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इस वजह से BJP नेतृत्व ने येदियुरप्पा का दिलवाया इस्तीफा, RSS की बड़ी भूमिका!

आदित्य साहू | Updated on: 20 May 2018, 12:46 IST

कर्नाटक विधानसभा में शनिवार (19 मई) को विश्वास मत साबित करने से पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया. इसके साथ ही उनकी तीन दिन पुरानी सरकार गिर गई. इस्तीफा देने से पहले उन्होंने एक भावुक भाषण भी दिया. अपने भाषण में उन्होंने कहा, "मैं विश्‍वास मत का समाना नहीं करूंगा, मैं इस्‍तीफा देने जा रहा हूं."

इससे पहले वह लगातार यही कह रहे थे कि वह अपना बहुमत साबित कर लेंगे. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी उन्होंने यही कहा था कि वह सौ फीसदी अपना बहुमत साबित करेेंगे. यहां तक कि दिल्ली से आए बीजेपी के बड़े नेता प्रकाश जावड़ेकर और अनंत कुमार भी लगातार यही कहते रहे कि येदियुरप्पा अपना बहुमत साबित करेंगे.

हालांकि इस बीच लगातार खबरें आती रहीं कि बीजेपी विधायकों के खरीद-फरोख्त की कोशिश कर रही है. यहां तक कि येदियुरप्पा के बेटे पर भी कांग्रेस के दों विधायकों को बंधक बनाकर रखने का आरोप लगा. इसके अलावा कांग्रेस ने तीन ऑडियो टेप जारी कर भी भाजपा पर उनके विधायकों और उनकी पत्नियों को ल़ालच देने और धमकाने का आरोप लगाया.

लेकिन अचानक फ्लोर टेस्ट से एक घंटे पहले गायब हुए कांग्रेस के दोनों विधायक सामने आ गए. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उन दो विधायकों को बीजेपी विधायक सोमशेखर रेड्डी जो कि खुद ही गायब हैं, के द्वारा बंधक बनाकर रखा गया था. इसके बाद काफी नाटकीय ढंग से येदियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया और उनकी सरकार का पतन हो गया.

इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. लोगों का कहना है कि विधायकों का जुगाड़ न हो पाने की वजह से बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने उनसे इस्तीफा दिलवा दिया. दरअसल, अगले साल देश में लोकसभा चुनाव है इससे पहले पार्टी की छवि पर शीर्ष नेतृत्व कोई दाग नहीं चाहता है.

कहीं न कहीं शीर्ष नेतृत्व को पहले से पता था कि विधायकों का जुगाड़ नहींं हो पाएगा. तभी तो इतने बड़े और महत्वपूर्ण राज्य में न तो पीएम मोदी और न अमित शाह मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए. जबकि बीजेपी के कई छोटे राज्यों को जीतने के बाद भी अमित शाह या मोदी शपथ ग्रहण में जरूर शामिल होते रहे हैं.

यहां तक कि सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी नहीं चाहता था कि बीजेपी की छवि पर कोई दाग आए. आरएसएस तो यह भी नहीं चाहता था कि येदियुरप्पा सरकार बनाने के लिए राज्यपाल से मिलें. लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जिद के चलते आरएसएस को हाथ पीछे खींचना पड़ा था. जाहिर सी बात है कि अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा को ऐसे-ऐसे राज्यों में जीत हासिल हुई है जिसे उनके नेतृत्व के पहले भाजपा सपने में भी नहींं सोच सकती थी.

पार्टी जानती थी कि येदियुरप्‍पा जरूरी संख्‍या नहीं जुटा पाएंगे, और इन परिस्थितियों में वह विश्‍वात मत जीतने के प्रति लगातार निराश हो रही थी और कम से कम नैतिक स्‍तर पर खुद को बचाए रखना चाहती थी.

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माना जा रहा है कि शनिवार सुबह ही येदियुरप्‍पा के पास शीर्ष नेेतृत्व से यह संदेश पहुंचा था कि आप इस्तीफा दे दें. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रोटेम स्पीकर की सुनवाई के दौरान कहा था कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने का सबसे अच्‍छा तरीका है लाइव स्‍ट्रीमिंग कराई जाए. इसके बाद ही विश्‍वास मत से ठीक पहले इस्‍तीफे और भावुक भाषण की बात हो गई थी.

First published: 20 May 2018, 12:39 IST
 
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