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यूं ही नहीं हैं सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में सबसे चर्चित जस्टिस चेलामेश्वर

सुनील रावत | Updated on: 12 January 2018, 19:17 IST

सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाकर एक बार फिर वरिष्ठ जज चेलामेश्वर चर्चा में आ गए हैं. इस बार चेलामेश्वर ने अपने साथी जजों के साथ मीडिया के सामने आकर कई सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने कहा, "हम मीडिया के सामने इसलिए आये हैं ताकि बाद में ये ना कहा जाए कि हमने अपनी आत्मा बेच दी."

यह कोई पहला मौका नहीं है जब जस्टिस चेलामेश्वर ने सवाल खड़े किये हैं. इससे पहले कोलेजियम प्रणाली से लेकर आधार और जजों के भ्रष्टाचार' को लेकर जस्टिस चेलामेश्वर का ट्रैक रिकॉर्ड उनके असंतोषों के लिए प्रसिद्द रहा है. उच्चतम न्यायालय के गलियारों में जस्टिस चेलामेश्वर सबसे चर्चित न्यायाधीश हैं. अटकलबाजी साये की तरह उनका पीछा करती है.

बीते दिनों देश की सबसे बड़ी अदालत में दो पीठों के समक्ष दो याचिकाएं सुनवाई के लिए आयी. इनमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की दर्ज की गई एक एफआईआर में जजों पर लगाए गए आरोपों पर विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की गई थी.

इस मामले में एक पीठ ने याचिका को मुख्य न्यायाधीश के हवाले करते हुए उनसे समुचित पीठ गठित करने का आग्रह किया. इस मामले में चेलामेश्वर की अगुआई वाले पीठ ने कहा कि उसके समक्ष दायर याचिका पर पांच सीनियर जजों की पीठ को सुनवाई करनी चाहिए.

लेकिन कुछ ही घंटों में उनके आदेश को निरस्त कर दिया गया. उस समय मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा एक संविधान पीठ की अगुआई कर रहे थे. उन्होंने तुरंत पांच न्यायाधीशों का पीठ गठित किया जिसने चेलामेश्वर के आदेश को निरस्त कर दिया.

सीजेआई दीपक मिश्रा का कहना था कि संविधान पीठ गठित करना मुख्य न्यायाधीश का विशेषाधिकार है और वह इसके लिए अपनी मर्जी से न्यायाधीशों की नियुक्त कर सकते है.

इसका श्रेय जस्टिस चेलामेश्वर को ही जाता है कि उनके प्रयास से उच्चतम न्यायालय न्यायाधीशों के चयन के बारे में अपनी वेबसाइट पर जानकारी साझा करने के लिए मजबूर हुआ.

 जब 2जी की सुनवाई से हटाए गये चेलामेश्वर 

कुछ साल पहले उन्हें 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की सुनवाई कर रहे पीठ से हटा दिया गया था. पिछले साल अगस्त में चेलामेश्वर और एक अन्य न्यायाधीश ने प्रक्रियागत मुद्दों पर एक व्यापक पीठ के आदेश पर असहमति जताई थी.

पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर के कार्यकाल के दौरान चेलमेश्वर ने तीन तलाक और व्हॉट्सऐप की अनुबंध नीतियों में निजता से जुड़े अहम मुद्दों पर सुनवाई करने वाले पीठ का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था.

खेहड़ ने साथी न्यायाधीशों से अपनी गर्मियों की छुट्टिïयों में कटौती करने की अपील की ताकि जरूरी मामलों को समय पर निपटाया जा सके। लेकिन चेलामेश्वर ने यह कहते हुए अवकाश ले लिया कि उन्हें कुछ व्यक्तिगत काम निपटाने हैं.

 

चेलामेश्वर ने कॉलेजियम के मुद्दे पर साथी न्यायाधीशों के साथ असहमति जताते हुए कहा कि यह व्यवस्था भाई भतीजावाद के लिए एक अड्डा बन चुकी है जहां साधारण या उससे भी कम क्षमता रखने वाले लोगों को प्रोन्नत किया जाता है.

जब सी एस कर्णन का मामला उनके पीठ के सामने आया तो उन्होंने रहस्यमयी तरीके से लिखा, 'क्या हम वास्तव में निर्भरता की बीमारी को पार कर चुके हैं या फिर हमने इसे राजनीतिक से न्यायिक पदानुक्रम में स्थानांतरित कर दिया है'.

First published: 12 January 2018, 17:03 IST
 
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