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सवाल मेरे बेटे का नहीं, पूरे जेएनयू को बदनाम किया जा रहा है: कन्हैया के पिता

विकास कुमार | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST
QUICK PILL
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र संघ के अध्यक्ष \r\nकन्हैया कुमार को दिल्ली पुलिस ने 12 फरवरी को देशद्रोह के आरोप में \r\nगिरफ्तार किया है. फिलहाल कन्हैया पुलिस हिरासत में हैं. कैम्पस में इस \r\nगिरफ्तारी का विरोध तेज हो गया है.जेएनयू\r\n के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से पश्चिमी एशियाई और अफ्रीकन स्टडीज सेंटर \r\nसे पीएचडी कर रहे कन्हैया का घर बिहार के जिला बेगुसराय में है. बेगुसराय \r\nस्थित कन्हैया के घर पर उसके पिता जयशंकर सिंह हैं जो पिछले चार साल से \r\nलकवाग्रस्त हैं और बिस्तर पर पड़े हैं. कन्हैया की मां आंगनबाड़ी सेविका\r\n के तौर पर काम करती है. इस काम के बदले उन्हें तीन हज़ार रुपये प्रति माह \r\nमिलता हैं.
पढ़ें: मामूली छात्र बनाम ताकतवार भारत सरकारकन्हैया का एक छोटा \r\nभाई है, प्रिंस जिसने अभी-अभी अपना पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और आगे की पढ़ाई\r\n के लिए तैयारी कर रहा है. कन्हैया का एक बड़ा भाई भी है जो असम में एक \r\nप्राईवेट कंपनी में काम करता है.कन्हैया की गिरफ्तारी और उससे जुड़े कई अन्य मसलों पर कैच ने उनके पिता जयशंकर और छोटे भाई प्रिंस से बात की. बातचीत के अंश:

अपनी पारिवारिक स्थिति के बारे में कुछ बताइए? परिवार की अमदनी का मुख्य स्रोत क्या है?

हमारे पास कुछ खास नहीं हैं. थोड़ी सी खेती है. उससे खाने लायक अनाज आ जाता है. बड़ा लड़का एक छोटी सी नौकरी कर रहा है. हर महीने वो कुछ पैसे परिवार के पास भेजता है. कन्हैया की मां, आंगनबाड़ी में काम करती है. उन्हें वहां से तीन हजार रुपए मिलता है. लेकिन उसका कुछ तय नहीं रहता. मेरी तबियत पिछले कुछ सालों से खराब है. पखाना-पेशाब भी अपने से नहीं कर पाता. इसके लिए भी किसी न किसी का सहारा चाहिए होता है. यही है हमारा परिवार.

मैं तो परिवार को चला नहीं सकता, सारा बोझ कन्हैया की मां उठाती है. उसकी हिम्मत से ही मैं जीवित हूं. मेरे ल़ड़के भी उसी की वजह से पढ़ रहे हैं.

आपको पता है कि आपके बेटे कन्हैया को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उसपर देशद्रोह का आरोप लगाया है?

न्यूज चैनलों के माध्यम से मुझे घटना की जानकरी हुई. वहीं से पता चला कि कुछ हुआ है कन्हैया के साथ. लेकिन उसकी गिरफ्तारी की जानकारी मुझे तब मिली जब दिल्ली पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर का फोन आया. फोन पर उन्होंने मुझसे पूछा कि आप कन्हैया के पिता हैं? मैंने जवाब दिया हां. इसके बाद उन्होंने बताया कि आपके लड़के को देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया जा रहा है. इतना कहने के बाद उन्होंने फोन काट दिया.
JNU lead

आपको लगता है कि कन्हैया ने ऐसा कुछ किया है जिसकी वजह से उसपर देशद्रोह का मामला बनता है?


बिल्कुल नहीं... मेरा बेटा एक देशभक्त है. हमारा परिवार मार्क्सवादी विचार का है. मैं और मेरे परिवार के दूसरे कई लोग मार्क्सवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं. कन्हैया भी इसी माहौल में पला-बढ़ा है. वो ऐसा कुछ नहीं कर सकता जिससे देश को नुकसान पहुंचे. कन्हैया हमेशा से गरीवों और मजलूमों के साथ खड़ा होना चाहता था. हमारी खुद की आर्थिक-सामाजिक स्थिति ऐसी ही है. मेरा बेटा आज भी वही कर रहा है.

अगर कन्हैया ऐसा कुछ नहीं कर सकता तो उसे गिरफ्तार ही क्यों किया गया है? आपको क्या लगता है?


सवाल केवल कन्हैया का नहीं है. पूरे जेएनयू को बदनाम किया जा रहा है. इसकी वजह यह है कि जेएनयू एक ऐसी जगह है जो हमेशा से सरकारों से मुश्किल सवाल करता रहा है. जैसे बेगुसराय मार्क्सवाद का गढ़ है वैसे ही जेएनयू भी है और यह बात सरकार को पच नहीं रही है.

आपको किसी तरह का डर लग रहा कि आपके लड़के पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है और वो जेल में है? अगर उसे जमानत नहीं मिली तो या अदालत में मामला लंबा चला तो?


किस मां-बाप को घबराहट नहीं होगी लेकिन मेरे घबराने से क्या होगा. इसकी मां तो बात भी नहीं कर पा रही है, किसी से.

(इस सवाल का जवाब कन्हैया के छोटे भाई प्रिंस कुमार देते हैं)

मैं आपके सवाल का जवाब देता हूं. पिताजी ज्यादा ज्यादा देर बोल नहीं पाते हैं. उन्हें घबराहट होने लगती है. अभी तक मीडिया में जो भी दिखाया जा रहा है उसमें कहीं मेरे भाई के खिलाफ कोई सबूत नहीं है. ऐसे कैसे मामला लंबा चलेगा? पुलिस ने गिरफ्तार भी गलत किया है. कहीं कोई सबूत नहीं है लेकिन कई टीवी चैनल बार-बार मेरे भाई को देशद्रोही लिख रहे हैं.

जब कन्हैया की गिरफ्तारी की खबर गांव के लोगों ने देखी तब उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?

केवल गांव ही नहीं समूचा इलाका हमारे साथ है. आप यहां आते तो देखते की मेरे छोटे से घर के सामने चौबिसों घंटे कैसे लोग जमा हैं. जेएनयू में जाने से पहले तक मेरा भाई यहीं रहता था. ये सारे लोग जानते हैं कि वो लड़का कैसा है? किसी को भी पुलिस की कहानी पर विश्वास नहीं हो रहा है. कल बेगुसराय बाजार और जिला में कई जगह पर विरोध प्रदर्शन हुआ है. सबने अपनी मर्जी से किया है. आप इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि क्या माहौल है!

कन्हैया की गिरफ्तारी की खबर पर आपकी मां की क्या प्रतिक्रिया है? क्या आप लोग दिल्ली आएंगे?

मां उस दिन से किसी से ज्यादा बात नहीं कर पा रही है. मैं दिल्ली आना चाहता हूं. मां भी बहुत रोई और जब भी भाई की फोटो देखती है टीवी पर तो रोने लगती है. मेरे पिताजी चल-फिर नहीं सकते. उन्हें अकेले नहीं छोड़ा जा सकता. अगर मां चली जाएगी तो खाने-पीने की दिक्कत हो जाएगी और अगर मैं चला गया तो यहां कोई बाहर-भीतर करने वाला नहीं रहेगा. इसी वजह से हम अभी दिल्ली नहीं आ सकते. मेरा भाई वहां अकेले नहीं है जेएनयू और देश भर के छात्र उसके साथ है.

First published: 15 February 2016, 8:46 IST
 
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