Home » इंडिया » Karnataka: bjp mla kg bopaiah as the pro tem speaker in assembly
 

कर्नाटक: येदियुरप्पा सरकार बचाने के लिए प्रोेटेम स्पीकर करेंगे इन ताकतों का इस्तेमाल!

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 May 2018, 9:57 IST

कर्नाटक के राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद येदियुरप्पा को आज शाम चार बजे तक फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करना होगा. बहुमत परीक्षण के लिए कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने भारतीय जनता पार्टी के विधायक केजी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाया है.

इस बात को लेकर कांग्रेस नेता विरोध कर रहे हैं. इसके लेकर कांग्रेस और जेडीएस ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दोनों दलों ने प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के फैसले को चुनौती दी है. कांग्रेस ने इसे नियम विरूद्ध बताया है. दोनों दलों ने सुप्रीम कोर्ट से इस पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी. जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट आज सुबह 10.30 पर सुनवाई करेगा.

 

आखिर ऐसा क्या है कि कांग्रेस प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने वाले केजी बोपैया का विरोध कर रही है. दरअसल इससे पहले प्रोटेम स्पीकर के लिए कांग्रेस के विधायक रघुनाथ विश्वनाथ देशपांडे का नाम था. रघुनाथ विश्वनाथ देशपांडे सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं और बोपैया सिर्फ तीन बार बीजेपी के टिकट पर विधायक रह चुके हैं. 

दूसरी जो सबसे बड़ी बात है कांग्रेस को आशंका है कि येदियुरप्पा द्वारा विधानसभा में पेश किए जाने वाले विश्वास प्रस्ताव को बोपैया ध्वनि मत से पारित करने के बाद बिना मतदान कराए विधानसभा को स्थगित कर देंगे. इसके बाद कोर्ट में इसे चुनौती देने और फैसला आने में समय लगेगा. जिसके बाद भाजपा को बहुमत जुटाने का पर्याप्त समय मिल जाएगा.

पढ़ें- कर्नाटक: केजी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है कांग्रेस

दरअसल, साल 1990 में ऐसा एक बार हो चुका है जब स्पीकर ने एक पार्टी की मदद की थी. तब केंद्र की वीपी सिंह सरकार के गिरने के बाद कांग्रेस की मदद से चंद्रशेखर की सरकार बनी तो उसमें तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष शिवराज पाटिल ने अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने जनता दल से निष्कासित सांसदों को अलग दल का दर्जा देकर कांग्रेस की मदद कर दी थी. उन्होंने ही स्प्लिट विदइन स्प्लिट (यानी विभाजन कर बने नए दल के अंदर एक और विभाजन) का नया तरीका निकाला था.

दो साल पहले उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कांग्रेस के नौ विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया. हालांकि उन्होंने न तो पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया था और न ही पार्टी छोड़ी थी. दरअसल कांग्रेस को संदेह था कि वे विधायक तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ भाजपा द्वारा लाए अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर सकते हैं. 

First published: 19 May 2018, 9:52 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी