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न्यायपालिका में सरकारी दखल पर जस्टिस चेलमेश्वर ने CJI को लिखा 6 पन्ने का लेटर

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 March 2018, 15:43 IST

सर्वोच्च न्यायालय के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश जे चेलमेश्वर ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा को पत्र लिखकर न्यायपालिका के कामकाज में सरकार के कथित हस्तक्षेप के मुद्दे पर फुल कोर्ट डिस्कशन की मांग की है. 21 मार्च को लिखे गए चेलमेश्वर के पत्र की प्रतियां 22 अन्य सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को भी भेजी गई है.

उन्होंने केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के एक मामले में जिला एवं सत्र न्यायधीश कृष्णा भट के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की जांच पर सवाल उठाए जबकि दो बार भट का नाम एलेवेशन के लिए कोलोजियम ने सुझाया था.

अपने छह पन्नो के पत्र में जस्टिस चेलेमेश्वर ने न्यायिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया है. उन्होंने लिखा "किसी भी देश में सरकार और न्यायपालिका के बीच दोस्ताना व्यवहार लोकतंत्र में आखिरी कील कहा जाता है. हम दोनों ही निगरानी करने वाले हैं इसलिए आपसी सराहना नहीं होनी चाहिए, हम बस संवैधानिक साथी हैं.

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा है कि हम सर्वोच्च न्यायालय के न्याायधीश हैं, हम पर सरकार के बढ़ते दखल के आगे अपनी आजादी और संस्थान की पवित्रता को सौंप देने के आरोप लग रहे हैं. शासन के नुमाइंदे हमेशा बेचैन रहते हैं और वो कोई नाफरमानी बर्दाश्त नहीं करते, चाहे फिर न्यायपालिका ही क्यों ना हो। हमेशा से ही मुख्य न्यायाधीशों के साथ सचिवालयों के मुखिया की तरह व्यवहार करने की कोशिश की गई.

First published: 30 March 2018, 15:40 IST
 
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