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बिहार: जंगलराज नहीं तो कानून का राज भी नहीं

अभिषेक पराशर | Updated on: 10 May 2016, 16:12 IST
QUICK PILL
  • गया हत्याकांड में पुलिस ने आखिरकार हत्या के मुख्य आरोपी रॉकी यादव को हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया है.
  • गया के एक स्थानीय पत्रकार के मुताबिक पुलिस शुरू से ही राजनीतिक दबाव में काम कर रही थी. पुलिस रॉकी को तुंरत गिरफ्तार कर सकती थी. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और आरजेडी गठबंधन की सरकार अपने करीब छह महीने के कार्यकाल में बिहार शराबबंदी के फैसले को छोड़कर अक्सर बड़ी आपराधिक घटनाओं की वजह से सुर्खियों में रहा. अपराध मुक्त बिहार और सुशासन के दावे की वास्तविकता हर महीने किसी बड़े आपराधिक वारदात की भेंट चढ़ जाती है. 

गया में जेडीयू की एमएलसी मनोरमा देवी के बेटे रॉकी यादव ने 20 साल के युवा आदित्य सचदेव की इस वजह से कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी क्योंकि आदित्य ने रॉकी की महंगी रेंज रोवर को साइड नहीं दिया था. 

हत्याकांड के बाद चौतरफा दबाव में आई पुलिस ने आनाकानी करते हुए देर से एफआईआर दर्ज की और उसने रॉकी के पिता बिंदेश्वरी यादव और मनोरमा देवी के बॉडीगार्ड को आरोपी को भगाने और सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. 

हत्याकांड के बाद फरार रॉकी को आखिरकार गया पुलिस ने मंगलवार सुबह 4 बजे बोधगया इलाके से गिरफ्तार कर लिया. रॉकी को उसके पिता बिंदी यादव की फैक्ट्री से गिरफ्तार किया गया है. 

बिंदी यादव का खुद भी आपराधिक इतिहास रहा है. उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 124 ए यानी देशद्रोह के तहत भी मामला दर्ज है. 

गया पुलिस के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, 'बिंदी यादव के खिलाफ देशद्रोह के मामले में पुलिस ने चार्जशीट तो दाखिल कर दी है लेकिन उनकी पहुंच और सरकार से नजदीकी रिश्तों की वजह से मामला काफी समय से आगे नहीं बढ़ पा रहा है.' 

गया हत्याकांड का आरोपी रॉकी यादव कुख्यात अपराधी बिंदी यादव और जेडी-यू पार्षद मनोरमा देवी का बेटा है

अब बिंदी यादव के बेटे रॉकी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है और उसके पास से हत्या में इस्तेमाल लाइसेंसी पिस्तौल भी बरामद की गई है. पुलिस की माने तो रॉकी ने अपना अपराध कबूल कर लिया है. 

गया के एक स्थानीय पत्रकार ने बताया, 'पुलिस शुरू से ही राजनीतिक दबाव में काम कर रही थी. पुलिस रॉकी को तुंरत गिरफ्तार कर सकती थी. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. बोधगया में बिंदी यादव के फैक्ट्री से उसकी गिरफ्तारी यह बताती है कि पुलिस रॉकी को गिरफ्तार किए जाने के मामले में शिथिलता बरत रही थी या किसी दबाव में थी.'

हालांकि गया पुलिस अधीक्षक गरिमा मलिक ऐसे किसी राजनीतिक दबाव का खंडन करती हैं. लेेकिन जब कैच ने उनसे एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी के बारे के पूछा तो उसका उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया.

पुलिसिया कार्रवाई और सरकार के दावे पर आदित्य के पिता श्याम सुंदर को भरोसा नहीं है. उनका कहना है, 'जल्द ही रॉकी जेल से छूट जाएगा और जितने दिन भी वह जेल में रहेगा, उसे वहां किसी तरह की तकलीफ नहीं होगी.' 

आदित्य की हत्या के बाद इंसाफ की मांग को लेकर पटना में आयोजित मार्च में शामिल दवा कारोबारी आलोक जायसवाल ने कहा, 'आदित्य के पिता जो कह रहे हैं उससे हम सभी सहमत है. बिहार में हर बड़ी आपराधिक घटना के बाद सरकार यह दावा करती है कि अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा लेकिन अगली बार फिर से वैसी ही वारदात हो जाती है.' 

बिंदी यादव के खिलाफ पहले से धारा 124 ए के तहत मुकदमा चल रहा है जिसमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है

बिहार में पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिसमें सरकार में शामिल दलों के विधायकों पर सीधे आरोप लगा है. आरजेडी के विधायक राजबल्लभ यादव पर बलात्कार का मामला हो या फिर गया विधायक कुंती देवी के खिलाफ हत्या के मामले में दाखिल चार्जशीट का. 

बिहार में आम आदमी पार्टी की नेता परवीन अमानुल्लाह बताती हैं, 'मौजूदा सरकार में प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है. सरकार के पास अपराध को खत्म करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है.' उन्होंने  कहा कि नीतीश कुमार बिहार में साफ सुथरी सरकार देने में पूरी तरह विफल रहे हैं. राज्य में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और उन्हें कानून और सरकार का बिलकुल भी भय नहीं है. 

हत्याकांड के बाद दहशत में आए सचदेवा पविार के लोगों का कहना था कि अब हमारे पास दो ही रास्ते हैं. हम अपराधियों से मुकाबला करने के लिए खुद हथियार उठाएं या अपना कारोबार समेट कर वापस पंजाब चले जाएं. 

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सचदेवा परिवार का यह बयान सरकार के सुशासन के दावे पर तमाचा है.

मोदी पूछते हैं, 'नीतीश कुमार को पूर्ण शराबबंदी पर अपनी पीठ थपथपाने से फुर्सत नहीं मिल रही है और इधर लाचार और मजबूर लोग आत्मरक्षा में हथियार उठाने की बात कर रहे हैं. यह कैसा सुशासन है?'

कैसे आएगा निवेश

बिहार की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है. 2014-15 में बिहार की जीएसडीपी 66.4 अरब डॉलर से अधिक की रही है. 

इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बिहार को इस वक्त अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा निवेश की जरूरत है. ऐसे में कारोबारी जगत का कारोबार समेट कर वापस चले जाने की धमकी देना बिहार के ब्रांड इमेज के लिए सही नहीं है. 

पिछली बार जब कंस्ट्रक्शन कंपनी के दो इंजीनियरों की हत्या हुई थी तब भी बिहार में होने वाले निवेश पर कानून और व्यवस्था की खराब स्थिति का असर पड़ने का अंदेशा जताया गया था.

बिहार इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रेसिडेंट रामलाल खेतान बताते हैं, 'सरकार कानून और व्यवस्था के मामले में विफल रही है लेकिन उनका नीतीश कुमार पर भरोसा बना हुआ है.' 

खेतान कहते हैं कि पहले भी जब इस तरह की घटनाएं हुई तो अपराधियों को पकड़ लिया गया. हालांकि खेतान इस बात से सहमति जताते हैं, 'नई गठबंधन सरकार के आने से बाद से बिहार अक्सर बुरी खबरों की वजह से सुर्खियों में आया है.' 

बदला मिजाज

पिछले चुनाव में बिहार की जनता ने नीतीश कुमार की छवि पर भरोसा जताते हुए उन्हें प्रचंड जनादेश दिया. बेशक जमीनी राजनीतिक समीकरण लालू यादव की मुट्ठी में था लेकिन लोगों ने कुमार की छवि पर भरोसा किया. 

नवंबर 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद कुमार ने अपराधियों के मामले को फास्ट ट्रैक किया. नतीजा बड़े  अपराधी जेल भेजे गए और इनमें से अधिकांश अभी सजा काट रहे हैं.

2005 में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपराधियों के मामले को फास्ट ट्रैक किया था

हालांकि 2015 में आरजेडी के साथ गठबंधन की सरकार बनने के बाद बिहार में दूसरे तरह के समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं. 

लालू यादव ने हाल ही में सजायाफ्ता अपराधी शहाबुद्दीन को अपनी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया. यह कुमार की छवि के लिए बड़ा झटका था. तो क्या नीतीश कुमार की प्राथमिकताएं बदल गई हैं?

अमानुल्लाह बताती हैं, 'नीतीश सरकार की प्राथमिकता बदलने का सवाल ही कहां है. वह तो हमेशा से ही ऐसी थी. पिछली बार के मुकाबले इस बार नीतीश कुमार लोगों को यह झूठा आश्वासन जरूर दे सकते हैं कि आरजेडी की वजह से वह बहुत कुछ नहीं कर पा रहे हैं.' 

सरकार में सब ठीक नहीं

हाल ही में राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक पोस्टर जारी किया था जिसमें नीतीश कुमार की तस्वीर नहीं थी. हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ जब कुमार तेजस्वी के पोस्टर से गायब दिखे. 

दूसरा नीतीश कुमार खुद को राष्ट्रीय राजनीति के लिए तैयार कर रहे हैं. उनकी नजर अब बिहार पर कम दिल्ली पर ज्यादा है. जानकारो के मुताबिक शायद यह एक अहम कारण है कि नीतीश कुमार की प्राथमिकताएं बदली हैं और शासन से उनका ध्यान भटका है.

2019 के लोकसभा चुनाव के पहले गैर बीजेपी दलों को एकजुट करने की मुहिम को लेकर नीतीश विपक्ष के निशाने पर है. कभी नीतीश के साथ रहे और फिलहाल एनडीए में मंत्री रामविलास पासवान ने भी कुमार को पहले बिहार संभालने की नसीहत देने में  देर नहीं लगाई. पासवान ने कहा, 'बिहार में लगातार हत्याएं हो रही हैं और नीतीश कुमार हवा में उड़ रहे हैं.' 

बिहार की राजनीति में कानून और व्यवस्था हमेशा से एक अहम मुद्दा रहा है. लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान जिस तरह से आपराधिक घटनाओं में सरकार में शामिल लोगों की भूमिका सामने आई है, वह आने वाले दिनों में कुमार की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है.

गया पुलिस के अधिकारी ने कहा, 'आदित्य सचदेव की हत्या सामान्य अपराध की घटना नहीं है. आम तौर पर अपराधी लूट पाट या बदले की भावना से हत्या करते हैं. लेकिन रॉकी ने साइड नहीं देने पर उस बच्चे को गोली मार दी क्योंकि उसे पता था कि  इस सरकार में पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी. बाद में आपने देखा कि किस तरह से मामले को दबाने की कोशिश की गई.'

First published: 10 May 2016, 16:12 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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