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CJI पर बने जांच पैनल से जस्टिस एनवी रमना ने खुद को किया अलग, लगे थे ये आरोप

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 April 2019, 16:27 IST

सुप्रीम कोर्ट के जज एनवी रमना ने गुरुवार को सीजेआई रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बने पैनल से खुद को अलग करने का फैसला किया है. इससे पहले गोगोई पर आरोप लगाने वाली पूर्व अदालत कर्मचारी ने बुधवार को दावा किया था कि रमना सीजेआई गोगोई कर करीबी हैं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार अधिकारियों ने बताया कि जस्टिस रमना को लगा कि जांच और इसके परिणाम को लेकर पक्षपातपूर्ण आरोप लगाए जा रहे हैं, इसलिए पैनल का पुनर्गठन किया जाए. आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति का नेतृत्व न्यायमूर्ति एसए बोबडे कर रहे हैं जबकि न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी भी इसमें शामिल हैं. बोबडे मुख्य न्यायाधीश के बाद उच्चतम न्यायालय में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं.

 

तीनों न्यायाधीशों को संबोधित अपने जवाब में, शिकायतकर्ता ने कहा विशाखा दिशानिर्देश और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति में महिला सदस्यों का बहुमत नहीं है और एक बाहरी सदस्य कानून द्वारा अनिवार्य है. पूर्व अदालत कर्मचारी ने न्यायमूर्ति एनवी रमना को जांच समिति में शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि रमना गोगोई के घर में अक्सर आते थे और सीजेआई के करीबी दोस्त थे और उनके लिए एक परिवार के सदस्य की तरह हैं.

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के पटनायक को वकील उत्सव बैंस की आरोपों की जांच करने के लिए कहा है.
जस्टिस अरुण मिश्रा, आर एफ नरीमन और दीपक गुप्ता की विशेष पीठ ने सीबीआई निदेशक, आईबी निदेशक और दिल्ली पुलिस आयुक्त से कहा कि जब भी जरूरत हो न्यायमूर्ति पटनायक के साथ सहयोग करें.

CJI मामले पर सुनवाई के दौरान जब कोर्ट रूम हो गया खामोश

First published: 25 April 2019, 16:19 IST
 
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