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शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को आज कांचीपुरम मठ में दी जाएगी अंतिम विदाई

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 March 2018, 9:08 IST

लम्बी बीमारी के बाद कांची मठ के 69वें प्रमुख शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का निधन हो गया. 82 साल की उम्र में बुधवार यानि 28 फरवरी को तमिलनाडु के कांचीपुरम में उन्होंने अंतिम सांस ली. आज उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य श्री जयेंद्र सरस्वती को गुरुवार को यहां मठ परिसर में उनके पूर्ववर्ती श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती के समाधि स्थल के बगल में समाधि दी जाएगी. 22 मार्च 1954 को चंद्रशेखेन्द्रा सरस्वती स्वामीगल ने जयेंद्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था. उस वक्त वे सिर्फ 19 साल के थे.

 

कई स्कूलों, आंख सहित अन्य अस्पतालों का संचालन करने वाले कांची कामकोटि पीठ की स्थापना पांचवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने की थी.जयेंद्र सरस्वती इसके मौजूदा प्रमुख थे. जयेंद्र सरस्वती कांची कामकोटि पीठ के 69वें मठप्रमुख रहे. वे 1954 में शंकराचार्य बने थे.


कैसे दी जाएगी समाधी
धार्मिक संस्कार सुबह सात बजे अभिषेकम के साथ शुरू हुआ. अभिषेकम के बाद आरती होगी. देश भर से वैदिक पंडित सभी चार वेदों से मंत्रों का उच्चारण करेंगे और एक विशेष पूजन भी किया जाएगा. बाद में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के पार्थिव शरीर को मुख्य हॉल से निकालकर वृंदावन एनेक्सी ले जाया जाएगा जहां श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती को समाधि दी गई थी.

बेंत की एक बड़ी टोकरी में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के पार्थिव शरीर को बैठी हुई मुद्रा में डालकर सात फुट लंबे और सात फुट चौड़े गड्ढे में नीचे उतारा जाएगा. समाधि देने से जुड़ी व्यवस्था से जुड़े मठ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि समाधि देने के लिए गड्ढा तैयार है और पार्थिव शरीर को उसमें नीचे उतारकर उसके ऊपर शालिग्राम रखा जाएगा.

 

गड्ढे को जड़ी बूटी, नमक और चंदन की लकड़ी से भर दिया जाएगा. बाद में कबालमोक्षम किया जाएगा जिसमें सिर पर नारियल रखकर उसे प्रतिकात्मक रूप से तोड़ा जाता है. समाधि संस्कार पूर्वाह्न ग्यारह बजे पूरा हो जाएगा. यहां मठ परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

 

तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम, राज्य के शिक्षा मंत्री के ए सेंगोतैयां एवं अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को श्रद्धांजलि अर्पित की. कांची मठ के मैनेजर सुंदरेशन ने बताया कि बुधवार से लगभग एक लाख लोगों ने शंकराचार्य के अंतिम दर्शन किए. आज आठ बजे से उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. उनके पार्थिव शरीर को सजा कर मठ में ही अंतिम संस्कार किया जाएगा.

कांची मठ दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है. जयेन्द्र सरस्वती के निधन के बाद अब कांची मठ में शंकरा विजयेन्द्र सरस्वती को शंकराचार्य नियुक्त किया जाएगा. विजयेन्द्र सरस्वती कांची मठ के 70वें मठप्रमुख होंगे.

First published: 1 March 2018, 9:08 IST
 
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