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प्रशांत भूषण की याचिका सुनने से जस्टिस चेलमेश्वर ने क्यों कर दिया इंकार ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 April 2018, 11:48 IST

भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने एक बार दोहराया है कि सुप्रीम कोर्ट में केसों के आबंटन के लिए विशेषाधिकार सिर्फ सीजीआई के पास है. इसके बाद जस्टिस चेलमेश्वर ने उस यचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट में केसों के आबंटन की मौजूदा व्यवस्था को बदलने की बात कही गई थी. यह याचिकासुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दायर की थी.

जस्टिस चेलमेश्वर ने सुनवाई के दौरान कहा ''वही चाहते हैं कि 24 घंटे में उनके फैसले पलट दिए जाए इसलिए मैं यह नहीं कर सकता. कृपया मेरी परेशानी समझिए.'' न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने भूषण से कहा '' कोई मेरे खिलाफ लगातार यह अभियान चला रहा है कि मैं कुछ हासिल करना चाहता हूं. इस बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं कर सकता. मुझे खेद है, आप कृपया मेरी परेशानी समझिए.’

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, ''उनके रिटायरमेंट को कुछ ही दिन बचे हैं अगर देश ही नहीं चाहता तो वह क्या कर सकते हैं''

चेलामेश्वर के इनकार के बाद याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने मामला चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच के सामने उठाया और कहा कि याचिका सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए. इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि वह खुद मामले को देखेंगे. 

क्या है मामला 

सुप्रीम कोर्ट में पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने रोस्टर तय करने के चीफ जस्टिस के प्रशासनिक अधिकार के बारे में स्पष्टीकरण और व्याख्या के लिए एक याचिका दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के नियम का पालन हो और इसके तहत चीफ जस्टिस का मतलब पांच सीनियर जजों के कलीजियम को माना जाए. चीफ जस्टिस को नियम के विपरीत केसों के आवंटन से रोका जाना चाहिए.  मामले के आवंटन में अपने मनमाफिक जज को चुन-चुनकर केस भेजने से रोका जाए.

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First published: 13 April 2018, 11:48 IST
 
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