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यूपी और पंजाब में कांग्रेस ने फिर से पुरानी बोतल में पुरानी शराब पेश की

आकाश बिष्ट | Updated on: 13 June 2016, 23:12 IST
(कैच)

राज्यसभा चुनाव नतीजे आने के एक दिन बाद कांग्रेस ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं कमलनाथ और गुलाम नबी आजाद को क्रमशः पंजाब और उत्तर प्रदेश का अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का प्रभारी बनाया है.

कमलनाथ को हरियाणा का भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. राज्यसभा चुनाव मतदान में कांग्रेस के 14 विधायकों के मत अवैध पाए गए थे जिसकी वजह से पार्टी द्वारा समर्थिक प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा. 

मीडिया खबरों के अनुसार कांग्रेस के एक धड़े ने पार्टी के संग भीतरघात किया. इस सीट पर बीजेपी द्वारा समर्थित प्रत्याशी सुभाष चंद्रा को जीत मिली.

राहुल गांधी के कितने काम के हैं बुजुर्ग कांग्रेसी नेता?

इन नियुक्तियों की घोषणा के कुछ देर बाद ही पंजाब में कांग्रेस के एक धड़े ने इस फैसले की आलोचना शुरू कर दी. इस धड़े के अनुसार सिख दंगों की जांच करने वाले नानावती आयोग ने दंगों में कमलनाथ की छिपी भूमिका मानी थी. 

हालांकि पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस फैसले का स्वागत किया. सिंह ने कहा कि उन्हें पंजाब में एक अनुभवी नेता की जरूरत थी.

नाथ को क्लीन चिट देते हुए सिंह ने कहा कि उनकी 1984 के सिख दंगों में कोई भूमिका नहीं थी. सिंह ने कहा कि जब वो 2010 में अमेरिका दौरे पर गए थे तो उनका नाम भी इसमें घसीटा गया था.

राजनीतिक खमियाजा

पंजाब में विपक्षी दलों ने भी कांग्रेस पर सिख दंगो के आरोपी को राज्य का प्रभारी बनाए जाने को लेकर निशाना साधना शुरू कर चुके हैं.

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने ट्वीट करके कैप्टन अमरिंदर सिंह से पूछा कि क्या उन्होंने कमलनाथ को माफ कर दिया है

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कमलनाथ की नियुक्ति पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, "कैप्टन अमरिंदर को कमलनाथ पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए. क्या वो उन्हें माफ कर चुके हैं?"

आम आदमी पार्टी की राज्य संयोजक सुचा सिंह छोटेपुर ने कहा कि इस फैसले से "कांग्रेस ने सिखों के जख्मों पर नमक रगड़ा है."

बदलाव जरूरी है, कांग्रेस के पास अब वक्त नहीं है

शिरोमणी अकाली दल ने भी इस फैसले के बाद कांग्रेस पर हमला बोला. अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने गांधी परिवार पर सवाल उठाते हुए कहा कि "गांधी परिवार 1984 के दंगों को जिम्मेदार लोगों को महत्वपूर्ण पद देकर उन्हें सम्मानित करता रहा है."

ऐसे में कमलनाथ इन आलोचनाओं से कैसे निपटते हैं ये देखने की बात है. 

बदलाव की वजह

कमलनाथ से पहले शकील अहमद पंजाब और हरियाणा प्रभारी थे. शकील दो महीने की छुट्टी पर हैं. वो अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए कनाडा के दौरे पर है.

राज्यसभा चुनाव ने हरियाणा में कांग्रेस की अंदरूनी दरार को सार्वजनिक कर दिया. राज्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व में पार्टी के एक धड़े ने केंद्रीय नेतृत्व के आईएलएलडी के प्रत्याशी आरके आनंद के समर्थन के फैसले के खिलाफ बगावत कर दी.

पंजाब: जमीनी बदलाव को व्याकुल कांग्रेस

पार्टी के अंदरूनी सदस्यों के अनुसार कमलनाथ की नियुक्ति के पीछे कुछ दूसरे कारण भी हैं.

सूत्रों के अनुसार कमलनाथ मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख बनना चाहते थे. लेकिन इस पद पर राहुल के करीबी अरुण सुभाष चंद्र यादव के होने के कारण कमलनाथ को राज्य से दूर कर दिया गया ताकि यहां भी पार्टी अंदरूनी कलह की शिकार न हो जाए.

यूपी में आजाद

कश्मीरी के पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद को यूपी का प्रभारी बनाया गया है. आजाद राज्यसभा चुनाव में भी यूपी के प्रभारी थे. राज्य में कुछ कांग्रेसी विधायकों की क्रॉस वोटिंग से पार्टी के उम्मीदवार कपिल सिब्बल को झटका लगने की आशंका बन गई थी.

पार्टी के कुछ अंदरूनी सूत्रों के अनुसार पूर्व यूपी प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के बीच मतभेद भी इस बदलाव के पीछे एक कारण है.

मधुसूदन मिस्त्री राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं. मिस्त्री ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के सेंट्रल इलेक्शन कमेटी के प्रमुख और महासचिव बने रहेंगे.

पार्टी सूत्रों के अनुसार आजाद की नियुक्ति मिस्त्री की सलाह लेकर की गई है.

तालमेल की क्षमता

आजाद के चयन के पीछे एक कारण विपक्षियों के संग तालमेल बिठाने की उनकी क्षमता भी है. उन्होंने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और दूसरे राज्यों में विपक्ष दलों के संग उल्लेखनीय साझीदारी की.

कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की मांग की है

कांग्रेस को उम्मीद है कि यूपी में बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए गठजोड़ बनाने में आजाद अहम भूमिका निभा सकते हैं. साथ ही उनके प्रदेश प्रभारी बनाए जाने से अल्पसंख्यक तबके में भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा.

जयराम रमेश: राहुल संभालें कांग्रेस की कमान

आजाद और कमलनाथ की नियुक्ति की आगामी चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस में किए जाने वाले बदलावों की पहली कड़ी माना जा रहा है.

मीडिया में खबरें आई थीं कि राहुल गांधी पार्टी में कुछ नए चेहरों को आगे बढ़ा सकते हैं. लेकिन इन दोनों नेताओं के चयन से मामला इसके उलट ही दिख रहा है.

ऐसा लग रहा है कि पार्टी एक बार फिर अनुभव को युवा चेहरों पर तरजीह दे रही है.

First published: 13 June 2016, 23:12 IST
 
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