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दलित बनाम सवर्ण: हरियाणा में घुड़चढ़ी प्रथा पर राजपूतों की दबंगई, दलितों में गुस्सा

राजीव खन्ना | Updated on: 9 March 2017, 11:58 IST

करनाल के सग्गा गांव के दलित आंदोलन पर उतर आए हैं और इससे एक बार फिर इस जाति के दमन का मामला गरमा गया है. करीब 300 से ज्यादा दलित पुरुषों, महिलाओं व बच्चों ने मिनी सचिवालय के सामने अपने खिलाफ हो रहे अत्याचारों के विरोध में प्रदर्शन किया. इस बार भी विरोध का कारण ऊंची जाति, खास तौर पर राजपूतों द्वारा एक दलित दूल्हे को घोड़ी पर नहीं चढ़ने देने को लेकर है. इस रिवाज के अनुसार शादी के दिन दूल्हा घोड़ी पर चढ़ कर गांव भर के सारे मंदिरों में जाता है.

रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार को सग्गा गांव के लोगों ने इस गांव के दलित युवक सोम्बिर को घुड़चढ़ी की प्रथा पूरी नहीं करने दी. उन्होंने डीजे की धुन पर दलित मेहमानों के बारात में डांस करने पर भी आपत्ति जताई. वे चाहते थे कि दलित घुड़चढ़ी की रस्म न करें और दूल्हे को घोड़ी पर बिठाए बिना व बारात के बिना ही शांति से शादी संपन्न करवाएं.

बात इतनी ही नहीं थी. मामले ने उस वक्त गंभीर मोड़ ले लिया जब दलितों ने उच्च जाति के इस रवैये पर विरोध जताते हुए प्रदर्शन किया और यह प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गया. दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर पथराव किया. बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद सामान्य स्थिति बहाल की जा सकी. लेकिन फिलहाल वहां हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.

घटना के बाद यहां ‘अल्पसंख्यक माने जाने वाले’ दलितों ने जिला मुख्यालय तक जुलूस निकाला और मिनि सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. वे अपने साथ हुई ज्यादती के जिम्मेदार उच्च जाति के लोगों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं और अपने लिए सुरक्षा की. अपने गांव जाने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा, गांव में वे स्वयं को सुरक्षित नहीं पा रहे. इसलिए उनका पुनर्वास कर दिया जाए.

प्रशासन ने उन्हें आश्वासन दिया कि आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा और उन्हें पर्याप्त सुविधा प्रदान की जाएगी. उसके बावजूद दलित नहीं हटे और उनका विरोध प्रदर्शन मंगलवार तक जारी रहा. पुलिस ने इस संबंध में कथित तौर पर 42 लोगों को गिरफ्तार किया है. किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.

जातिवादी परंपरा

उच्च जाति द्वारा दलितों को घुड़चढ़ी की रस्म न करने देने की परम्परा सी बन गई है. इन घटनाओं की खबर तो तब बनती है, जब कोई हिंसक घटना घटित हो जाती है. वरना दलितों पर ऐसा अत्याचार आम है, जिसकी कोई खबर नहीं बनती और न ही रिपोर्ट दर्ज होती है.

बीते वर्ष जब कुरुक्षेत्र के गांव भुष्ठला में संदीप नाम के दलित युवा को इसी तरह घुड़चढ़ी की रस्म नहीं करने दी गई तो वह पुलिस तक पहुंच गया और उसने रिपोर्ट दर्ज करवा दी. दोषी युवाओं में ज्यादातर उसके बचपन के साथी थे. संदीप को पुलिस में रिपोर्ट करना भारी पड़ गया. उसका नतीजा वह आज तक भुगत रहा है. उसे समाज के उच्च वर्ग के लोग नौकरी पर भी नहीं रखते.

राजपूत तो खुले आम यह कहते हैं कि अगर वाल्मिकि और अन्य दलितों को घुड़चढ़ी की रस्म नहीं करने देंगे क्योंकि यह एक तरह से हमारे लिए शर्म की बात है. संदीप ने कैच न्यूज को बताया ‘‘उच्च जाति के लोग मानते हैं कि हम घोड़ी नहीं चढ़ सकते. जब से मैंने इन लोगों के खिलाफ अदालत में मामला दर्ज करवाया है तब से मुझे गांव में लोगों से झिड़कियां मिलती रहती हैं.’’ संदीप की पत्नी राजनति विज्ञान में स्नातकोत्तर हैं लेकिन वह भी डर के कारण घर से बाहर नहीं निकलती.’

उन्होंने कहा, हालांकि 2007 से हालात कुछ बदले हैं. क्षेत्र में उच्च जाति के लोगों ने दलितों को घुडचढ़ी की इजाजत दे दी है. लेकिन दूल्हे के परिजनों को इसके लिए अनुमति लेनी होगी और माफी भी माननी होगी. उन्होंने कहा, हरियाणा के दलितों के पास न जमीन है और न ही संसाधन. वे रोजगार के लिए उच्च जाति पर ही निर्भर हैं. इसी वजह से ये उच्च जाति द्वारा किए जा रहे अत्याचार व अमानवीय कृत्य के खिलाफ शिकायत नहीं करते.

सग्गा गांव में हुई घटना पर विरोध जताते हुए जन संघर्ष मंच (जेएसएम) हरियाणा के फूल सिंह गौतम कहते हैं कि सरकार को इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम आंदोलन करेंगे. सदियों से दलितों के साथ हो रहे अत्याचार बंद होने चाहिए. जेएसएम हरियाणा ने सग्गा गांव के लिए अपनी एक टीम भेजी है.

मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाने के वक्त सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले घटना स्थल पर पहुंच गए थे, जहां दलित डेरा डाले हुए थे. दूसरी ओर दलित प्रतिनिधियों व प्रशासन के बीच वार्ता चल रही है.

क्या कर रहे हैं खट्टर

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर ने बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी व विधायक भगवानदास कबीरपंथी को सग्गा गांव भेजा है, ताकि वे वहां के स्थानीय लोगों को समझा बुझा कर तनाव कम कर सकें. वे विधानसभा में शून्यकाल में कांग्रेस विधायक कुलदीप शर्मा द्वारा सग्गा से अनुसूचित जाति के लोगों द्वारा पलायन पर पूछे गए एक प्रश्न का जवाब दे रहे थे. खट्टर का कहना है कि राज्य सरकार सग्गा गांव में सामान्य हालात बहाली के लिए कार्य कर रही है. उन्होंने कहा, जब कभी अनुसूचित जाति के साथ ऐसी घटना घटती है तो दिल्ली से उत्तर प्रदेश तक उस घटना का रजनीतिकरण हो जाता है.

उन्होंने कहा, पहले दोनों ही पक्ष मामले को सुलझाने को तैयार थे. लेकिन जानकारी मिली है कि कुछ अन्य लोग चाहते हैं कि पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार ही कार्रवाई हो.मुख्यमंत्री ने कहा, सरकार मामले को सुलझाने का प्रयास कर रही है. अगर सरकार इसमें विफल रही तो पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार कर्रवाई की जाएगी. करनाल के उपायुक्त ने भी इस मामले को सुलझाने के लिए एक समिति गठित की है.

First published: 9 March 2017, 7:45 IST
 
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