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कर्नाटक: पहले भी येदियुरप्पा के 'हनुमान' साबित हो चुके हैं केजी बोपैया

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 May 2018, 12:57 IST

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के राज्यपाल द्वारा नियुक्त किए गए प्रोटेम स्पीकर को हटाने की कांग्रेस की मांग को ठुकरा दिया. बता दें कि कर्नाटक के राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद येदियुरप्पा को आज शाम चार बजे तक फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करना होगा. बहुमत परीक्षण के लिए कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला ने भारतीय जनता पार्टी के विधायक केजी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर बनाया है.

इस बात को लेकर कांग्रेस नेता विरोध कर रहे थे. कांग्रेस ने इसे नियम विरूद्ध बताया था. कांग्रेस और जेडीएस ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरकरार रखा है. आपको बता दें कि केजी बोपैया ऐसा नाम हैं जो पहले भी बीएस येदियुरप्पा के लिए हनुमान साबित हो चुके हैं. वो येदियुरप्पा के नजदीकी माने जाते हैं.

 

बता दें कि बोपैया साल 2009 से 2013 तक बीजेपी सरकार में कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर रह चुके हैं. अवैध खनन मामले में 12 अक्टूबर 2010 को जब बीजेपी के विधायक सदन के अंदर अपनी ही सरकार का विरोध कर रहे थे, तब बतौर स्पीकर बोपैया ने 11 बागी विधायकों और 5 निर्दलीय विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था. इस फैसले से येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार बच गई थी.

इससे पहले साल 2008 में भी वह प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किये जा चुके हैं. सरकार बनाने को लेकर जो खींचतान आज दिख रही है वैसे ही स्थिति 2008 में भी पैदा हुई थी. साल 2008 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 110 सीटें मिली थीं. तब बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी.

 

लेकिन तब भी उसे अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं हुआ था. कांग्रेस के पास 80, जेडीएस के पास 28 और 6 निर्दलीय विधायक थे. तब निर्दलीय विधायकों की मदद से बीजेपी की सरकार बनी और येदियुरप्पा सीएम बने थे. तब विधानसभा में केजी बोपैया ने बतौर प्रोटेम स्पीकर विधायकों को शपथ दिलाई थी.

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उस समय येदियुरप्पा ने निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर सरकार तो बना ली थी लेकिन वह और विधायक अपने पाले में लाना चाहते थे. इसलिए येदियुरप्पा ने 7 विपक्षी विधायकों पर डोरे डाले. अब डर यह था कि अगर ये विधायक सीधे बीजेपी में शामिल होते तो दल-बदल कानून के तहत इनकी सदस्यता चली जाती.

इसलिए पहले इन्होंने इस्तीफा दिया इसके बाद उपचुनाव में ये सभी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े और उनमें से 5 ने जीत दर्ज की. इस हिसाब से येदियुरप्पा के पास 115 विधायक हो गए थे.

First published: 19 May 2018, 12:57 IST
 
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