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पी चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज करने वाले जज दो दिन बाद होने वाले हैं रिटायर

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 August 2019, 14:17 IST

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की आईएनएक्स मामले में गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा दी है. अदालत ने कहा "इस मामले के तथ्यों से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि याचिकाकर्ता ही किंगपिन हैं , जो मुख्य साजिशकर्ता है." एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार यह फैसला सुनाने वाले न्यायमूर्ति सुनील गौड़ शुक्रवार को 48 घंटों के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले हैं.

उन्होंने इसे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बताया और कहा कि जमानत देने से समाज को गलत संदेश जाएगा. कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए शासन के दौरान वित्त मंत्री रहे चिदंबरम को उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्राप्त था.

INX मीडिया के विदेशी निवेश में चिदंबरम के बेटे की कंपनी शामिल थी. इस मामले में आरोप है कि जब INX मीडिया में विदेशी निवेश किया गया तब चिदंबरम विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष थे और उनपर मंजूरी देने में अनियमितता बरतने का आरोप है.

प्रवर्तन निदेशालय और CBI इस बात की जांच कर रहे हैं कि 2007 में कार्ति चिदंबरम ने बोर्ड की मंजूरी कैसे ली थी. कार्ति को पिछले साल 28 फरवरी को INX मीडिया को FIPB मंजूरी दिलाने के मामले में कथित रूप रिश्वत लेने के लिए गिरफ्तार किया गया था.


न्यायमूर्ति सुनील गौड़ ने मंगलवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भतीजे रतुल पुरी के साथ बैंक धोखाधड़ी मामले के एक अन्य हाई प्रोफाइल मामले की सुनवाई की थी, उनकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई थी. न्यायमूर्ति गौड़ ने कहा कि कारोबारी को गिरफ्तार किए जाने के कुछ घंटे बाद ही उनकी हिरासत की प्रभावी जांच की आवश्यकता है.

जस्टिस गौड़ ने 1984 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपना करियर शुरू किया और 1995 में दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा में शामिल हुए. वह 2008 से उच्च न्यायालय में हैं.

INX मीडिया केस : क्या चिदंबरम को गिरफ्तारी से बचा पाएंगे दिग्गज कांग्रेसी वकील

First published: 21 August 2019, 14:09 IST
 
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