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जजों की नियुक्ति को लेकर सरकार और न्यायपालिक में शुरू हुआ टकराव, SC में हुई तीखी बहस

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 May 2018, 23:11 IST

जजों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और केंद्र सरकार में चल रही खींचतान शुक्रवार को खुलकर सामने आ गई. केंद्र सरकार ने कम नामों की सिफारिश भेजने को लेकर कोलेजियम पर सवाल खड़े कर दिए. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की. इसके साथ ही सरकार से पूछ लिया कि  बताएं आपके पास जजों की नियुक्ति को लेकर कोलिजियम की कितनी सिफारिशें लंबित है. 

मीडिया खबरों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को मणिपुर , मेघालय और त्रिपुरा उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों के मामले को लेकर सुनवाई की गई. इस दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने न्यायपालिका के कोलेजियम को लेकर सवाल खड़े कर दिए.

अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि कोर्ट मेघालय और त्रिपुरा उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रिक्त स्थानों के मामले को लेकर सुनवाई कर रही है. लेकिन सच्चाई कुछ और है. उन्होंने कहा कि जिन हाईकोर्ट में जजों के 40 पद खाली पड़े हैं. वहां पर भी कोलेजियम की तरफ से सिर्फ तीन नामों की सिफारिश की जा रही है.

अटार्नी जनरल ने कहा कि कोलेजियम को बड़ी तस्वीर देखनी चाहिए और ज्यादा नामों की सिफारिश करनी चाहिए. जहां 40 पद खाली हैं. वहां पर भी तीन नामों की सिफारिश भेजी जा रही है. जजों के खाली पदों को लेकर सरकार के बारे में कहा जा रहा है कि सुस्त है. जब कोलेजियम सिफारिश ही नहीं भेजेगी तो नियुक्ति कैसे होगी. 

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से कहा कि हमें बतायें , कितने नाम ( कोलेजियम द्वारा की गयी सिफारिशें ) आपके पास लंबित हैं. इस पर अटार्नी जनरल ने कहा कि उनको इसके बारे में जानकारी नहीं है,जानकारी हासिल करनी होगी . इस पर पीठ ने कहा कि जब भी सरकार की बात आती है, तो आप कहते हैं कि जानकारी हासिल करेंगे.

इसके साथ ही पीठ ने अटार्नी जनरल को याद दिलाते हुए कहा कि कोलेजियम ने 19 अप्रैल को न्यायमूर्ति एम याकूब मीर को मेघालय उच्च न्यायालय और न्यायमूर्ति रामलिंगम सुधाकर को मणिपुर उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश भेजी थी. जो आत तक लंबित पड़ी हुई है. इस पर अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि इनकी नियुक्ति जल्दी ही हो जाएगी. इसके आदेश जारी कर दिए जाएंगे.

इस पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जल्दी का क्या मतलब है. जल्दी तो तीन महीने भी हो सकते हैं. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि जजों के रिक्त पद होने की वजह से मणिपुर , मेघालय और त्रिपुरा उच्च न्यायालयों में स्थिति ‘ गंभीर ’ है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मेघालय , मणिपुर और त्रिपुरा उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों के बारे में दस दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है.

आपको बता दें कि इससे पहले केंद्र सरकार ने कोलेजियम की सिफारिश के तीन महीने से भी अधिक समय बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ को पदोन्न करके शीर्ष अदालत का न्यायाधीश बनाने की सिफारिश लौटा दी थी . जिसको लेकर काफी विवाद हुआ था.

First published: 4 May 2018, 23:05 IST
 
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