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कर्नाटक बहुमत परीक्षण: कहीं येदियुरप्पा का हाल जगदबिंका पाल जैसा तो नहीं हो जाएगा

आदित्य साहू | Updated on: 18 May 2018, 15:42 IST

साल 1998 को फरवरी महीने की 21 और 22 की तारीख भारतीय राजनीति के इतिहास में वह दिन है जिसने एक 'अभूतपूर्व मुख्यमंत्री' को जन्म दिया था. यूपी के इस अभूतपूर्व मुख्यमंत्री का नाम था जगदंबिका पाल. तब राज्य के तत्कालीन गवर्नर रोमेश भंडारी ने भाजपा के कल्याण सिंह को बर्खास्त कर जगदंबिका पाल को मुख्यमंत्री बना दिया था.

दरअसल, 21-22 फरवरी रात गवर्नर रोमेश भंडारी ने राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की. वजह थी दल-बदल की वजह से बहुमत साबित करने के दौरान यूपी विधानसभा में जमकर मारपीट. इसे देखते हुए गवर्नर भंडारी ने यूपी में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी थी. लेकिन केंद्र सरकार ने इससे इंकार कर दिया था. 

इसके बाद कल्याण सिंह ने बाहर से आए विधायकों को मंत्री बना कर देश के इतिहास में यूपी का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल बना दिया. इसमें 93 मंत्री रखे गए. इससे नाराज होकर दूसरे राजनीतिक दलों ने कल्याण सरकार का तख्ता पलट करने की योजना बना ली थी. राज्यपाल भंडारी ने बीएसपी से आए विधायकों के सपोर्ट को मान्यता देने से इंकार कर दिया था. इसके बाद गवर्नर ने रातों-रात कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त कर दिया था और जगदंबिका पाल को सीएम पद की शपथ दिलवा दी. लेकिन यह सरकार एक दिन भी टिक नहीं सकी थी.

गवर्नर के इस फैसले के खिलाफ भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी अनशन पर बैठ गए थे. वहीं, कल्याण सिंह के समर्थक हाईकोर्ट पहुंच गए. हाईकोर्ट ने गवर्नर के फैसले पर रोक लगा दी थी और कल्याण सिंह की सरकार को बहाल कर दिया था. उस दिन सीएम ऑफिस में दो सीएम को पहुंचना था. सभी लोग सुबह से ही इसका इंतजार कर रहे थे. सबसे पहले जगदंबिका पाल सीएम ऑफिस पहुंचे. इसके बाद कल्याण सिंह भी वहां पहुंच गए.

इसे देखकर सचिवालय कर्मियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी. घबराए जगदंबिका पाल ने गृह मंत्रालय को फोन करके अपनी जान का खतरा भी बताया था. इस बीच वह सीएम की कुर्सी पर बैठे हुए थे, तभी उनके पास हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी पहुंची. इसके बाद उन्होंने सीएम ऑफिस छोड़ दिया और वहां से निकल गए थे.

इसके बाद भी ड्रामा खत्म नहीं हुआ था. जगदंबिका पाल के इस्तीफे के बाद फिर विधानसभा में कल्याण सिंह को चुनौती मिली. उस दिन यूपी विधानसभा में अजब चीज देखने को मिली. विधानसभा अध्यक्ष केसरीनाथ त्रिपाठी के अगल-बगल यूपी के दो मुख्यमंत्री बैठे हुए थे. एक तरफ कल्याण सिंह तो एक तरफ जगदंबिका पाल़. इस दौरान विधायक अपनी पसंद के सीएम के लिए वोट कर रहे थे. कल्याण सिंह को आसानी से बहुमत हासिल हो गया जिसके बाद 23 फरवरी को हाई कोर्ट ने कल्याण सिंह सरकार को दोबारा राज्य की जिम्मेदारी सौंप दी.

सबसे रोचक बात यह है कि हाई कोर्ट ने जगदंबिका पाल को पूर्व सीएम तक नहीं माना. हालांकि इसके बावजूद पाल ने ऑफिशियल काम काज से जुड़े तमाम कागज़ात पर खुद को पू्र्व सीएम लिखवा रखा है. उन्होंने लखनऊ स्थित अपने बंगले के बाहर भी पू्र्व सीएम की प्लेट लगवा रखी है.

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लगभग ऐसा ही हाल कर्नाटक में देखने को मिल रहा है. यदि कल शाम 4 बजे बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए तो उन्हें सत्ता गंवानी पड़ेगी. अगर वह ऐसा नहीं कर पाए तो यूपी की 20 साल पहले की कहानी कर्नाटक में दोहराई जा सकती है. अगर येदुरप्पा बहुमत साबित नहीं कर पाते हैं तो 2013 के बाद ये पहला मौका होगा जब बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह तमाम जोड़-तोड़ के बावजूद किसी विधानसभा चुनाव के नतीजों को अपने पाले में करने में असफल साबित होंगे.

First published: 18 May 2018, 15:19 IST
 
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