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पुण्यतिथि: जब कल्पना चावला के लिए महज 16 मिनट का इंतजार नहीं कर पायी मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 February 2018, 15:12 IST

अंतरिक्ष के इतिहास में 1 फरवरी का दिन काला दिन के रूप में दर्ज है. आज ही के दिन साल 2003 में भारत की एक बेटी ने अपनी जान गंवा दी थी. भारत की उस बेटी का नाम था कल्पना चावला. मानव सभ्यता को कुछ नया देने की चाह में कल्पना चावला अपने 6 अन्य साथियों के साथ अंतरिक्ष यात्रा पर थीं, लेकिन धरती पर वापस आते वक्त इनके अंतरिक्ष यान में आग लग गई और भारत की इस बेटी का सपना सदा-सदा के लिए खत्म हो गया.

करनाल में हुआ था कल्पना चावला का जन्म

कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था. उन्होंने स्कूली पढ़ाई करनाल के ही टैगोर बाल निकेतन से की. हरियाणा के पारंपरिक समाज में कल्पना जैसी लड़की के ख्वाब अकल्पनीय थे. इन्हीं अकल्पनीय ख्वाबों ने कल्पना चावला को एक आम लड़की से एक अंतरिक्ष यात्री बना दिया. शायद उन्होंने बचपन में जब पहली बार आसमान की तरफ देखा होगा, उसी समय तय कर लिया होगा कि एक दिन उन्हें तारों को छूना है. अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की पढ़ाई के लिए एडमिशन लिया.

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ऐसे करनाल से नासा पहुंची थीं कल्पना

जिन दिनों कल्पना चावला एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग कर रही थीं उन दिनों अंतरिक्ष विज्ञान में भारत काफी पीछे था. लेकिन कल्पना हर हालत में अपने इस सपने को पूरा करना चाहती थीं. इसके लिए उनका अमेरिका जाना जरूरी था. जहां से वह आगे का सफर पूरा कर सकें. इसी के लिए उन्होंने साल 1982 में अमेरिका का रुख कर लिया. जहां उन्होंने टैक्सास यूनिवर्सिटी में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए एम.टेक में एडमिशन ले लिया. उसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की. साल 1988 में कल्पना चावला को नासा में एंट्री मिल गई. उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. नासा में उन्हें रिसर्च सेंटर में नियुक्त किया गया.

1995 में पहली बार कल्पना ने भरी उड़ान

कल्पना चावला को मार्च 1995 में पहली अंतरिक्ष उड़ान के लिए चुन लिया गया. करीब 8 महीने बाद उनका पहला अंतरिक्ष मिशन 19 नवंबर 1997 को शुरू हुआ. उन्होंने 6 अंतरिक्ष यात्रियों के साथ स्पेस शटल कोलंबिया STS-87 से उड़ान भरी. अपने पहले मिशन के दौरान कल्पना ने 1.04 करोड़ मील का सफर तय किया. और करीब 372 घंटे अंतरिक्ष में बिताए. इस दौरान कल्पना ने धरती के कुल 252 चक्कर लगाए.

कल्पना ने साल 2003 में भरी आखिरी उड़ान

कल्पना चावला को साल 2000 में दोबारा अंतरिक्ष मिशन के लिए चुना गया. यह अंतरिक्ष यात्रा उनकी जिंदगी का आखिरी यात्रा साबित हुई. दरअसल, उनके इस इस मिशन की शुरुआत ही तकनीकि गड़बड़ियों के साथ हुई और इसकी वजह से इस उड़ान में लगातार देरी होती रही. अंत में 16 जनवरी 2003 को कल्पना सहित 7 अंतरिक्ष यात्रियों ने कोलंबिया STS-107 से उड़ान भरी. अंतरिक्ष में 16 दिन बिताने के बाद वह अपने 6 अन्य साथियों के साथ 3 फरवरी 2003 को धरती पर वापस लौट रही थीं. लेकिन उनकी यह यात्रा कभी खत्म ही नहीं हुई.

क्या हुआ था कल्पना के साथ

कल्पना चावला अपने 6 अन्य साथियों के साथ अंतरिक्ष से धरती पर लौट रही थीं. उनका अंतरिक्ष यान कोलंबिया शटल STS-107 धरती से करीब 2 लाख फीट की ऊंचाई पर था और यान की रफ्तार थी करीब 20 हजार किलोमीटर प्रति घंटा. वह धरती से सिर्फ 16 मिनट की दूरी पर थीं. और अगले 16 मिनट में उनका यान अमेरिका के टैक्सास में उतरने वाला था. तभी एक बुरी खबर मिली कि नासा का इस यान से संपर्क टूट गया है. इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते इस अंतरिक्ष यान का मलबा टैक्सास के डैलस इलाके में लगभग 160 किलोमीटर क्षेत्रफल में फैल गया. इस हादसे में कल्पना चावला सहित सातों अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई.

कैसे हुआ था हादसा

वैज्ञानिकों के मुताबिक- जैसे ही कोलंबिया अंतरिक्ष यान ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया, वैसे ही उसकी उष्मारोधी परतें फट गईं और यान का तापमान बढ़ने से उसमें आग लग गई. जिसमें सभी अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई.

मिशन में शामिल थे ये 7 वैज्ञानिक

कोलंबिया शटल यान STS-107 से अंतरिक्ष में 7 वैज्ञानिकों ने उड़ान भरी थी. इनमें मिशन कल्पना चावला के अलावा कमांडर रिक हसबैंड, आइलन रैमन, विलियम मैकोल, लॉरेल क्लार्क, आइलन रैमन, डेविड ब्राउन और माइकल एंडरसन शामिल थे. इस मिशन में आइलन रैमन इजराइल से थे और वे पहले इजराइली वैज्ञानिक थे जिन्हेंने किसी अंतरिक्ष मिशन में भाग लिया था.

First published: 1 February 2018, 15:12 IST
 
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