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जब 36 विधायकों के साथ ज्योतिरादित्य की दादी 'राजमाता' ने गिराई थी कांगेस सरकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 March 2020, 13:12 IST

मध्यप्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल मचाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के जल्द भाजपा में शामिल होने की खबर है. मीडिया में खबरें आ रही है कि भाजपा नेता अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में वह भाजपा मी शामिल हो सकते हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि कांग्रेस से इस्तीफ़ा देने वाले 22 कांग्रेस विधायक भी सिंधिया के साथ है. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें ज्योतिरादित्य से पार्टी से इस्तीफा देने की उम्मीद नहीं की थी. उन्होंने कहा कि यह इसलिए भी दुखी करने वाला है क्योंकि अपने पिता माधवराव की जयंती पर उन्होंने पार्टी छोड़ी है.

पार्टी छोड़ने के लिए चुना खास दिन

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी छोड़ने के लिए एक खास दिन को चुना. उन्होंने अपने पिता माधवराव सिंधिया की 75वीं जयंती के दिन कांग्रेस के साथ अपना रिश्ता ख़त्म किया. हालांकि उनका इस दिन को चुनना कोई संयोग नहीं है. इस कदम के पीछे एक ऐतिहासिक महत्व है और इसके लिए ग्वालियर के राजवंश और गांधी नेहरू वंश के के इतिहास को समझना आवश्यक है. ज्योतिरादित्य की दादी विजयाराजे सिंधिया ने 1967 में कांग्रेस से इस्तीफ़ा दे दिया था और वह जनसंघ में शामिल हो गई थी. वह गुना लोकसभा सीट से जनसंघ के टिकट पर चुनाव जीती थी. वह भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक थी.


1967 में जब मध्यप्रदेश में जब डीपी मिश्रा की सरकार थी तब कांग्रेस से नाराज होकर राजमाता विजयराजे सिंधिया कांग्रेस छोड़कर जनसंघ में शामिल हो गई.उन्होंने जनसंघ के टिकट पर गुना लोकसभा सीट से चुनाव जीता. एक बार फिर से इतिहास ने खुद को दोहराया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने पिता और दादी की राह पर चलकर कांग्रेस से अलग होने का ऐलान किया है.

पिता और दादी की राह चले  

ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव कांग्रेस के दिग्गज थे और राजीव गांधी के करीबी विश्वासपात्र थे. ज्योतिरादित्य मध्य प्रदेश में कांग्रेस का एक प्रमुख चेहरा बन गए थे. राजमाता की बेटियां और माधवराव की बहनें वसुंधरा राजे (राजस्थान की पूर्व सीएम) और यशोधरा राजे सिंधिया (पूर्व मंत्री) वर्तमान में भाजपा में शामिल हैं. माधवराव की छोटी बहन यशोधरा ने अपने भतीजे के कांग्रेस से इस्तीफा देने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे राष्ट्र हित बताया है.

1967 में जब राजमाता ने मध्य प्रदेश पर शासन करने वाली कांग्रेस से अपना इस्तीफा दे दिया, तो वह अपने साथ 36 कोंग्रेसी विधायकों को भी ले गई. जिससे सरकार गिर गई. राजमाता के पोते ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश कांग्रेस से जब इस्तीफे की घोषणा की तो वह भी 22 विधायकों को अपने साथ ले गए.

माधवराव सिंधिया ने 1971 में जनसंघ से चुनाव लड़कर राजनीतिक रूप से शुरुआत की. लेकिन वह 1977 में एक इंडिपेंडेंट उम्मीदवार बन गए. 1980 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए. उन्होंने कई मंत्रालय संभाले और राजीव गांधी के लिए शीर्ष सलाहकार बन गए. सितंबर 2001 में माधवराव का जब विमान दुर्घटना में निधन हुआ. उस समय उन्हें प्रधानमंत्री का संभावित उम्मीदवार माना जा रह था.

माधव राव को जब मध्य प्रदेश का सीएम नहीं बनाया तो उन्होंने 1993 में पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया. उस वक्त मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार थी. माधव राव ने अपनी अलग पार्टी 'मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस बनाई. लेकिन बाद में वे कांग्रेस में वापस लौट गए थे.

मध्य प्रदेश: सिंधिया के पार्टी छोड़ने पर कांग्रेस नेताओं ने दी कुछ ऐसी प्रतिक्रियाएं

First published: 11 March 2020, 13:12 IST
 
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