Home » इंडिया » karnataka assembly elections: Shocking for BJP 30 lingayat priests support congress in election
 

कर्नाटक चुनाव: BJP को बड़ा झटका, 220 लिंगायत मठों ने किया कांग्रेस के समर्थन का ऐलान

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 April 2018, 10:59 IST

कर्नाटक में 12 मई को राज्य विधानसभा के चुनाव होने हैं. लेकिन चुनाव से पहले बीजेपी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. चुनाव से पहले कांग्रेसी मुख्यमंत्री द्वारा लिंगायत धर्म को मान्यता देने का दांव कामयाब होता दिख रहा है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक शनिवार को लिंगायत समुदाय के 30 प्रभावशाली धर्मगुरुओं ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के समर्थन का ऐलान किया है.

लिंगायत समाज के मठाधीशों की सबसे बड़ी संस्था 'फ़ोरम ऑफ़ लिंगायत महाधिपति' ने शनिवार को आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में उनका समाज कांग्रेस का समर्थन करेगा. बंगलुरु में आयोजित महाधिपतियों की सभा में जगतगुरु माते महादेवी ने इस बात की घोषणा करते हुए कहा कि लिंगायत को वही दर्जा मिलेगा जो सिख और जैन धर्मालंबियों को मिल रहा है.

माते महादेवी ने कहा, सिद्दारमैया ने हमारी मांग का समर्थन किया है. हम उनका समर्थन करेंगे. महादेवी का उत्तरी कर्नाटक में काफी प्रभाव है. सबसे पहले ये मामला लिंगायत समुदाय के एक अन्य धड़े ने उठाया था जिसे वीरशैव लिंगायत कहते हैं. इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जस्टिस नागमोहन दास के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था.

ऐसे 220 मठों के मठाधीशों ने बैठक में इस चुनाव में कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया है. लिंगायत समाज का यह फैसला बीजेपी के लिए बड़ी मुश्किल लाया है. बता दें कि हाल ही में अमित शाह ने कुछ संतों से बात करते हुए ये कहा था कि जब तक केंद्र में बीजेपी की सरकार है तब तक कांग्रेस सरकार के इस फैसले को लागू नहीं होने दिया जाएगा.

अमित शाह के इस बयान से नाराज उन 220 मठों के मठाधीशों ने बेंगलुरु के बसव भवन में एक बैठक की. इस बैठक में चित्रादुर्गा के प्रसिद्ध मुरुगा मठ के मठाधीश मुरुगा राजेन्द्र स्वामी, बसव पीठ की प्रमुख माता महादेवी, सुत्तुर मठ सहित 220 मठों के मठाधीशों ने हिस्सा लिया.

सभी ने चर्चा के बाद एक मत से ये फैसला लिया कि वो अमित शाह के बयान से बेहद आहत हुए हैं, केन्द्र सरकार के फैसले से पहले ही पार्टी के अध्यक्ष ने ये बता दिया है कि पार्टी इस मसले पर पार्टी का स्टैण्ड क्या है ऐसे में ये फैसला लिया गया है कि सीएम सिद्धरामैया ने उनकी बात मानी, उनकी मदद की. इसीलिये, इस बार चुनाव में सिद्धरामैया को ही इन मठों का समर्थन मिलेगा.

इससे पहले अमित शाह ने वीरशैवा धर्मगुरुओं से मुलाक़ात की थी और उन्हें ये सुनिश्चित किया था कि केंद्र कर्नाटक को कांग्रेस सरकार के इस फैसले को खारिज करेगी. बतादें, कि लिंगायतों में वीरशैवा भी आते है जो कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के फैसले के विरोध में है.

पढ़ें- CBSE पेपर लीक मामले में पुलिस ने हिमाचल से टीचर समेत 3 गिरफ्तार

गौरतलब है कि लिंगायत समुदाय भाजपा का परंपरागत वोटर रहा है. कर्नाटक में बीजेपी के एकमात्र मुख्यमंत्री रह चुके बीएस येदियुरप्पा भी लिंगायत समुदाय से आते हैं. भाजपा ने इस बार भी उन्हें ही मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है. इसके बावजूद भी लिंगायत धर्मगुरुओं द्वारा कांग्रेस को समर्थन का ऐलान करना बीजेपी के लिए बड़ा झटका है.

लिंगायत समुदाय का भाजपा को 90 के दशक से ही समर्थन मिलता आ रहा है. राज्य की 224 विधानसभा सीटों में से 100 से अधिक सीटों पर इस समुदाय का बड़ा प्रभाव है. कर्नाटक में लिंगायत समुदाय के लोगों की संख्या करीब 18 प्रतिशत है.

First published: 8 April 2018, 9:46 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी