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पाकिस्तान ने भारत के इस सपूत के साथ दर्रिंदगी की सारी हदें कर दी थी पार, हत्या करने से पहले काट दिया था प्राइवेट पार्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 July 2019, 15:11 IST

अमृतसर के लाल कैप्टन सौरभ कालिया को कारगिल युद्ध का पहला शहीद माना जाता है. मात्र 22 साल की उम्र में सौरभ कालिया ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. पाकिस्तान आर्मी ने कारगिल युद्ध के दौरान उन्हें बंदी बना लिया था, जिसके बाद उन्हें काफी बुरी तरह से प्रताड़ित किया जाने लगा. इसके बाद उनकी पाकिस्तानी आर्मी द्वारा हत्या कर दी गई थी.

 

पेट्रोलिंग के समय बना लिया बंदी

कारगिल युद्ध के समय की घटना के बारे में बताया जाता है कि जब कैप्टन सौरभ अपने पांच साथियों के साथ गश्त लगा रहे थे, तो इसी दौरान पाकिस्तानी आर्मी द्वारा उन्हें बंदी बना लिया गया. पाकिस्तान की कैद में कैप्टन सौरभ को कई तरह की यातनाएं दीं गई.

सौरभ कालिया इंडियन आर्मी के ऐसे पहले अधिकारी थे, जिन्होंने पहली बार LoC पर पाकिस्तानी घुसपैठ करने की जानकारी दी थी. कैप्टन को रॉड से मारा जाता था, इसके साथ ही उनकी आंखें फोड़ दी गयी थीं. इतना ही नहीं पाकिस्तान ने अपनी सभी यातानाओं की हद पार करते हुए कैप्टन सौरभ के प्राइवेट पार्ट को काट दिया गया था. इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी. उनके बंदी बनाए जाने की सूचना पाक अधिकृत कश्मीर के एक रेडियो द्वारा दी गई थी.

कुछ महत्वपूर्ण बातें-

सौरभ कालिया का जन्म 29 जून 1976 को अमृतसर में हुआ था. अगस्त 1997 में सौरभ कालिया का संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा में चयन हुआ था. ट्रेनिंग के बाद 12 दिसंबर 1998 को उन्हे भारतीय थलसेना में कमीशन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था.

First published: 25 July 2019, 15:11 IST
 
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