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जज लोया केस: मौत की स्वतंत्र जांच के लिए फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे वकील

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 May 2018, 8:59 IST

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस देख रहे जज लोया की मौत को लेकर बॉम्बे वकील एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका डाली है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया मामले की स्वतंत्र जांच की याचिका खारिज कर दी थी. इसे लेकर बॉम्बे वकील एसोसिएशन फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.

याचिका वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने तय की. याचिका में अदालत के निष्कर्षों को हटाने की भी मांग की गई और कहा गया कि न्यायपालिका की आजादी पर हमला और न्यायिक संस्थानों की विश्वसनीयता को कम करने का प्रयास किया जा रहा है. याचिका में कहा गया कि जस्टिस लोया मामले में न्याय का गर्भपात हुआ है.

गौरतलब है कि 19 अप्रैल 2018 को कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला, पत्रकार बीएस लोने, बांबे लॉयर्स एसोसिएशन सहित अन्य कई पक्षकारों की ओर से जस्टिस लोया की मौत के मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दिया था.

तब सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस लोया केस की SIT से जांच कराने की मांग ठुकरा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अब जस्टिस लोया केस में कुछ नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि केस को देख रहे जजों पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं की मंशा न्यायपालिका को खराब करना है. 

सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि जज लोया के मामले में जांच के लिए दी गई अर्जी में कोई दम नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि जजों के बयान पर संदेह का कोई कारण नहीं है. उनके बयान पर संदेह करना संस्थान पर संदेह करना जैसा होगा.

दरअसल, याचिका में जस्टिस लोया के मौत की जांच SIT से कराने की मांग की गई थी. इन याचिकाओं पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने फैसला सुनाया था.

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बता दें कि साल 2014 मेंअपने सहयोगी न्यायाधीश की पुत्री के विवाह में शामिल होने गए जज लोया की बहुत ही संदिग्ध स्थितियों में मौत हो गई थी. कहा गया था कि हृदय गति रुक जाने से उनकी मृत्यु हो गयी थी. उस समय वह 2005 में कथित फर्जी मुठभेड़ में गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी तुलसी प्रजापति के मारे जाने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे थे. 

जस्टिस लोया की मौत पर परिवार के संदेह को लेकर अंग्रेजी मैगजीन 'द कैरवां' में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी. इस रिपोर्ट के बाद देश के कई हिस्सों में जस्टिस लोया की मौत पर सवाल उठने लगे. इस मामले में बॉम्बे लॉयर्स असोसिएशन ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका डालकर जस्टिस लोया की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की थी.

हालांकि जस्टिस लोया की मौत को लेकर चल रहे विवाद के बीच उनके बेटे ने बॉम्बे हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लूर से मुलाकात की और कहा कि उनके पिता के मौत की परिस्थितियों को लेकर परिवार को कोई शिकायत या संदेह नहीं है.

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गौरतलब है कि नवंबर 2005 में कथित मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन मारा गया था. इस मामले में बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह भी आरोपी थे. इस केस की सुनवाई जस्टिस लोया कर रहे थे. तब जज लोया की मौत के बाद पीड़ित परिवार ने कई सवाल उठाए थे. हालांकि, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अब इस मामले में बरी हो चुके हैं.

First published: 21 May 2018, 8:46 IST
 
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