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नास्तिक हैं सिद्धारमैया, CM बनने के बाद ईश्वर की जगह ली थी सच्चाई की शपथ

आदित्य साहू | Updated on: 13 May 2018, 16:11 IST

कर्नाटक विधानसभा चुनावों के लिए 12 मई को मतदान हुए हैं. अब इंतजार 15 मई को आने वाले नतीजों का है. इस बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक बड़ा बयान दिया है. सिद्धारमैया ने कहा है कि वह एक दलित के लिए अपनी सीएम पद की दावेदारी छोड़ने को तैयार है.

गौरतलब है कि राजनीति में ऐसा बहुत कम ही देखा गया है कि एक मुख्यमंत्री किसी और के लिए अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार है. जबकि मतदान के बाद कई चैनलों के एग्जिट पोल में कांग्रेस की सत्ता वापस आती दिख रही है. अब तो चुनाव प्रचार भी खत्म हो गए हैं, नहीं तो कहा जाता कि जनता को लुभाने के लिए उन्होंने ऐसा बयान दिया है.

कभी सिद्धारमैया कांग्रेस पार्टी के धुर विरोधी हुआ करते थे. लेकिन आज वह कांग्रेस पार्टी की तरफ से कर्नाटक के सीएम पद के उम्मीदवार हैं साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री भी. इसके साथ ही उनका एक और बयान आया था कि यह उनका आखिरी चुनाव है, अब वह चुनाव नहीं लडेंगे. सिद्धारमैया का यह बयान कई मायनों में अहम है. फिलहाल सिद्धारमैया को जीतना कर्नाटक में इतना आसान नहीं है.

आप भी जानिए कौन हैं सिद्धारमैया?
एक जमाना था जब सिद्धारमैया कांग्रेस पार्टी के मुखर विरोधी थे. साल 1980 में वह पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर से जुड़े और 2005 तक उनकी पार्टी में रहे. जेडी(एस) की सरकार में वह दो बार कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री रहे. इसके अलावा वह वित्तमंत्री भी रहे और उन्होंने सात बार राज्य का बजट पेश किया.

जनता दल सेक्युलर की सरकार में रहने के दौरान सिद्धारमैया पिछड़े वर्ग के बड़े नेता के रूप में पहचाने जाने लगे थे. पार्टी के अलावा पिछड़ा समुदाय में उनकी खूब पैठ बन रही थी. तभी जेडी(एस) में देवगौड़ा के बेटे एच.डी. कुमारस्वामी का नेतृत्व उभरने लगा और 2005 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया.

इसके बाद वह काफी टाइम तक राजनीति से दूर रहे. जेडी(एस) से बाहर आने के बाद बीजेपी और कांग्रेस ने उन्हें अपने दल में खींचना शुरू कर दिया. हालांकि बीजेपी की विचारधारा से सहमति न रखने की वजह से उन्होंने कांग्रेस में जाने का निश्चय किया. साल 2013 में कांग्रेस की ही सरकार में उन्हें मुख्यमंत्री का पद मिला. 13 मई 2013 को उन्होंने राज्य के 22 वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की.

इस शपथ ग्रहण में जो सबसे अलग बात देखने को मिली थी वह थी सिद्धारमैया के शपथ लेने का अंदाज. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दौरान ईश्वर की जगह उन्होंने सच्चाई के नाम पर शपथ ली थी. वह डॉक्टर राम मनोहर लोहिया की विचारधारा से काफी प्रभावित रहे हैं. बता दें कि सिद्धारमैया का जन्म साल 1948 में मैसूर जिले कि सिद्दरामहुंडी गांव में हुआ था. उन्होंने मैसूर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद यहीं से लॉ का कोर्स किया है.

इस चुनाव में सिद्धारमैया चामुंजेश्वरी के अलावा बादामी सीट से भी मैदान में हैं. इससे पहले वह पांच बार वरुणा विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं. वरुणा से उन्होंने अपने बेटे यतींद्र को मैदान में उतारा है.

First published: 13 May 2018, 16:11 IST
 
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