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कश्मीर संकट: सर्वदलीय समूह का सर्वव्यापी बहिष्कार

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 September 2016, 7:31 IST

रविवार की सुबह दिल्ली से एक जहाज श्रीनगर के लिए उड़ा. जहाज में भारतीय राजनीति के तमाम बड़े चेहरे हंसमुख नजर आ रहे थे. यह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल था जो कश्मीर में बीते करीब दो महीनों से जारी हिंसा और अशांति के माहौल को थामने की गरज से गया है. सुबह हवाई जहाज में कश्मीर की जनता का भरोसा जीतने का जो भरोसा नेताओं के चेहरे पर दिख रहा था, साम होते-होते उन पर मुर्दानगी छा गई.

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्‍य अलग-अलग टीमों में अलग-अलग कश्मीरी नेताओं को साधने के लिए निकले थे. उनकी कोशिश अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं से मिलने की थी, लेकिन हर जगह से भारतीय नेताओं को खाली हाथ लौटना पड़ा.

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एमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी चश्‍मे-शाही जेल में राजनीतिक समाधान की गरज से उदारवादी हुर्रियत समूह के नेता मीरवाइज उमर फारुख से मुलाकात करने पहुंचे. मीरवाइज़ चश्मेशाही जेल में नजरबंद हैं. मीरवाइज ने ओवैसी से चंद मिनट की शिष्टाचार भेंट के बाद किसी राजनीतिक बातचीत से इनकार कर दिया. ओवैसी के मुताबिक मीरवाइज कश्मीर की मौजूदा स्थिति और केंद्र सरकार के रवैए से काफी व्‍यथित हैं.

मीरवाइज ने ओवैसी से चंद मिनट की शिष्टाचार भेंट के बाद किसी राजनीतिक बातचीत से इनकार कर दिया

नेताओं की एक टीम जिसमें वामपंथी नेता सीताराम येचुरी, डी राजा और जदयू नेता शरद यादव पृथकतावादी नेता यासीन मलिक से मिलने हुमहामा पुलिस स्‍टेशन पहुंचे. यासीन मलिक यहीं पर नजरबंद हैं लेकिन मलिक ने उनसे बात करने से इनकार कर दिया. शरद यादव ने बताया कि मलिक ने उनसे दिल्ली में आकर मिलने और बातचीत का वादा किया है. हालांकि उन्होंने बरवक्त किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया.

इससे पहले नेताओं का यही समूह हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी से मिलने उनके निवास पर पहुंचा था. वह हैदरपुरा स्थित अपने घर में ही हाउस अरेस्‍ट हैं. जब तीनों नेता उनके आवास पर पहुंचे तब घर का दरवाजा बंद था. लोगों ने दरवाजा भी खटखटाया लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला. कुछ मिनट के इंतजार के बाद प्रक्रिया दोहराई गई लेकिन नतीजा सिफर रहा. इस बीच स्थानीय लोगों की भीड़ वहां इकट्ठा होने लगी. तीनों नेता वापस लौटने लगे तो भीड़ भारत विरोधी, आजादी समर्थक नारे लगाने लगी. नारे तब तक लगते रहे जब तक कि नेताओं का समूह उनकी आंखों से ओझल नहीं हो गया.

एक दिन पहले ही जम्मू कश्मीर में शांति बहाली के तहत मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से बातचीत का न्यौता हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने ठुकरा दिया था. हुर्रियत ने एक साझा बयान जारी कर इस पेशकश को ठुकरा दिया था.

हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गीलानी, मीरवाइज़ उमर फारुख और मोहम्मद यासीन मलिक ने एक साझा बयान में कहा था कि जिस प्रतिनिधिमंडल ने ये साफ नहीं किया है कि उसका क्या एजेंडा है और उसके हाथ में कितने अधिकार है, उससे बातचीत करने का क्या फायदा.

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस समेत सभी पक्षों को बातचीत का न्यौता भेजा था. महबूबा ने पीडीपी अध्यक्ष के तौर पर कश्मीर के सभी समूहों को लिखे पत्र में उनसे बातचीत में शामिल होकर समस्या का हल करने की अपील की थी.

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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से बातचीत का न्यौता हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने ठुकरा दिया था

लेकिन अलगाववादियों का कहना है कि सर्वदलीय प्रतिनिधिनिमंडल कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा मान कर बातचीत के लिए आ रहा है, लिहाजा वे इस तरह की बातचीत में हिस्सा नहीं लेंगे.

यानी हुर्रियत के पहले से ही वार्ता में शामिल न होने की घोषणा के बावजूद सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल कुछ नेता उनसे मुलाकात का समर्थन कर रहे थे. इनमें सीपीएम पोलित ब्यूरो प्रमुख सीताराम येचुरी और एमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी शामिल हैं. इन नेताओं का मानना था कि कम-से कम इनसे मुलाकात की कोशिश तो करनी ही चाहिए.

जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में दो दिनों के श्रीनगर दौरे पर है. राजनाथ सिंह ने कहा था कि टीम उन लोगों और संगठनों से बात करने की इच्छुक है, जो शांति और व्यवस्था की बहाली चाहते हैं. मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने संवाद पर जोर देते हुए कहा कि पूरे इलाक़े में शांति बहाल करने की कोशिश सबको करनी होगी.

दो महीने पहले कश्मीर में तनाव शुरू होने के बाद से गृहमंत्री राजनाथ सिंह तीसरी बार कश्मीर पहुंचे हैं. उनके नेतृत्व में इस दल के कश्मीर पहुंचने से एक दिन पहले ही दक्षिणी कश्मीर में पैलेट लगने से एक कश्मीरी युवक की मौत हो गई है.

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दो महीनों से कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में जारी हिंसा में अब तक पुलिस और सेना की कार्रवाई में 72 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं. मृतकों और घायलों में अधिकतर युवा हैं.

कश्मीर में बीते सप्ताह 51 दिनों के लगातार कर्फ्यू के बाद पहली बार ढील दी गई थी. इससे पहले साल 2010 में जब कश्मीर में हालात खराब हुए थे तब भी एक प्रतिनिधिमंडल कश्मीर गया था. उस दौरे के नतीजे में तीन सदस्यों की एक इंटरलॉक्युटर की टीम बनी थी जिसमें वरिष्ठ पत्रकार दिलीप पडगांवकर, प्रोफेसर राधा कुमार और पूर्व सूचना आयुक्त एमएम अंसारी शामिल थे.

इस बार हालात और भी खराब हैं. माना जा रहा है कि मौजूदा दौरे में जिस तरह से भारतीय नेताओं का बायकॉट किया गया है उसके पीछे एक वजह 2010 में बनी टीम की रिपोर्ट पर सरकार द्वारा कोई अमल नहीं करना भी है.
इस बीच कश्मीर घाटी में शांति और स्थिरता का इंतजार जारी है.
First published: 5 September 2016, 7:31 IST
 
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