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कर्नाटक पर SC ने दिए दो विकल्प- राज्यपाल के फैसले की समीक्षा या कल तक फ्लोर टेस्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 May 2018, 11:32 IST

कर्नाटक में येदियुरप्पा सरकार के गठन को लेकर कांग्रेस ने राज्यपाल के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी जिस पर आज सुनवाई हुई. जिसके बाद बीजेपी के वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को राज्यपाल को दी हुई चिट्ठी सौंपी. मुकुल रोहतगी ने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस के विधायक बीजेपी को सपोर्ट करेंगे और इस स्टैंड पर वह कुछ नहीं कहना चाहते.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास दो विकल्प हैं- एक राज्यपाल के फैसले की पूरी विस्तृत सुनवाई करें. दूसरा क्यों ने कल ही बहुमत परीक्षण करा दें? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेहतर हो कल तक बहुमत परीक्षण हो. कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल के फैसले का टेस्ट किया जाए और शनिवार को ही फ्लोर टेस्ट हो. जस्टिस सीकरी ने कहा कि फ्लोर टेस्ट हो जाना चाहिए और सदन को यह फैसला लेने दीजिए कि किसके पास बहुमत है.

वहीं कांग्रेस की ओर से दलील देते हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस शनिवार को बिना किसी देरी के फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार है. वहीं रोहतगी ने एक हफ्ते का टाइम मांगा है. उन्होंने फौरन बहुमत परीक्षण का विरोध किया. 

बता दें कि कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें मिली थीं. इसके बाद कांग्रेस और जेडीएस ने पोस्ट पोल अलायंस कर सरकार बनाने का दावा किया था. इसे लेकर दोनों पार्टियों ने कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला को पत्र भी सौंपा था लेकिन राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दिया था.

इसे लेकर दोनों पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. दोनों दलों ने राज्यपाल के फैसले को चुनौती दी थी और बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार बीएस येदियुरप्पा को शपथ ग्रहण को रोक देने की बात कही थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के इस मांग को मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह शपथ ग्रहण कार्यक्रम नहीं रोक सकता.

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हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा था कि येदियुरप्पा को वो चिट्ठी सौंपनी होगी जो उन्होंने राज्यपाल को देने का दावा किया था जिसमें विधायकों के समर्थन का दावा किया गया था. देर रात दो बजकर 11 मिनट से गुरुवार सुबह पांच बजकर 28 मिनट तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ने यह स्पष्ट किया कि राज्य में शपथ ग्रहण और सरकार के गठन की प्रक्रिया उस के समक्ष लंबित मामले के अंतिम फैसले के दायरे में आएगी.

तीन जजों की बेंच ने आदेश दिया था कि बीजेपी ने कर्नाटक में सरकार बनाने का दावा करने के लिए राज्यपाल वजुभाई वाला के समक्ष विधायकों के समर्थन का जो पत्र दिया है वह उसके समक्ष पेश किया जाए. कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल और येदियुरप्पा से राज्यपाल को बहुमत के समर्थन वाली चिट्ठी पेश करने के निर्देश दिए थे.

First published: 18 May 2018, 11:16 IST
 
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