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किसान परिवार में जन्म, पत्रकारिता से करियर की शुरुआत, जानिए कौन हैं देश के नए CJI जस्टिस NV रमना

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 April 2021, 15:26 IST
NV RAMANA 48th Chief Justice of India (Catch News)

 

जस्टिस एनवी रमना (Justice NV Ramana) को मंगलवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा भारत के 48वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में नियुक्त किया गया है. निवर्तमान CJI शरद अरविंद बोबड़े, जो 23 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, ने जस्टिस रमना को उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की थी, जिसे राष्ट्रपति ने विधिवत स्वीकार कर लिया है. जस्टिस रमना 24 अप्रैल को अगले CJI पद की शपथ लेंगे और 26 अगस्त 2022 तक उनका कार्यकाल होगा.

न्यायमूर्ति नथालपति वेंकट रमना (Justice Nuthalapati Venkata Ramana) ने अपने क़रीब चार दशक लंबे करियर में दो उच्च न्यायालयों, सुप्रीम कोर्ट, कई प्रशासनिक न्यायाधिकरणों और विभिन्न सरकारी संगठनों के पैनल वकील, संवैधानिक, आपराधिक एक्सपर्ट के रूप में काम किया. भारत के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने से पहले, उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है.


एनवी रमना का जन्म 27 अगस्त 1957 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के पोन्नवरम गांव में एक किसान परिवार में हुआ. पूर्ण रूप से वकील बनने से पहले रमना ने एक प्रमुख तेलुगु अखबार के लिए एक पत्रकार के रूप में काम किया. 1983 में उन्होंने एक वकील के रूप अपनी शुरुआत की.

न्यायमूर्ति रमना ने केंद्र सरकार के लिए अतिरिक्त स्थायी वकील (additional standing counsel) के रूप में काम किया. उन्हें 2000 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने 2013 में दो महीने के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी कार्य किया.


जस्टिस एनवी रमना 17 फरवरी 2014 से सुप्रीम कोर्ट में जज हैं. उन्होंने 27 नवंबर, 2019 से राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में भी काम किया है. 6 अप्रैल, 2021 (मंगलवार) को उन्हे CJI के रूप में नियुक्ति मिली है. भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल 16 महीने का होगा और उनका कार्यकाल 26 अगस्त 2022 को समाप्त होगा.

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में, न्यायमूर्ति रमना ने कई प्रमुख निर्णयों का हिस्सा रहे, जिनमें अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद 2020 में जम्मू-कश्मीर में एक साल के लंबे इंटरनेट प्रतिबंध को समाप्त करने का निर्णय शामिल था. उन्होंने कहा जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट प्रतिबंध न केवल दूरसंचार नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संविधान द्वारा दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी उल्लंघन है.  न्यायमूर्ति एनवी रमना ने महाराष्ट्र विधानसभा में 2019 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट के मामले फैसला सुनाने वाले जजों में शामिल थे.

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First published: 6 April 2021, 15:26 IST
 
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