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कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का निधन, लगा था ये बड़ा आरोप

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 February 2018, 11:41 IST
( File Photo)

कांचीपुरम मठ के 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का बुधवार को 82 साल की उम्र में तमिलनाडु के कांचीपुरम में निधन हो गया. सांस लेने में तकलीफ की शिकायत करने के बाद उन्हें बुधवार सुबह ही प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली.

पिछले एक साल से उनका स्वास्थ खराब चल रहा है. वो हिंदू धर्म के सबसे बड़े मठ कांची कामकोटि के शंकराचार्य थे. इस पीठ की स्थापना पांचवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने की थी. शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को 22 मार्च, 1954 को श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामिगल का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था.

कांची कामकोटि पीठ कई स्कूलों, नेत्र चिकित्सालयों तथा अस्पतालों का संचालन करता है. साल 1935 में जन्में जयेन्द्र सरस्वती ने साल 1994 में कांची कामाकोटी पीठ के प्रमुख का पद संभाला था. जयेन्द्र सरस्वती की मौत के बाद अब विजयेन्द्र सरस्वती उनका स्थान लेंगे. जयेन्द्र सरस्वती ने अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद में भी शांतिपूर्ण मध्यस्थता की कोशिश की भी थी.

जयेन्द्र सरस्वती का विवादों से भी नाता रहा है. साल 2004 में उन्हें कांचीपुरम वर्दराजन पेरुमल मंदिर के मैनेजर ए. शंकररमन की हत्या में आरोपी बनाया गया था. इसके बाद काफी हंगामा मचा था और उन्हें दो महीने जेल में बिताने पड़े थे. इस मामले में साल 2013 में शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को आरोप मुक्त कर दिया था. 

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First published: 28 February 2018, 11:41 IST
 
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