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घाटी में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर सरकार का ढुलमुल रवैया

चारू कार्तिकेय | Updated on: 7 February 2017, 8:20 IST
QUICK PILL
  • पीडीपी की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के बयान को देखकर यह कहा जा सकता है कि वह अभी तक यह समझने में विफल रही हैं कि इन प्रदर्शनों से कैसे निपटा जाए.
  • 9 जुलाई से शुरू हुए विरोध में अब तक 65 लोगों की जान जा चुकी हैं. पीडीपी की महबूबा मुफ्ती का रवैया इस पूरे मामले में अनिश्चतता की रही है.

पीडीपी आैैर बीजेपी के गठबंधन वाली जम्मू-कश्मीर की सरकार राज्य में 9 जुलाइ के बाद चल रहे विरोध प्रदर्शन से निपटने में पूरी तरह विफल रही है. इस पूरे मामले में बीजेपी का रुख सभी को पता है लेकिन पीडीपी ने जिस तरह से विरोध प्रर्दशन से निपटने का तरीका अपनाया है, उसे देखकर कहा जा सकता है कि उसे पता नहीं कि राज्य में चल रही अशांति से कैसे निपटा जाए.

9 जुलाई से शुरू हुए विरोध में अब तक 65 लोगों की जान जा चुकी हैं. पीडीपी की महबूबा मुफती का रवैया इस पूरे मामले में अनिश्चतता की रही है. 

इसका अंदाजा महबूबा आैर पीडीपी के बयानों को देखकर लगाया जा सकता है. 

21 जुलाई- 'वानी को मारने की क्या जरूरत थी'

पीडीपी के सांसद मुजफफर हुसैन बेग ने पहली बार इस मामले में बोला. लोकसभा में एक बहस में उन्होंने आतंकी बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने का मामला उठाया. उन्होंने पूछा कि अगर वानी सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में था तो फिर पहले उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया.

22 जुलाई- अपनी क्षमता से समस्या को सुलझानेे में मदद करें

विरोध प्रदर्शन के बाद पहली बार महबूबा मुफ्ती नेे चुप्पी तोड़ते हुए बयान दिया. श्रीनगर में सवर्दलीय बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सभी दल अपनी क्षमता के मुताबिक इस समस्या को सुलझाने में मदद करेें. 

25 जुलाई-पाकिस्तान की वजह से युवा उठा रहे हथियार

पहली बार मुफ्ती ने घाटी की समस्या के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान अपने यहां हथियार उठाने वालों का उत्पीड़न करता है. वहीं वह कश्मीरी बच्चों को हथियार उठाने की सीख देता है. यह गलत आैर नौटंकी है.'

28 जुलाई- बुरहान वानी को एक मौका चाहिए था

यह जाहिर तौर पर वानी की मौत का शोक मनाने वालों के लिए मरहम की तरह था. मुफ्ती ने कहा कि सुरक्षा बलों को बुरहान के बारे में पता नहीं था. अगर उन्हें पता होता कि वहां बुरहान है तो उसे एक माैका आैर मिलता. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह मौका बुरहान का कैसे मिलता.

4 अगस्त- बुरहान वानी की हत्या के लिए कश्मीरी युवाआें से मांगी माफी

एक बार फिर से मुख्यमंत्री ने बुरहान की मौत के मामले में बयान देते हुए राज्य के पुलिसवालों से कश्मीरी युवाआें से माफी मांगे जाने की अपील की. खबरों के मुताबिक इससे प्रदर्शनकारियों को शांत करने में मदद मिली.

9 अगस्त- अटल बिहारी वाजपेयी के समय की बातचीत शुरू कर घाव भरने की कोेशिश हो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के पहले उन्होंने यह बयान दिया. मोदी अभी तक कश्मीर के लोगों से संवाद करनेे की स्थिति से बचते रहे हैं. यह पहली बार है जब उन्होंने वाजपेयी की पहल को याद करने की अपील की.

9 अगस्त- नरेंद्र मोदी के बयान का स्वागत करें

पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता और राज्य के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने मोदी के बयान का स्वागत किया. मध्य प्रदेश की रैली में मोदी ने कहा था, 'इंसानियत, जम्हूरियत आैर कश्मीरियत की भावना को बचाने के लिए लोेकतंत्र आैर बातचीत का रास्ता जरूरी है.'

15 अगस्त- एेसा पहली बार नहीं है जब कश्मीर में मुठभेड़ हुई हो

वानी की मौत पर बयान देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में यह कोई पहली मुठभेड़ नहीं है. उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यह बयान दिया.

15 अगस्त- राज्य आैर देश के नेताआें के बीच विश्वास की कमी है

महबूबा ने कहा कि केंद्र सरकार आैर राज्य के नेताआें के बीच संवाद की कमी है. उन्होंने कहा, 'अगर कोई भरोसेे की कमी है तो वह राज्य आैर देश केे नेताआें के बीच है. जम्मू कश्मीर आैर देश के लोगों के बीच कोई झगड़ा नहीं होना चाहिए.'

23 अगस्त- 95 फीसदी कश्मीरी हिंसा कर रहे 5 फीसदी कश्मीरियों के साथ नहीं है

मुफ्ती ने कहा कि कुछ निहित स्वार्थ वाले लोग उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह लोग बच्चों को उकसाकर उनकी आड़ में हिंसा फैला रहे हैं. उन्होंने कहा कि जबरदस्ती विरोध किया जा रहा है. बाद में उनकी पार्टी के लोगों ने उनके बयान का समर्थन किया.

24 अगस्त- विरोध आंदोलन है

मुख्यमंत्री के विरोध के बनावटी होने के बाद पीडीपी के प्रवक्ता ने उनके बयान की हवा निकाल दी. महबूब बेग ने घाटी में चल रहे विरोध को आंदोलन बताया. उन्होंने कहा कि मौजूदा विरोध अांदोलन है आैैर यह किसी पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि पूरे सिस्टम के खिलाफ है.

First published: 26 August 2016, 8:42 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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