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कांग्रेसी वकील नहीं कर सकते CJI दीपक मिश्रा की कोर्ट में प्रैक्टिस, बार काउंसिल ने किया बैन

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 April 2018, 15:55 IST

जहां एक तरफ भाजपा के वकील चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की कोर्ट में प्रैक्टिस कर सकते हैं वहीं कांग्रेस के वकील नेता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तंखा को CJI की कोर्ट में प्रैक्टिस करने पर प्रतिबंध लगा दिया है. दरअसल बार काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से नया प्रस्ताव पास किया है जिसके तहत उन सांसदों और विधायकों को ऐसी अदालतों या जजों के सामने आने से रोकेगा, जिनका वह विरोध कर रहे हैं.

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब चीफ जस्टिस के खिलाफ संसद में महाभियोग चलाने की तैयारी की जा रही है. माना जा रहा है कि सोमवार को चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जा सकता है. खबर है कि राज्यसभा में तो प्रस्ताव पेश करने के लिए जरुरी 50 सांसदों में से 40 का समर्थन मिल भी गया है.

 

यह प्रस्ताव 18 मार्च को बार काउंसिल में पास किया गया था, जिसे शनिवार को जारी कर दिया गया. इस प्रस्ताव के बाबत बात करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि हम सांसदों और विधायकों को कोर्ट में प्रैक्टिस से नहीं रोक सकते, लेकिन इसमें कुछ अपवाद भी हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसे वकील, जो सांसद या विधायक भी हैं, अगर वह हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव शुरु करते हैं तो वह उन जजों की अदालतों में प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे. उन्होंने कहा कि बार काउंसिल के अधिकतर सदस्यों का ऐसा मानना है.

 

इससे पहले बार काउंसिल के इस फैसले का कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तंखा ने विरोध किया था. हालांकि बार काउंसिल ने उनके विरोध को यह कहते हुए दरकिनार कर दिया कि वकीलों के पास इसका विरोध करने का अधिकार नहीं है.

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बता दें कि भाजपा नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. इस याचिका में सांसद और विधायक वकीलों को प्रैक्टिस के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट इसी याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

First published: 1 April 2018, 15:47 IST
 
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