Home » इंडिया » Amended Juvenile Justice Bill: minimum age reduced to 16 years
 

जुवेनाइल जस्टिस बिल राज्यसभा में पास

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 December 2015, 19:44 IST

निर्भया गैंगरेप के नाबालिग दोषी को सजा दिलाने के नाम पर शुरू हुई बहस जुवेनाइल जस्टिस बिल में बदलाव के साथ अपने अंजाम तक पहुंच गई. इस अमेंडमेंड बिल के जरिए सात साल या उससे अधिक सजा वाले कानून में अपराधी की न्यूनतम उम्र 16 साल कर दी गई है. राज्यसभा में बिल पर चर्चा में लगभग सभी दलों ने एक सुर से इस बिल का समर्थन किया. सिर्फ सीपीआई (एम) ने इसके विरोध में वोटिंग से वॉक आउट किया.

विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने जुवेनाइल कानून के बारे में राज्यसभा को बताया कि गंभीर अपराध की श्रेणी में वे अपराध आते हैं जिनकी सजा सात साल या उससे ज्यादा होती है. उन्होंने बताया कि कानून में जुवेनाइल पुलिस का प्रावधान भी है.

इस बहस में हिस्सा लेते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने प्रस्तावित बिल को बहुत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि निर्भया का मामला दिल दहलाने वाला और खतरनाक था.

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन बोले, 'मैं उस समय क्या करता अगर 16 दिसंबर की घटना मेरी 20 साल की बेटी के साथ हुई होती? क्या मैं सबसे अच्छे वकील को हायर करता और क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की मदद लेता या फिर एक बंदूक खरीदता और अपराधी को गोली मार देता. इस बिल का इंतजार हम अनिश्चितकाल तक नहीं कर सकते. यह बेहद महत्वपूर्ण बिल है. मैं इसका समर्थन करता हूं.

भाजपा सांसद अनिल दवे ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा, 'हमें और कितने सबूतों की जरूरत है. क्या हम चिट्ठियों के गुलाम हैं. सभी को यह सोचना चाहिए कि यदि वे निर्भया के माता-पिता होते तो उनका फैसला क्या होता?

बहुजन समाज पार्टी के नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने सवाल उठाते हुए बिल का समर्थन किया कि, 'क्या ऐसे भी कोई हालात हो सकते हैं जब आप रेप को न्यायसंगत करार दे दें?'


क्या ऐसे भी कोई हालात हो सकते हैं जब आप रेप को न्यायसंगत करार दे दें?

कांग्रेस की विजयलक्ष्मी साधो ने कहा कि आज हमारे समाज में परिवारों का आकार छोटा हो गया है. इसके कारण अभिभावक बच्चों पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते तथा कई बार बच्चे गलत कामों में लिप्त हो जाते हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि कानून में केवल अपराधी नहीं, बल्कि पीड़िता के पुनर्वास के बारे में भी प्रावधान होना चाहिए.

शिवसेना के संजय राउत ने बिल के समर्थन में कहा, 'कहा जाता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन निर्भया के मामले में कानून के हाथ छोटे पड़ गए.' उन्होंने इंग्लैंड, चीन, अमेरिका के कई राज्यों के कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि हत्या एवं बलात्कार के मामलों में 16 साल के अपराधियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है.

राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रवि वर्मा ने अपनी बात रखते हुए कहा, 'हमें एकदम जमीनी स्तर से शुरुआत करनी होगी. हमारे जुवेनाइल सेंटर्स बेहद खराब हालत में हैं. उन्हें सुधारना होगा.'

इस तरह लगभग सभी दलों की आम सहमति से जुवेनाइल जस्टिस सुधार बिल पास हो गया.

First published: 22 December 2015, 19:44 IST
 
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