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कारगिल विजय दिवस के 21 साल पूरे होने पर आपको जाननी चाहिए ये 10 चौंकाने वाली बातें

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 July 2020, 12:55 IST

Kargil Vijay Diwas 2020: 26 जुलाई को देशभर में कारगिल युद्ध के दौरान जीत की याद में विजय दिवस की 21वीं सालगिरह मनाई जा रही है. 3 मई 1999 को पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों के साथ भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर कब्जा कर लिया था. इसके बाद कारगिल युद्ध की शुरुआत हुई थी.

पाकिस्तानी सेना ने कारगिल और द्रास की पहाड़ियों पर कब्जा करने की कोशिश की थी. जिस इलाके में घुसपैठ हुई, वह लद्दाख को जम्मू-कश्मीर के उत्तरी इलाके से अलग करता है. इस युद्ध के दौरान कुछ ऐसी चौंकाने वाली घटनाएं घटी थीं, जो आपको जरूर जाननी चाहिए. आप भी जानिए एक नजर करगिल युद्ध से जुड़े हुए दस राज़- 

1. कारगिल युद्ध दुनिया के सबसे ऊंचे क्षेत्रों में लड़े गए युद्ध में शामिल है. इस दौरान भारतीय सेना के 527 जवान शहीद हुए थे, जबकि 1363 जख्मी हुए थे. कारगिल युद्ध को भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय नाम दिया था. इसका जिम्मा करीब दो लाख सैनिकों को सौंपा गया था. इस दौरान मुख्य युद्ध क्षेत्र करगिल-द्रास सेक्टर में 30 हजार के आस-पास सैनिक मौजूद थे.

 2. भारतीय सेना द्वारा मारे गए घुसपैठियों की जब तलाशी ली गई थी, तो उनके पास से पाकिस्तानी पहचान पत्र मिले थे. कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की तरफ से मारे गए  ज्यादातर जवान  नॉर्दर्न लाइट इंफैंट्री के थे. यह पहले एक अर्धसैनिक बल था, लेकिन 1999 के कारगिल युद्ध के इसे पाकिस्तान की नियमित रेजीमेंट में बदल दिया गया.
3. कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना ने मिग-27 और मिग-29 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया था. इस युद्ध में मिग-27 की मदद से जिन स्थानों पर पाक सैनिकों ने कब्जा जमा लिया था, वहां बम गिराए गए थे. मिग-29 कारगिल में बेहद अहम साबित हुआ था. इससे कई ठिकानों पर आर-77 मिसाइलें दागी गई थीं.
4. करगिल युद्ध में तोपखाने से 2 लाख 50 हजार गोले और रॉकेट दागे गए थे. इस दौरान 300 से ज्यादा तोपों, मोर्टार तथा रॉकेट लॉन्चर्स से रोज करीब 5,000 गोले फायर किए थे. आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि लड़ाई के महत्वपूर्ण 17 दिनों में हर आर्टिलरी बैटरी से रोजाना औसतन एक मिनट में एक राउंड फायर किया गया था.
 
5. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली ऐसी लड़ाई मानी जाती है, जिसमें किसी एक देश ने दुश्मन देश की सेना पर इतनी ज्यादा बमबारी की. इस युद्ध में पाकिस्तान के 357 सैनिक मारे गए थे, लेकिन अपुष्ट आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय सेना ने तीन हजार से ज्यादा पाक सैनिकों को मौत के घाट उतारा था. भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों और मुजाहिदीनों के रूप में पहाड़ियों पर कब्जा जमाए आतंकियों को परास्त किया था. 
6. पाकिस्तान के उर्दू डेली मेल में छपे एक रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस बात को माना था कि कारगिल युद्ध पाकिस्तान के लिए एक आपदा साबित हुआ था. उन्होंने माना था कि इस युद्ध ने 2700 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक खो दिए थे. पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाकों में करीब 30,000 लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे. इस दौरान भा रतीय इलाकों में भी करीब 20,000 लोगों पर असर पड़ा था.
 
7. कारगिल में लड़ाई शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले जनरल परवेज मुशर्रफ ने एक हेलीकॉप्टर से नियंत्रण रेखा पार की थी. वह भारतीय भूभाग में करीब 11 किमी अंदर आए थे और एक स्थान पर रात भी बिताई थी. उनके साथ 80 ब्रिगेड के तत्कालीन कमांडर ब्रिगेडियर मसूद असलम भी थे. रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ने जिकरिया मुस्तकार नामक स्थान पर रात गुजारी थी.
8. साल 1998 में पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों का परीक्षण किया था. कुछ लोगों का मानना है कि  कारगिल लड़ाई उम्मीद से ज्यादा खतरनाक थी. मुशर्रफ ने परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की तैयारी कर ली थी. कारगिल युद्ध को पाकिस्तान 1998 से अंजाम देने की फिराक में था. पाक सेना ने अपने 5000 जवानों को कारगिल पर चढ़ाई करने के लिए भेजा था.
 
9. पाकिस्तानी एयर फोर्स के चीफ को कारगिल की लड़ाई की खबर पहले नहीं दी गई थी. जब इस बारे में पाकिस्तानी एयर फोर्स के चीफ को बताया गया, तो उन्होंने इस मिशन में आर्मी का साथ देने से मना कर दिया था.
 
10. 3 मई को कारगिल युद्ध शुरू होने के बाद 11 मई से भारतीय वायुसेना की टुकड़ी ने इंडियन आर्मी की मदद करना शुरू कर दिया था. इस युद्ध में भारतीय वायुसेना के करीब 300 विमान उड़ान भरते थे. कारगिल की ऊंचाई समुद्र तल से 16000 से 18000 फीट है. भारतीय वायुसेना के विमानों को करीब 20,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ना पड़ता था. ऐसी ऊंचाई पर हवा का घनत्व 30 फीसदी से कम होता है. इन हालात में पायलट का दम विमान के अंदर ही घुट सकता है.
 

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First published: 24 July 2020, 11:59 IST
 
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