ने उन पर प्रताड़ना और उत्पीड़न का भी आरोप लगाया है.

इस मामले में जज मोहम्मद जहिरुद्दीन सिद्दीकी ने बताया है कि 'हम किसी सुलह तक नहीं पहुंच पा रहे थे, इसलिए मैंने शरीयत के हिसाब से तलाक ले लिया है.'

गौरतलब है कि पिछले साल ही ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शरीयत कानून के मुताबिक 'तीन बार तलाक' कहकर तलाक लेने की प्रथा में किसी भी तरह के बदलाव से इनकार किया था.

इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना रहीम कुरैशी ने बताया कि कुरान और हदीस के हिसाब से तो तीन बार तलाक कह कर तलाक लेने को गुनाह माना जाता है, लेकिन जब इसे बोल दिया जाता है तो उसे पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और इसमें कोई रद्दोबदल नहीं हो सकता.

इस मामले में साल 1986 में कांग्रेस की राजीव सरकार ने शाहबानो के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जो हमारे शरीयत के खिलाफ था. उसे बदल दिया था. 

अफशां खान ने बताया कि 59 साल के जज मोहम्मद जहिरुद्दीन सिदद्की के साथ उसका निकाह 16 अगस्त 2015 को अलीगढ़ के होटल पॉम ट्री में हुआ था.

अफशां ने अपनी चिठ्ठी में लिखा है कि उसकी निकाह में परिवार के सभी सदस्यों के साथ-साथ मेरे पति के पहली पत्नी से जन्मे पुत्रों ने भी शिरकत की थी.

First published: 13 February 2016, 16:06 IST
 
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